*यह कलंक कभी ना मिटेगा* – तोषिका

निखिल बेटा आकर खाना खाले, फिर दफ्तर भी तो जाना है। चिल्लाते हुए उसकी मां राधा बोली।

अंदर कमरे से एक चीखती हुई आवाज आई “आ रहा हू मैं मां, तोड़ा सब्र करा करो।” राधा को अपने बेटे के मुंह से सुनते हुए ये शब्द काँटों की तरह चुभे पर फिर भी वो चुप रही।

निखिल कमरे से बाहर निकला और अपनी बूढ़ी मां के हाथ से डब्बा लिया और फिर घर से भागते हुए निकल गया। राधा ने बोला आराम से वाहन चलाना पर निखिल के कानों में वो आवाज गूंज की तरह कम सुनाई दी क्योंकि वो काफी आगे आ गया था।

निखिल जैसे ही दफ्तर पहुंचा उसके बॉस ने उसे तुरंत अपने कैबिन में बुलाया, उसे लग रहा था कि लेट आने की वजह से उसको दांत पड़ेगी पर कुछ ऐसा हुआ जो उसकी सोच से भी परे था।

उसका बॉस बोला “तुम्हे एक प्रोजेक्ट के सिलसिले में देश से बाहर जाना होगा।” 

निखिल तोड़ा हैरान भी था पर अंदर से वो बहुत खुश भी था, और हो भी क्यों ना, इतना बड़ा अफसर उसके हाथ में आया था। अपने जज्बातों को काबू में करते हुए उसने पूछा “सर ये प्रोजेक्ट कितना लंबा समय के लिए है और इसके क्या क्या पर्क मिलेंगे मुझे? निखिल के बॉस ने एक लंबी और गहरी साँस ली फिर बोले “देखो निखिल ये प्रोजेक्ट वैसे तो ६ महीने का है पर ये एक साल तक भी खींच सकता है

क्योंकि ये काफी बड़ा प्रोजेक्ट है। साथ में तुम्हारा आने जाने का वहां के रहने का सारा खर्चा हम उठाएंगे।” निखिल ने तुरंत “हा” बोल दिया, पर उसको रोकते हुए उसका बॉस बोला कि अभी जवाब देने की जरूरत नहीं है, तोड़ा सोच विचार करलो फिर मुझे कल सुबह तक बता देना क्योंकि एक बार हा करदी उसके बाद तुम पीछे नहीं हट पाओगे।

निखिल ने “ओके सर” बोला और अपने कैबिन में आ गया। वहां उसका जिगरी दोस्त नितिन बैठा था, तो निखिल ने सब कुछ उसको बताते हुए पूछा “मैं जाने के लिए त्यार हू, पर सर पता नहीं क्यों और सोच विचार करने को कह रहे है?” नितिन बोला सही तो कह रहे है, घर पर तुम्हारी मां भी अकेली रहती है, उनको भी तुम्हारी जरूरत होगी।

निखिल बोला “मां को तो मैं वृद्धाश्रम भेज दूंगा”। नितिन को ये बात सुन कर बहुत बड़ा झटका लगा और बोला “देख भाई अगर तूने ऐसा किया ना तो *यह कलंक कभी ना मिटेगा* ना तू आगे कभी इसको मिटा पाएगा।

निखिल चिड़चिड़े मन से बोला “इसमें कलंक क्या है, आज कल सब ही यही करते है। नितिन बोला “यही तो सोच गलत है कि सब करते है इसका मतलब सही ही करते होंगे। ऐसा नहीं है, ये गलती मैं कर चुका हू और अब तुम्हे नहीं करने दूंगा मैं।” निखिल बोला “कैसी गलती?”

नितिन की आँखें भर आई और उसने बताया कि उसने अपनी बीवी के बातों में आकर अपने एक लौटे मां बाप को जिन्होंने उसको पाल पोस कर बड़ा किया उनको घर से निकल दिया, वो भी किसके लिए क्योंकि वो हर चीज में रोक ताकि कर रहे थे पर दरअसल में वो उनका ध्यान रखने का तरीका था और जब तक मुझे ये चीज समझ आई तब तक बहुत देर हो चुकी थी। तब से लेकर मैं आज तक इसी कलंक के साथ घूम रहा हू और रोज़ अपने आप से सवाल करता हू कि जिन्होंने मेरा इतना खयाल रखा, बचपन में कभी मेरा हाथ नहीं छोड़ा और कभी किसी चीज के लिए मना नहीं किया और मेरी सारी जरूरत पूरी की पर जब वो ही फ़र्ज़ निभाने की बारी मेरी आई तो मैंने क्या किया? मैं अपने फ़र्ज़ से ही भाग गया। अपने मां बाप को ही अनाथ कर दिया। निखिल की भी आँखें नम सी हो गई पर अपने आंसुओं को रोकते हुए बोला “तू अब माफी मांग ले और घर बुला ले” नितिन बोला “अब उसके लिए बहुत देर हो चुका है, उन दोनों की मौत हो चुकी है, तभी कह रहा हू कि पैसा तो आता रहेगा पर प्यार हो एक ऐसे चीज है जो समय के साथ ही बढ़ती है, लेकिन अगर समय ने साथ छोड़ा ना तो प्यार भी चला जाएगा। अभी समय है, खुल कर अपनी मां के साथ समय व्यतीत कर और अगर तुझे जाना है तो जा, किसी ने नहीं रोका पर अपनी मां को साथ लेकर जरूर जाना जिन्होंने तेरे लिए अपनी खुशियों का हर बार त्याग करा होगा।

निखिल अब सारी बात समझ रहा था, वो घर गया और अपनी मां से हर अपनी गलती और ऊंची आवाज में बात करने के लिए माफी मांगी और विदेश के प्रोजेक्ट के बारे में भी बताया। उसकी मां बहुत खुश हुई और कहा कि बेटा मेरी चिंता मत करना, तू खुश है तो मैं भी खुश हू, मैं बस चाहती हू तू हमेशा से तरक्की करे। निखिल ने अपनी मां को गले लगा लिया और उनको धन्यवाद बोला।

अगले दिन उसने अपना फैसला बॉस को सुनाया और बॉस ने कहा ठीक है। नितिन भी उसके फैसले सुन कर कहा जैसा उसको ठीक लगे।

*विदेश जाने का दिन*

चलो मां मैं चलता हू, तुम भी चलो मुझे छोड़ने निखिल उत्सुकता से बोला। राधा तोड़ा सा हिचकते हुए बोली “पर मैं कैसे…कैसे बेटा?” अरे कुछ नहीं होता मां, चलो तुम भी।

वहां जब वो एयरपोर्ट पर आए तो उसने कहा, मां मैने तुम्हारा पासपोर्ट भी रखा है और तुम्हारे कपड़े भी पैक है बस तुम्हे मेरे साथ हवाईजहाज में बैठना है क्योंकि तुम भी मेरे साथ चल रही हो। राधा चौंकते हुए बोली “मैं?” निखिल बोला “हँ मां तुम ही और कौन” राधा बोली “पर मैं कैसे बेटा?” निखिल बोला “मां मैं तुम्हारे साथ हर पल बिताना चाहता हू, और मैं तुम्हे यहां अकेला छोड़कर नहीं जा सकता हू, चलो अब जल्दी चलो वरना फ्लाइट के लिए लेट हो जाएगा।” राधा की आँखें नम हो गई और उसने अपने बेटे हो गले लगा लिया।

#समय उन्ही की कदर करता है जो समय की कदर करते है, इसीलिए समय से पहले समझ जाए और अपने माता पिता का ध्यान रखे।

लेखिका

तोषिका

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