नियति कहा हो तुम ? क्या हुआ क्यों चिल्ला रहे हैं? अरे मेरी टाई कहा है ब्लेजर कहा है? जनाब खुद भी कुछ ढूंढ लिया कीजिए।अरे क्या बहु लाये है जिसे ये चिंता नहीं की ससुर ने जाना है सुबह चाय नाश्ता छोड़ कमरे में घुस गई रात कम पड़तीं है।नियति आई बोली मां वो राजेश को मीटिंग में जाना है तो टाई और ब्लेज़र निकाल कर दे रही थी।
हा हा उसे ही जाना है मुझे तो घर में बैठना है।विशाल बोले नहीं पापा जी आपका नाश्ता तैयार है आप बैठिये ।नियति जल्दी से आलू के पराठे और चाय ले आई।विशाल ने चीड़ चीड़ करते हुए नाश्ता किया।तब तक रोहन भी आ गया भाभी मेरा नाश्ता रोहन ये लो स्प्राउट और chocos।
थैंक्स भाभी ।सास सरला बोलीं अब मुझे भी कुछ दे दो।जी मां आपका और राजेश का नाश्ता तैयार है।सरला और राजेश नाश्ता कर रहे थे तभी विशाल आए और बोले दोपहर के खानें में छोले बनाना पर खाना तो बन गया नियति बोली घीया चने की दाल और आलू की सब्जी।
मैं कमाता हूं किसी को मेरी इज्जत नहीं है ना बीवी को ना हीं बहू को अगर छोले बन जाए तो मैं खाना खाने आऊंगा नहीं तो नहीं ।जी पापा छोले बन जाएंगे।विशाल के जाते ही नियति ने छोले भिगो दिए ।रोहन बोला भाभी भटूरे का आटा भी लगा लो दिन में छोले भटूरे खाएंगे।ठीक है बहु फिर कस्टर्ड भी बना ले छोले बादी करे है तो ठंडा कस्टर्ड ही अच्छा रहेगा।
नियति बोली जी सबका नाश्ता खाना हो गया।राजेश ऑफिस चले गए रोहन का वर्क फ्राम होम था वो अपने रूम में।सरला बाहर चली गई ड्राइवर के साथ फल सब्जी लेने ।नियति डाइनिंग टेबल पर बैठ गई तभी रमा आई दीदी लो चाय और पराठा आप भी खा लो पता है सुबह से कुछ नहीं खाया होगा।थैंक्यू रमा।नियति ने नाश्ता किया और किचन में आ गई दोपहर की तैयारी करने कस्टर्ड बना फ्रिज में रखा भठूरे का आटा लगाया
तभी उसकी मां शीला का फोन आया बोली क्या कर रही है कुछ नहीं मा दिन के खानें की तैयारी । शीला बोली सारा दिन काम में लगी रहती है।सुन तेरे मामा जी का फोन आया था रोहन के लिए लड़की बता रहे थे।मां रोहन को नौकरी वाली लड़की चाहिए ,क्यों उसे घर नहीं बैठाएगी।
मेरी होनहार गोल्ड मेडलिस्ट लड़की को तो घर के कामों में झोक दिया और दूसरी बहू नौकरी वाली चाहिए ।कितने अरमान थे तुम्हारे इतनी कम उम्र में इतनी अच्छी और बड़ी पोजीशन मिलती हैं किसी को तुम्हे मिली पर तुम्हारी दादी ने तुम्हे अच्छा घर परिवार के नाम पर यहां ब्याह दिया।राजेश ने भी तुम्हारे लिए स्टैंड नहीं लिया।
मां पिताजी दादा दादी की सेवा करनी हैं घर में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। दादा दादी तो गांव में बस गए पर एक ससुर जो सब पर भारी है दिन रात मां मां करता है और पूरे घर का माहोल बिगाड़ रखा है।मां आप क्यों अपना खून जला रही है मुझे अच्छा लगता है
घर का काम करना मुझे खुशी मिलती है पर मुझे नहीं तेरी बेजस्ती होते हुए मै नहीं देख सकती मेरा दिल दुखता है।ओके मां मुझे काम करना है फोन रखे ।शीला जी फोन रख गुस्से में बैठी थी कि उनके पति महेश जी आए क्या हुआ होगई बेटी से बात हा हो गई सुनती कहा है मेरी दुख होता है इतनी होनहार लड़की थी कहा चूल्हा चौका संभाल रहीं है
और साथ ही उसका वो सनकी ससुर अरे भूल जाओ क्यों मन दुखाती हो।रेवा आकर बोली मां नाश्ते के लिए आ जाइए। हा बेटा तुझे ऑफिस भी जाना है जी मां ।शीला बोली तू इन सब कामों में क्यों लग गई छोड़ देती मै कर लेती।कोई नहीं मा यही टाइम तो होता है फिर रात को भी लेट होता है तो आप ही करती है।
राहुल भी आ गया मां नाश्ता दे दो।रीवा मै दो दिन शहर से बाहर हूं मेरा केस लगा है पुणे में मुझे वहां जाना है प्लीज़ तुम शाम को पैकिंग कर देना।यार मेरी मीटिंग है 7 बजे तुम्हे कब निकलना है 11 बजे रात की फ्लाइट है।शीला बोली तुम जाओ मैं पैकिंग कर दूंगी।
थैंक्स मां रीवा शीला के गले लग गई ।नाश्ता कर राहुल रीवा ऑफिस चले गए और महेश जी अपनी दुकान पर जो उन्होंने रिटायरमेंट के बाद खोल ली थी।उधर नियति जल्दी जल्दी काम कर रही थी।12 बजे ससुर का फोन आ गया छोले भटूरे तैयार है।जी पापा थैंक्स रोहन तुम्हारी वजह से मैने सुबह ही भटूरे का आटा लगा अच्छा किया नहीं तो मेरी शामत थी
।2 बजे विशाल घर आए डाइनिंग टेबल पर खाना लग चुका था।नियति गर्मी में गरम गरम भटूरे बना रही थी और सब खा रहे थे।विशाल का खाना हो गया बोला शाम को मैं भटूरे नहीं खाऊंगा।हल्के हल्के भल्ले बनाना।रोहन बोला भाभी मै यही खाऊंगा ।नियति बोली ठीक है उसने रमा को भी खाना दिया।
आलू की सब्जी और घीया चने की दाल उसने रमा को साथ दे दी। भल्ले की दाल भिगो ।नियति 3 बजे लेटने गई और उसे गहरी नींद लग गई।7:00 बजे शोर से उसकी नींद खुली वो नीचे आई विशाल चिल्ला रहे थे कि मैं कमाता हूं किसी को मेरा एहसास नहीं है चाय नहीं पानी नहीं।
नियति नीचे आई बोली सॉरी पापा जरा आंख लग गई थी।मै चाय लाती हूं ये कह नियति अंदर गई विशाल की बड़बड़ चालू रही।नियति ने चाय नाश्ता दे कर भल्ले की तैयारी की।8 बजे तक खाना चाहिए होता है आज 8:30 हो गए फिर नियति को गालियां राजेश घर में घुसा ही था ।
विशाल का चीखना सुन बोला क्या हुआ पापा आप क्यों चिल्ला रहे हैं ये मनहूस बोझ जो हमारे सर पर लाया है ना तू ।पापा ऐसा मत कहे सारा दिन तो आपकी सेवा में लगी रहती हैं।फिर भी क्या होगया अगर सो गई खाने में देर हो गई तो।नियति आई बोली चलो आप भी चेंज कर लो खाना खा लो।
सबने खाना खाया और नियति सब समेत कमरे में आ गई। नियति दुखी मन से अंदर आई ।राजेश बोला मै समझता हूं। अगर हम चले गए तो मां अकेली हो जाएंगी।कोई नहीं ठीक हो जाएंगे।चलो ये टाइम मेरा है सारी बातें छोड़ो।
अब सरला जी रोहन की शादी के बारे में सोच रही थी।सरला नियति को बोली रोहन की शादी तो करदू पर विशाल का स्वभाव देख कौन अपनी लड़की देगा।
रोहन अपने रूम से आया बोला मां आपने ये टॉपिक निकाला है तो मै बता दूं मै रमन अंकल की बेटी आंचल को पसंद करता हूं इनफैक्ट हम दोनों एक दूसरे को पसंद करते हैं और शादी करना चाहते है।
तुझे भी कोई और लड़की नहीं मिली पता है ना तेरे पापा रमन जी से भी झगड़ा कर बैठे हैं।मम्मी आप बता देना पापा को वरना मैं यहां से चला जाऊंगा।
सरला ने विशाल से बात की विशाल भड़क गए क्या कोई और लड़की नहीं मिली शादी करने के लिए।बहुत लड़ाई झगड़े बहस के बाद आखिर सब शादी के लिए तैयार हुए।आंचल इंग्लिश की hod थी ।पर आंचल की मां रेनू तेज औरत थी।इधर विशाल उधर रेनू।
रेनू बिल्कुल नहीं चाहती थीं कि रोहन और आंचल उस घर में रहे।शादी हो गई आज सरला ने विशाल से दस बार पूछ कर आंचल के घर वालो को बुलाया ।सब खाना खा रहे थे और नियति परोस रही थी।विशाल की प्लेट में रोटी नहीं थी दो मिनिट देर होते ही विशाल शुरू हो गया मेरा खाती हैं हठहराम ,जाहिल मेरे टुकड़ों पर पलती है और मुझे ही खाना नहीं दे रही।
नियति देखती रह गई और उसके मुंह पर विशाल मारने वाला था कि राजेश बीच में आ गया।नियति शर्म से पानी पानी हो गई और अंदर चली गई।आज नियति के स्वाभिमान को ठेस लगी आज तक उसने घर जोड़ने के लिए बहुत कुछ किया अपमान बर्दाश्त किया पर अब नहीं आज मेरे स्वाभिमान को ठेस लगी है तुमने कहा कि नौकरी मत करो मैने नहीं की।
मैने घर को बनाने के लिए अपने आपको जलील करवाया।पर मेरा भी स्वाभिमान है अब मै यहां नहीं रहूंगी। राजेश बोला प्लीज़ नियति रुक जाओ।नहीं राजेश अब नहीं।नियति अपना बैग पैक कर अपनी मां के घर आगई। शीला ने उसे देख पूछा बेटा क्या हुआ तुम कैसे आ गई।
मां मै मर जाऊंगी आप सही थी मैने आपकी बात ना मान कर गलती की। आप सही थी राजेश मेरे लिए कोई स्टैंड नहीं ले पाया। मैने सब किया पर अब नहीं। मुझे शुरू दिन से ही वो आदमी पसंद नहीं था सिर्फ तुम्हारे लिए मैने हा कि अब तुम वहां नहीं जाओगी।
नियति के आने से पूरा घर हिल गया।आंचल ने भी रोहन से कह दिया कि मैं यहां नहीं रहूंगी।रोहन ने फ्लैट के लिए अप्लाई कर रखा था वो वहां शिफ्ट हो गए।घर में राजेश सरला और विशाल थे।राजेश ने कई बार नियति को कॉल किया पर नियति ने कोई जवाब नहीं दिया।उसने राजेश को यही बोला कि जिस दिन दूसरा घर ले लो मुझे बता देना।
नियति ने जॉब स्टार्ट कर दी वो इतनी टैलेंटेड थी कि उसे जॉब मिल गई। अब नियति फिर अपने स्वाभिमान के साथ खड़ी थी।इसी बीच राजेश की नौकरी चली गई और वो विशाल का स्टोर संभालने लगा। नियति से मिलने कई बार राजेश आया उसने कोशिश की कि नियति घर आ जाए पर नियति नहीं आई।
विशाल बोला आती हैं तो आए नहीं तो तलाक़ दे और दूसरी शादी कर ले।राजेश बोला नहीं पापा मै नहीं करूंगा।सरला ने राजेश से कहा बेटा तू जा यहां से नियति को अपना ले ये तो ऐसे ही चलेगा।राजेश नियति के पास आया और बोला नियति मै तुम्हारे साथ रहना चाहता हूं।
मुझे माफ कर दो तुम्हारे लिए स्टैंड नहीं ले पाया और हा हमने फ्लैट ले लिया है।तुम जॉब कंटीन्यू करना मैं तुम्हे कभी नहीं रोकूंगा और घर पर मेड भी लगा दी है फुल टाइम।मेरी जॉब का भी हो गया है और मां कहा रहेंगी कुछ दिन हमारे पास और कुछ दिन रोहन के पास।तुम ये सब मत सोचो मेरे कारण तुम्हारा स्वाभिमान टूटा था अब उसको संभालना मेरी जिम्मेदारी।
स्वरचित कहानी
आपकी सखी
खुशी