*घर के लक्ष्मी का सम्मान* – तोषिका

आज भगवान ने हमारी सुन ली, हमें बहु के रूप में एक बेटी दे दी खुश होते हुए माही के सास ससुर बोले। अरे समधन जी आज से हमारे घर की लक्ष्मी, आपके घर की लक्ष्मी है। माही की सास बोली “आप लोग फिकर ना कीजिए, माही बेटी को हम बिल्कुल पलकों की छांव में रखेंगे। 

वो दिन सोचते सोचते माही वर्तमान में आ गई और उसकी आंखों से आंसू आ रहे थे और रोते रोते बोल रही थी “मुझे मत मारो देव, मुझे…मुझे मत मारो। मेरे पास जो भी था सब कुछ मैने दे दिया है तुम्हे… रोती और बिलखती हुई माही बोली 

तभी उधर से उसको हल्की हल्की अपने मां बाप की आवाज़ सुनाई दी “बेटा हम यही है, क्या हुआ? उठो माही उठो”। ये सुनते ही माही एकदम से झटके से उठी और अपने मां को गले लग कर बोली “मां मुझे फिर से वो ही डरावना सपना आया, वो ही सपना जिसमें मेरी विदाई हुई और देव मुझे मार रहे है।” माही की मां ने उसको कसके गले लगा लिया और बोली “डरो मत बेटी, हम तुम्हारे साथ है और अब तुम उस कैद से आजाद हो।” 

माही को दुबारा सुला कर उसके माता पिता बाहर आए और आपस में वार्तालाप करते हुए बोले “पता नहीं माही के ये सपने कब बंद होंगे, हमारी ही गलती थी कि ऐसे जगह हमने उसका रिश्ता कराया, कि हमारी हस्ती खेलती माही का ये हाल कर दिया।”

*अगले दिन*

दरवाजे पर घंटी बजी, जब माही ने दरवाजा खोला तो वो फूले नहीं समा रही थी, उसका बचपन का दोस्त रोहन उस से मिलने काफी सालों बाद आया था, आते ही उसने माही के पैर छू ही रहा था कि एक दम से माही बोली “ये क्या कर रहे हो तुम रोहन?” रोहन बोला “मैं क्या कर रहा हू? मैं घर के लक्ष्मी के पैर छू रहा हू, आखिर *घर के लक्ष्मी का सम्मान* तो करना चाहिए।” ये सुनते ही माही और उसके मां बाप की आँखें भर आई। रोहन ने माहौल को समझते हुए बात को बदला और फिर से खुशनुमा माहौल कर दिया।

बाद में जब रोहन और माही उसके कमरे में गए तो माही की मां बोली “क्या आप भी वो ही सोच रहे है, जो मैं सोच रही हू?” माही के पापा बोले “सोच तो मैं भी वो ही रहा हू पर अभी माही के तलाक को बस ६ महीने ही हुए है।” इस पर माही की मां बोली “बात की कही से तो शुरुवात होती है, और मुझे पूरा यकीन है कि माही, रोहन के साथ खुश रहेगी और वो हमारी पहले जैसे वाली माही बन जाएगी।

*३ महीने बाद*

माही अब धीरे धीरे खुल गई थी और उसके सपने भी कम हो गए थे और ये सब रोहन की वजह से ही हुआ था। रोहन ने उसके बुरे वक्त में उसकी ढाल बन कर रहा और आखिर करे भी क्यों ना, क्योंकि वो उसकी पहली दोस्त बनी थी जब उस से कोई दोस्ती नहीं करना चाहता था और माही उसका पहला और आखिरी प्यार भी है। इसी के चलते रोहन ने माही को प्रपोज भी कर दिया था लेकिन उधर माही कुछ और ही सोच रही थी।

 इन कुछ महीनों में माही को भी कही न कही प्यार होने लग गया था, पर फिर भी वो आगे बढ़ने से हिचकिचा रही थी और सोच रही थी कि “कही उसके साथ वो ही कहानी दुबारा हो गई तो? कही वो फिर से उस बंधन में ना बंध जाए?” 

ये सारे विचार उसके मां और पापा ने समझ लिए थे और वो माही को बोले “बेटा तुम्हारा जो भी फैसला होगा, हमे मंजूर होगा।” उसने हिम्मत जुटाई और रोहन को बोला “रोहन मैं तुमसे प्यार करती हू, पर मैं अभी दुबारा शादी के बंधन में बंधने के लिए त्यार नहीं हू, अभी मैं अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करना चाहती हू। क्या तुम तक मेरा इंतजार कर सकते हो?

रोहन मुस्कुराया और बोला “मैंने इतने साल तुमसे ही प्यार किया था और तुमसे ही करता रहूंगा तो मैं थोड़ा इंतजार और कर सकता हू।”

दोनों की आपस में बात होती रही और उधर माही ने अपना अच्छा सा करियर भी बनाया, साथ में कुछ सालों में अपनी नई जिंदगी भी सवारी और अब उसकी खुद की बेटी है जो घर की लक्ष्मी है और रोहन की जान है।

लेखिका

तोषिका

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