*उम्मीदों का नया सवेरा* – तोषिका

इतने साल हो गए तुम्हे जहां जेल में अपनी सजा काट ते हुए पर तुम्हारा बर्ताव देख कर तो नहीं लगता कि तुमने कभी किसी का खून किया होगा। आरक्षी ने बड़े सामान्य स्वर में पूछा। उधर सेल में बैठा साहिल बोला “सर अब मैं आपको क्या बताऊं, जब किसी की जिंदगी में *उम्मीदों का नया सवेरा* आता है ना तो वो आपके जीवन से अंधेरा जैसे गायब ही कर देता है।”

साहिल ने अपनी कहानी बताना शुरू की “कई सालों पहले की बात थी, उस समय मेरे जीवन में गरीबी बहुत थी पर मेरी मेहनत में कोई कमी नहीं थी। अपना हक का कामना और खाना मेरे उसूल होता था। मेरी जिंदगी में इसके अलावा और कुछ नहीं था। फिर एक दिन मैं जहां पे काम करता था वहां कोई नया आदमी आया काम करने के लिए। उसका नाम सुरेश था। 

वो काफी बड़े घर से था और दिल का बहुत अच्छा भी। धीरे धीरे हमारी बात शुरू हुई और फिर हम गहरे दोस्त बन गए। 

सुरेश के लगभग एक साल के बाद हमारे ऑफिस में एक लड़की आई उसका नाम स्नेहा था।

धीरे धीरे हम तीन काफी अच्छे दोस्त बन गए थे। फिर एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिस से मेरी जिंदगी में अंधेरा ही छा गया।

आरक्षी से रहा ना गया उसने एक दम से पूछा “ऐसा क्या हुआ कि तुम्हारी उजाले जैसे जिंदगी में अंधेरा हो गया?”

साहिल ने अपनी बात पूरी करते हुए बोला एक दिन मैं दफ्तर नहीं गया था। उस रात सुरेश और स्नेहा ही अकेले घर वापिस जा रहे थे। तभी कुछ गुंडे आए और स्नेहा को छेड़ने लगे, सुरेश उनसे कुछ बोले उस से पहले ही स्नेहा ने घबराहट में सुरेश का हाथ पकड़ कर उसे रोक लिया।

तभी गहरी सांस लेके बोली, सुरेश तुम चलो जहां से इन लोगों का ये रोज का है।

ये सब सुन कर सुरेश को बहुत गुस्सा आया और उसने स्नेहा का हाथ झटकते हुए बोला “स्नेहा अगर तुम ऐसे डरती रही तो वो कभी नहीं चुप बैठेंगे। तुम यही रुको, मैं बात करके आता हू।”

१० मिनिट होने को चले थे, और सुरेश वापिस नहीं आया था। जब वो वहां गई तो उनकी लड़ाई चल रही थी और अचानक से गोली चलने की आवाज़ आई, वो सुरेश को लगी थी। ये सब देख कर स्नेहा चौंक गई, उसको कुछ नहीं समझ आ रहा था कि वो क्या करे, उसको गुस्सा आया तो पास पड़ी बंदूक से उसने गुंडों पर गोली चला दी।

गोलियों की आवाज सुन कर स्नेहा जमीन पर गिर गई और तब एक घंटे बाद उसने मुझे कॉल करके तुरंत बुलाया और अपनी कांपती हुई आवाज से सब बताया।

तब मुझे एहसास हुआ कि मैं अपनी बहन जैसी दोस्त और भाई जैसे मित्र को नहीं बचा पाया तो वो स्नेहा और सुरेश के लिए इतना तो कर ही सकता है।

बस यही मेरी कहानी है। तभी एक आवाज आई और साहिल को बाहर बुलाया, उधर स्नेहा उस से मिलने आई थी। जैसे ही उसने साहिल को देखा, वो कमजोर सा हो गया था। ऐसी हालत में साहिल को देख कर स्नेहा की आँखें नम हो गई और बोली, आज तुम्हारी रिहाई है। तुमने और सुरेश ने जो मेरे लिए किया वो कोई भी अपना नहीं करता।

उधर साहिल जेल से बाहर आया और स्नेहा के साथ फिर सुरेश की अस्थियां बहाने गया।

लेखिका

तोषिका

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