ऐसे ही चलता रहा ना तो इस *वक्त की मार* में पीछे रह जाओगे और सब तुम्हारे आगे निकल जाएंगे। बचपन से यही सुनता आ रहा हू, और मानता आ रहा हू पर इस भेड़ चाल के चलते मैने अपना सब कुछ पीछे छोड़ दिया, सही कहते है लोग कि वक्त किसी का अपना नहीं होता है, कभी किसी के साथ तो कभी किसी और के साथ,
श्याम ऐसा बोलते बोलते रो पड़ा। उसका नौकर रामू, श्याम को संभालते हुए बोला “साब आपके इस बड़े आलीशान घर में मैं इतने सालों से तो काम नहीं कर रहा हू, पर मैने आपको कभी ऐसे रोते हुए नहीं देखा। आप इतने काबिल है, इतना बड़ा कारोबार है, दौलत है, शौरत है और क्या चाहिए?”
श्याम बोला “शुरू शुरू में मुझे भी यही लगता था कि मेरे पास सब कुछ है, मुझे किसी से मदद मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी पर कुदरत का करिश्मा देखो कि मुझे मदद मांगनी पड़ी तो किस से, वक्त से, वो वक्त जो एक बार चला जाए तो लौट कर वापिस नहीं आता।”
रामू अब भी हैरान था, उसको समझ नहीं आ रहा था कि ऐसा क्या चाहिए है, साब जी को, जिसके लिए वो वक्त से लड़ने के लिए भी तैयार हो गए।
श्याम ने अपनी कहानी बतानी शुरू की, एक समय ऐसा था जब उसके पास पैसे तो छोड़ो, एक घर भी नहीं था। उस समय उसे कोई नहीं जानता था, जिसके चलते उसको बहुत दुख सहना पड़ा और कोई उसे दोस्त भी नहीं बनाता था पर लोग उसे थी कहते थे सब वक्त का खेल है, तो उस ने अपने वक्त को ही बदलने ठानी।
दिन रात मेहनत करके पैसे कमाता और अपनी पढ़ाई की, फिर उसके दिमाग में बस अमीर बनने की लत थी, उस मेहनत के चक्कर में उसने अपनी कि परवाह न करते हुए बस अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा, यहां तक कि उसने इसके चलते अपने पहले प्यार की भी कुर्बानी दे दी।
कुछ सालों के बाद वह अमीर बन गया और बिजनेस टायकून्स में उसका खूब नाम भी हुआ, उसकी शादी किसी एक बड़े आदमी की बेटी से भी हो गई। लेकिन उसको डर था कि वो अगर इस दौड़ में हल्का सा भी रुका तो वो पीछे रह जाएगा जिसके चलते
उसने अपनी पत्नी पर इतना ध्यान कभी नहीं दिया और शादी के 2 साल के बाद वो उसको तलक दे कर चली गई। उस समय उसने सोचा कि अगर उसने रोने धोने पर अपना समय व्यर्थ करने का भी समय नहीं है। इस तरह काम करते करते उसको इतने साल हो गए कि उसको पता ही नहीं चला वो बूढ़ा हो चुका है।
अपनी इस कहानी को बताते हुए उसने रामू से पूछा “तुम्हे पता है, रामू आज इतने सालों के बाद मुझे पता चला मेरी बीवी, जिस समय मुझे छोड़ कर गई वो मेरे बच्चे की मां बनने वाली थी और आज इत्तेफाक से मेरा जब उस से मिलने हुआ तो मुझे पता चला।
मैने जब उस से पूछा कि उसने मुझ से इतनी बड़ी बात क्यों छुपाई तो पता है उसने क्या बोला?
अपनी बात को पूरी करते हुए श्याम बोला “उसने मुझे बोला कि, तुम मेरे ऊपर ध्यान नहीं दे ते थे और जब एक औरत मां बनने वाली होती है, तो सबसे ज्यादा साथ उसको उसके पति का चाहिए होता है, जो उसको कभी भी मेरे से नहीं मिला, जिसके चलते जब उसको इसका पता चला कि वो मां बनने वाली है, उसने मुझे बताना भी नहीं समझा।”
रामू ये सुनते ही हैरान हो गया और बोला ” साब आपके साथ तो ये बहुत बुरा हुआ।”
इस पर श्याम बोला “नहीं रामू नहीं, शायद उस समय अगर मेरी बीवी मुझे बता देती तो मैं भी यही सोचता हू, लेकिन अगर मैं अब सोचूं तो उसका फैसला बिल्कुल सही था, मैं ऐसा ही था और उस समय मेरे होने वाले बच्चे को भी प्यार की जरूरत थी।”
आखिर में सूरज ढल गया था और रोते हुए श्याम के पास बस यही कुछ शब्द थे कहने के लिए और वो थे “आज मुझे समझ आ गया है, कि पैसा हो या ना हो पर वापिस आ ही जाएगा लेकिन बीता हुआ वक्त और परिवार दुबारा नहीं आता है और इस अपराध बोध में ही अब बची हुई उमर निकालेगी।”
ये बात रामू को भी समझ आ गई थी और उसने फैसला लिया कि वो अब का के साथ अपने घर पर भी समय देगा।
लेखिका
तोषिका