नलिन नीलू की आंखों में देख रहा था।नीलू की आंखों में पानी था।नलिन बोला नीलू मेरा एक बार एयरफोर्स में सिलेक्शन होने दो मैं तुम्हारे पिता से तुम्हारा हाथ मांग लूंगा।अभी मेरी परिस्थिति ऐसी नहीं है।नलिन तुम मुझे भी तो समझो मै तुम्हारे बिना नहीं रह सकती।प्लीज़ नीलू कुछ दिन बस फिर हम एक होंगे ।
नीलू नलिन के गले लग रोने लगी।नीलू एक संभ्रांत परिवार की इकलौती बेटी थी। जहां उसके पिता एक समाज के बड़े व्यापारी थे वहीं नलिन के पिता एक मामूली से दफ्तर में काम करते थे।जहां नीलू का एक दिन का खर्च हजारों में होता वहां नलिन के घर उतने ही हजार महीने में आते थे।जिसमें नलिन समित माता पिता भाई और बहन थे कुल पांच लोगों का परिवार था।
मां भी पिता जी की मदद के लिए सिलाई का काम करती ताकि बच्चे अच्छे से पढ़ सके।नलिन ने अपने माता पिता के लिए बहुत सपने देखे थे बिना ट्यूशन उसने बारहवीं में फिर कॉलेज में टॉप किया स्कॉलरशिप और ट्यूशन पढ़ा अपनी पढ़ाई पूरी की उसका सपना था एयरफोर्स में जाने का जहां उसकी मेहनत से उसका सिलेक्शन हुआ
बस अब उसे ट्रेनिंग के लिए जाना था।नीलू और उसकी मुलाकात बड़ी दिलचस्प थी।नीलू की सहेली माला नलिन के कॉलेज में पढ़ती थी उसी को लेने नीलू अपनी बड़ी सी गाड़ी लेकर आई ।जब वो उतरी तो बिना देखे उसने दरवाजा खोल दिया जो नलिन को लग गया।
उसने सारी बोला उसे सांवला स्मार्ट सा नलिन उसके दिल में बस गया अब वो रोज किसी ना किसी बहाने नलिन के कॉलेज आती नलिन उसे अवॉइड ही करता।एक दिन नीलू आई और नलिन से बोली मुझे आप से कुछ बात करनी हैं पर नलिन बोला मुझे नहीं मेरी क्लास का टाइम हो रहा है।
प्लीज़ नलिन मेरी बात सुनकर जाओ नहीं तो मैं अपनी जान दे दूंगी।माला बोली नलिन तुम सुन लो वो क्या कह रही है? माला की बात सुनकर नलिन नीलू के साथ गाड़ी में बैठ गया। थोड़ी दूर एक कैफे के सामने नीलू ने गाड़ी रोकी। नलिन बोला इतना महंगा कैफे में अफोर्ड नहीं कर सकता।
नीलू बोली बात मुझे करनी हैं आप चिंता मत करो।नलिन नीलू के पीछे पीछै आया और बोला कहो।नीलू बोली नलिन मै लॉ कॉलेज की छात्रा हूं जिस के आगे पीछे ना जाने कितने लड़के घूमते है ।जानती हूं कुछ मेरी खूबसूरती के कारण या मेरे स्टेटस के कारण मेरे पास आते है।पर तुम वो पहले शख्स हो जिसको मैं चाहती हूं मैं तुम्हारे साथ ये सफर बढ़ाना चाहती हूं।
एक मिनट मिस पहले तो आप मुझे कितना जानती हैं मै कौन हूं मै एक साधारण से परिवार का लड़का हूं जिसके घर में माता पिता है और २ भाई बहन है।मेरे पिताजी एक मामूली सी नौकरी करते है और मेरी मां सिलाई करती हैं।मै बचपन से अपने दम पर पढ़ता आया हूं।मेरा सपना एयरफोर्स में जाने का है ताकि मैं अपने परिवार को उचित मान दिलवा सकूं
और अपने देश के लिए कुछ कर सकूं।आप एक रईस परिवार की महलों में रहने वाली लड़की है और मेरा घर ही 10×12 का है आपका मेरा मेल नहीं और नलिन वहां से आ गया।नलिन की सादगी नीलू को भा गई।इम्तिहान हुए नलिन नीलू दोनों ने टॉप किया
उस दिन नीलू नलिन से मिलने आई बोली नलिन तुम मेरा प्यार हो तुम्हारे राह में मैं रोड़ा नहीं बनूंगी पर मै तुम्हारे बिना जी नहीं पाऊंगी ।नलिन ने नीलू को ध्यान से देखा कमज़ोर लग रही थी उसने पूछा तुम्हारी तबीयत ठीक है।माला बोली नलिन तुम्हारी ना के बाद से बस जी रही है ना खाती पीती है
ना कुछ आज अपने कॉलेज में इसने भी टॉप किया है।नलिन नीलू के पास गया और बोला नीलू क्यों अपना भविष्य खराब करती हो मेरे पास क्या मिलेगा मुझे तुम चाहिए और तुम्हारे लिए मै इंतजार करूंगी।बस यू ही उनकी प्रेम कहानी शुरू हुई।नलिन ने एयरफोर्स के लिए फॉर्म भरा एग्जाम दिए सब फर्स्ट क्लास में पास किए अब ट्रेनिंग उसकी उरी बेस आई थी
इसलिए वो नीलू से मिलने आया था।नलिन चला गया और नीलू भी अपनी प्रैक्टिस में लग गई।माता पिता रिश्ते की बात करते तो वो टाल जाती फिर एक दिन मोहन का परिवार उसे देखने आया।मोहन नीलू के पिता राजीव के बिजनेस पार्टनर का बेटा था।पर नीलू ने मना कर दिया मोहन की जिद नीलू बन बैठी थी।
राजीव गुस्से में घर आए बोले आखिर शादी क्यों नहीं करना चाहती तुम मोहन से पापा मै किसी और को चाहती हूं।किसे उस फटीचर को जिसके साथ तुम घूमती थी सब पता है मुझे ।पापा वो बहुत लायक है वो एयरफोर्स की ट्रेनिंग पर गया है पहली पोस्टिंग मिलते ही रिश्ता ले कर आएगा और हम शादी कर लेंगे।
चटाक एक तमाचा नीलू के गाल पर पड़ा क्या कर रहे हो जवान लड़की पर हाथ उठा रहे हो।नीलू की मां गीता बोली इसे देखो ना मेरा सब मिट्टी में मिला ने पर तुली है। सॉरी पापा मै पढ़ी लिखी हूं शादी सिर्फ नलिन से करूंगी और उसका इंतजार करूंगी अगर आपको प्रॉबल है तो मै ये घर छोड़ कर चली जाऊंगी।
नीलू वहां से चली गई। कुछ दिन बाद नीलू अपने पिता का घर छोड़ एक फ्लैट में आ गई जो नलिन के घर के पास पड़ता था।वो नलिन के साथ एक दो बार उसके माता पिता से मिलने आ चुकी थी तो वो भी नीलू को जानते थे वो उनसे मिलने आती रहती थी।नलिन की ट्रेनिंग खत्म हुई और पहली पोस्टिंग हो गई।
नलिन की आने की खुशी में सब खुश थे नीलू भी सुबह ही नलिन के घर आ गई।परंतु तभी कारगिल युद्ध छिड़ गया और सभी की छुट्टियां रद्द कर दी गई।सब सकते में थे नलिन के मैसेज पर नीलू ने इतना ही कहा तुम जाओ मैं इंतजार करूंगी।युद्ध हुआ भारत जीत गया परंतु नलिन का कुछ पता नहीं चल पा रहा था।
सबने उसे गुमशुदा मान लिया एयरफोर्स ऑफ़िस से भी यही खबर आई पर नीलू जानती थी कि उसका नलिन उसे नहीं छोड़ सकता उसके विश्वास की डोर बहुत मजबूत थी। नीलू ने नलिन के घर की जिम्मेदारी अपने सर ले ली उसकी बहन मधु पढ़लिख कर प्रोफेसर लग गई
उसकी शादी विवेक से करवादी जो खुद भी एक प्राध्यापक था वो लखनऊ शिफ्ट हो गई ।छोटे धीरेन का सिलेक्शन आई आई टी रुड़की में हुआ वहां से बीटेक कर वो भी बड़ी कंपनी में लग गया उसको पोस्टिंग हैदराबाद मिली।उसने माता पिता से खूब कहा साथ चलने को पर वो नहीं गए नलिन आया तो हमें ढूंढेगा।धीरेन को समझा कर नीलू ने भेजा।नीलू वही रहती उन दोनों के पास लोग
पूछते तो नलिन की मां कहती मेरी बहु है सब पीछे मजाक बनाते बिना शादी की दुल्हन इस बात को आज 5 साल होने को आ रहे थे।नीलू के माता पिता और नलिन के माता पिता ने बहुत कोशिश की कि नीलू शादी कर ले।पर नीलू का विश्वास कायम था
कि नलिन आएगा।रोज वो एयरफोर्स ऑफ़िस फोन करती थी पर जवाब नहीं होता।घंटी बजते ही सब वहां समझ जाते दिल्ली से फोन होगा।पर आज कुछ अलग था नीलू सुबह उठी तो उसे लगा मालिन पास है उसे बड़ी ही शिद्दत से उसकी याद आ रही थी।
तभी उसका फोन बजा फोन एयरफोर्स ऑफ़िस से ही था कि हमारे तीन ऑफिसर मिल गए है।कृपया आप कल शाम तक उरी पहुंच जाए।नीलू ने धीरेन को फोन कर कहा यहां से मैं निकल रही हूँ तुम वहां से आओ ।नीलू ने काम का बहाना बनाया दोनो श्रीनगर पहुंच गए
और फिर उरी।उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया तो सच में नलिन था।कमजोर चोट के निशान।नीलू वही रही 3 महीने बाद वो नलिन को ले कर घर आई ।अब नलिन एक ऑफिसर था अच्छा बंगला सब था उसके पास जो भी नलिन से मिला बस यही बोला नीलू का विश्वास जीत गया वो सावित्री की तरह सत्यवान को वापस ले आई।
नीलू और नलिन की शादी हुई।शादी के बाद वो दोनों उरी चले गए।प्यारे प्यारे दो बच्चे दादा दादी सब साथ रहते । रिटायरमेंट होने पर नलिन ने एस ए पायलट Air इंडिया ज्वाइन कर ली।आज नलिन और नीलू की 25 वी शादी की सालगिरह है और वो दोनों अपने घर आ रहे है बेंगलुरु से कप्तान नलिन की फ्लाइट से।
फ्लाइट दिल्ली एयरपोर्ट लैंड हुई तो सबके उतरने पर खुद नलिन नीलू को लेने आया।घर दुल्हन की तरह सजा था भाई बहन रिश्तेदार बच्चे ।नीलू के माता पिता नलिन के पिता सब स्वागत में खड़े थे जोरदार जश्न मनाया गया और हर किसी ने बस यही कहा विश्वास की डोर मजबूत हो तो चट्टान भी हिल जाती हैं
जैसे नीलू के प्यार और विश्वास ने 5 साल बाद नलिन को दुश्मन की कैद से छुड़ा लिया था।नलिन नीलू के पास आकर बोला जानेमन तुम्हारा शुक्रिया मेरी जिंदगी में आने का तुम ना होती तो मेरा क्या होता।तुम मेरे थे,मेरे हो और मेरे रहोगे।पीछे से गाना बजा बार बार दिन ये आए और दोनों।केक काटने के लिए बच्चों के साथ बढ़ गए।
स्वरचित कहानी
आपकी सखी
खुशी