मेरा भी तो स्वाभिमान है – मंजू ओमर

मम्मी आपने मेरा कोई भाई या बहन क्यों नहीं किया कम से कम आपकी देखभाल करने के लिए जब मै नहीं होती तो दूसरा कोई तो होता। ये तो सब ऊपर वाले की देन है बेटा उसने बस तुम्हें ही मेरी गोद मे डालकर इतिश्री कर ली।

और बेटा तुम क्यों परेशान होती हो बार बार भागकर ससुराल से यहाँ आती हो मेरी देखभाल करने मत परेशान हुआ करो कमला तो है न मेरी देखभाल को कुमुद बोली। अरे वो तो बस सब काम करके अपने घर चली जाती है दिनभर तक आप अकेले ही होती है न।

एक बार पापा होते तो मुझे इतनी चिंता न होती लेकिन पापा को भी हम दोनों को छोड़कर इतनी जल्दी थी जाने की कि इतनी कम उम्र मे हम दोनों को छोड़कर चले गए। अब तक तो आपने ही मेरी सारी जिम्मेदारी उठाई है, मुझे पढाया लिखाया, मेरी शादी की। तो अब मेरा भी तो फर्ज बनता है कि आपकी देखभाल करूँ। 

                 रूपाली कुमुद और प्रकाश जी की इकलौती सतांन थी। प्रकाश जी रेलवे मे नौकरी करते थे। प्रकाश जी की रेलवे मे आन डयूटी एक र्दुघटना मे मृत्यु हो गई थी।

तब रूपाली हाई स्कूल मे पढती थी। आन डयूटी मृत्यु होने से रेलवे से काफी मुआवजा पैसे के रूप मे कुमुद जी को मिला था। जिससे उनको जिविकोर्पान के लिए कुछ काम नहीं करना पड़ा। उसी पैसे से रूपाली की पढ़ाई लिखाई और फिर शादी भी हो गई

        रूपाली ने पोस्ट ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की थी। पढाई के दौरान ही रूपाली दीपेश को पसंद करती थी। लेकिन शर्त यही थी कि पहले पढाई पूरी करेगें फिर घर मे बात करेगे। पढाई पूरी करने के बाद दीपेश की नौकरी लग गई। लेकिन रूपाली नौकरी नहीं करना चाहती थी।

नौकरी करने मे उसे कोई  रूचि नहीं थी फिर एक दिन रूपाली ने मम्मी को बताया कि वह अपने साथ पढने वाले दीपेश को व़ पसंद करती है और उससे शादी करना चाहती है। कुमुद जी ने दीपेश के बारे कुछ जानकारी हासिल की समझा बूझा सब ठीक था तो वो शादी को तैयार हो गई। 

           अब शादी हो  गई और रूपाली साल के अदरं ही एक बेटी की मां बन गई। एक दिन रूपाली को पता लगा कि मम्मी अचानक से चककर खाकर गिर पडी है कमला का फोन आया। रूपाली बेटी अनाया को लेकर मम्मी की तरफ भागी। डाक्टर के पास ले गई तो पता लगा कि मम्मी का वीपी शूट कर गया था और शुगर भी हाई था।

कुछ दवा और एहतियात की हिदायत देकर दो घटें मे घर भेज दिया। मम्मी को लेकर रूपाली घर आ गई। कुछ नार्मल होने पर रूपाली से कहा बेटी घर जाओ अब मै ठीक हूँ। नहीं मम्मी अभी मै आपको अकेले छोडकर नहीं जाऊंगी आपके पास कोई नहीं है। आप अपना ध्यान नही रखती हो मै यहाँ दो तीन दिन रूक जाती हूँ।

नहीं बेटी अब मै ठीक हू तुम जाओ परेशान न हो। अपने घर का भी ध्यान रखो। दीपेश परेशान हो रहा होगा। थोड़ी देर को ही तुम आ जाती हो तो तुम्हे और अनाया को देखकर मै ठीक हो जाती हू। जाओ बटा पपरेशान न हो मै ठीक हूँ। 

          यहाँ जब दीपेश घर आया तो रूपाली को न देखकर परेशान हो गया। उसे गुस्सा आ रहा था कि जब देखो तब रूपाली मायके ही गई रहती है। आने दो आज मै उसे सख्ती से मना करता हूँ। अभी दीपेश मन मे सोंच ही रहा था कि रूपाली आ गई।

पहले तो गुस्से मे दीपेश कुछ नहीं बोला लेकिन जब रूपाली ने चाय के लिए पूछा तो दीपेश भडक गया हां हां चाहिए चाय और ये क्या रूपाली एक शहर मे मायका होने से तुम जब देखो तब मायके मे ही बनी रहती हो। मेरा और अपने घर का भी कुछ ध्यान है कि नहीं। हां हां दीपेश ध्यान है घर का और तुम्हारा भी।

लेकिन मम्मी अचानक से बेहोश हो गई थी कमला का फोन आया था तो मुझे जाना पड़ा। अब मम्मी के पास भी तो कोई नहीं है न। नहीं ही पापा है और नहीं मेरा कोई भाई बहन है जो बीमार होने पर उनकी कोई देखभाल कर सके। इसलिए मुझे जाना पड़ता है।

बीमारी मे ऐसे कैसे मम्मी को अकेले छोड दू। मै कुछ नहीं जानता मुझे तुम्हारा ये रोज रोज का वहाँ जाना पसंद नहीं है। देख लो आगे तुम्हे क्या करना है। कोई नौकर उनकी देखभाल के लिए रखों। तुम अब रोज रोज का जाना नहीं होना चाहिए समझी नहीं तो ठीक नहीं होगा। 

          रूपाली बहुत परेशान थी कि वो क्या करे और क्या न करें। पता नहीं क्यों दीपेश समझता ही नहीं है कि मम्मी अकेली है उन्हें मेरी जरूरत है। ऐसे ही कुछ समय चलता रहा  जब भी रूपाली मा के घर जाती घर मे दीपेश झगड़ा करता। अब रूपाली की बेटी भी तीन साल की हो गई थी।

रूपाली दीपेश के मना करने पर भी मम्मी के पास चली जाती थी। ऐसे ही एक दिन अनाया खिलौने से खेल रही थी तभी उसका फोन बज उठा उधर से कमला का फोन था वो बोली बिटिया मांजी गिर पडी है फिसल कर। पांव मे बहुत दर्द है वो खडी नहीं हो पा रही है लगता है पैर की हड्डी मे कुछ हो गया है तुम जल्दी से आ जाओ बिटिया।

रूपाली ने अपने घर मे काम करने वाली मालती से अनाया को सभालनें के लिए कहा और बोली जब इसके पापा आ जाए तो तुम अनाया को उनके पास छोडकर  घर चली जाना मै मम्मी के पास जा रही हूँ। 

             घर जाकर रूपाली मम्मी को लेकर अस्पताल गई। एक्सरे करवाया तो पता लगा कि पैर मे फैक्चर है। फिर मम्मी को अस्पताल मे प्लासटर लगवा कर फिर तीन घटें बाद रूपाली घर लेकर आई मम्मी को। कमला की मदद से मम्मी को बिस्तर पर लिटाया। इस बीच रूपाली को बिलकुल भी ख्याल नही आया अनाया का कि वो घर मे फोन करके पूछें। 

         और यहाँ दीपेश के आने पर मालती अनाया को दीपेश के पास छोडकर अपने घर चली गई। और ये भी दीपेश को बताया कि मेमसाब मम्मी के घर गई है। इतना सुनते ही दीपेश गुस्से में आ गया। तभी अनाया के जोर से रोने की आवाज आई, दीपेश दौडकर आया क्या हुआ बेटा।

दीपेश ने देखा कि सिढियो पर कुछ खिलौने पडे है और अनाया वही सिढियों के पास गिरी पडी है। पास जाकर दीपेश ने अनाया को उठाया तक देखा सिढियों का  कोना लग जाने से अनाया के सिर से खून निकल रहा है। दीपेश ने अनाया को उठाया और डाक्टर के पास ले गया।

पट्टी करवाई और दवा दिलाकर वापस आते समय अनाया को रूपाली के पास छोडा और रूपाली से बोला सभांलो को घर मे मै नहीं हूँ तो कौन देखेगा इसे ‌और हाँ अब तुम्हे भी घर आने की जरूरत नहीं है रहो यही अब तुम अपनी मम्मी के पास। अरे सुनो तो दीपेश, दीपेश रूपाली आवाज देती रही और दीपेश अनसुना करके चला गया। 

            एक हफ्ता हो गया दीपेश ने रूपाली की कोई खोज खबर नही ली। रूपाली ने भी अपने स्वाभिमान के चलते फोन नहीं किया। आज सुबह सुबह जब दीपेश सोकर उठा तो अपने को संभालने पर भी संभाल नहीं पाया और जमीन पर गिर पडा। कुछ देर पडा रहा फि बड़ी मुश्किल से धीरे धीरे उठा। तभी काम करने वाली मालती आ गई पूछा क्या हुआ साहब, पता नही मै चककर खाकर गिर पडा, मालती ने छुआ तो दीपेश को तेज बुखार था। मालती ने चाय बना कर दी और दो बिस्कुट साथ मे दवा दे लो साहब जी साथ मे। बाबूजी रूपाली बिटिया को बुला लो, वो तो उनकी मम्मी का फैक्चर हो गया था इसलिए अनाया बिटिया को हमारे पास छोडकर चली गई थी। फैक्चर हो गया था अच्छा हमे नही पता दीपेश बोला। 

       दीपेश पडा पडा सोचता रहा कितना गलत कर रहा हू मै रूपाली के साथ। अब उसके मम्मी के पास कोई नहीं है तो रूपाली  नहीं करेगी तो कौन करेगा‌ बहुत सोचते विचारते शाम को दीपेश ने रूपाली को फोन किया। हलो रूपाली मुझे माफ कर दो मुझे नहीं पता था कि मम्मी जी को फैक्चर हो गया है। मुझे भी बुखार आ गया है और कोई देखभाल करने को नहीं है। प्लीज मुझे माफ कर दो तुम आ जाओ तुम्हारे और अनाया के बिना घर सूना सूना लग रहा है। 

        रुपाली की माँ कुमुद जी बेटी और दामाद की सब बातें सुन रही थी बोली जा बेटा जा अपने घर जा। यहाँ देखभाल मेरी कमला कर देगी। पति अगर नाराज हो तो उसकी लकीरें पत्नी के चेहरे पर साफ दिखाई देती है देख तेरा चेहरा कैसा उतर गया है। तू भी उससे दूर रहकर खुश नहीं है।

अपने घर जा बेटा जब दीपेश कहे तो आना नही तो मेरा क्या मै कमला के भरोसे रह लूगीं। रूपाली ने कमला आटीं को दिनभर के लिए मम्मी के पास रहने को कह दिया।        रूपाली ने अनाया का हाथ पकडा और आ गई अपने घर। दीपेश अनाया को गोद मे लेकर प्यार करने लगा रूपाली का हाथ पकडकर कहने लगा सारी रूपाली, आज

मुझे पता चला कि आप बीमार हो और घर मे कोई देखभाल करने वाला न हो तो कैसा लगता है। अब जब मै ठीक हो जाऊंगा तब साथ मे चलेगे मम्मी से मिलने। रूपाली के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान की रेखा फैल गई। और फिर से घर मे हंसी खुशी का माहौल हो गया। 

मंजू ओमर

झांसी उत्तर प्रदेश

30 मार्च

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