*रिश्तों के भी रंग* – तोषिका

रंग हमारी पहचान बन गए है, आजकल रंग के बिना कुछ भी नहीं है। ऐसा मिष्टी अपने आप से ही बोल रही थी कि तभी पीछे से उसकी नानी आई और बोली *रिश्तों के भी रंग होते है* और आज तक उन रंगों को कोई भी रंग पीछे नहीं छोड़ पाया है।

अरे नानी मैं तो साइकोलॉजिकल के आधार पर बोल रही थी, मुस्कुराती मिष्टी बोली।

नानी बोली “मिष्टी ये तुम्हारे विषय से ही जुड़ा हुई बात है”।

मिष्टी आश्चर्यचकित हो कर बोली वो कैसे नानी?

देखो बेटा रिश्तों भी तुम्हे कई लोग मिलेंगे जो अपने रंग तुरंत बदलते है। मेरे साथ भी कुछ ऐसा हुआ था तभी मुझे पता है।

मिष्टी बोली “क्या हुआ था नानी ऐसा आपके साथ?”

नानी ने बोला “अब उन बातों से ग़म नहीं हिम्मत देनी की हिम्मत आती है।” मेरी शादी जब हुई थी तो वो मेरी मर्जी के खिलाफ शादी हुई थी। मुझे किसी और बारादरी के लड़के से प्यार करने की ये सबसे बड़ी सजा मिली थी, उस समय प्यार करना भी गुनाह माना जाता है। हमारे दोनों परिवार एक दूसरे के खिलाफ हो गए थे तो हम दोनों ने भाग के शादी करने का फैसला लिया, पर मेरी किस्मत में प्यार शायद लिखा ही नहीं था।

मिष्टी बोली “ऐसा क्यों नानी क्या हुआ उनके साथ?”

नानी अपनी बात को पूरी करते हुए बोली “उसका मेरे परिवार वालों ने हादसा करा दिया और उसकी तत्काल मृत्यु हो गई थी और मेरी शादी तुम्हारे नाना जी से करवा दी थी।

मिष्टी बोली “तो आप नाना जी से खुश नहीं थे क्या?”

नानी बड़े धीमे स्वर में बोली “ऐसा नहीं है बेटा, रिश्तों के कुछ रंग अगर कड़वे होते है तो कुछ मीठे भी होते है और ये सारी चीजें मुझे तुम्हारे नाना जी से सीखने को मिली। शादी के पहली रात को ही मैने उन्हें अपने बीते हुए कल के बारे में बता दिया था और उन्होंने कोई शिकायत नहीं की, बस अपना फर्ज निभाते रहे और मेरी आगे की पढ़ाई भी पूरी करवाई, धीरे धीरे उनके इसी स्वभाव से मुझे प्यार होने लगा था।

ऐसा नहीं था कि मैं अपने पहले प्यार को भूल गई थी, पर उन्होंने मुझे प्यार को जीना सिखाया था।

हमारी शादी को 3 साल हो गए थे फिर हमारी जिंदगी में पूनम आई, तुम्हारी मां, उसने हमारे आंगन को पूरा खुशनुमा बना दिया था।

दिन कब महीने में बदले और कब साल में पता ही नहीं चला और पूनम अब बड़ी हो गई थी। वो हमें सब बताती थी। फिर एक दिन वो एक आदमी को हमारे घर लेकर आई और हमसे मिल वाया और उसी इंसान से शादी करने की पूनम ने अपनी इच्छा व्यक्त की, मेरा मन त्यार नहीं था पर मैं नहीं चाहती थी जो मेरे साथ हुआ वो ही मेरी बेटी के साथ हो इसीलिए हमने उस रिश्ते के लिए हा करदी और उन दोनों की शादी भी हो गई।

पूनम की शादी के 2 साल के बाद तुम आई। शुरू शुरू में सब सही चल रहा था और सब बहुत खुशी से रहते थे।

पर पता नहीं फिर क्या हुआ कि उन दोनों में धीरे धीरे अनबन सी रहने लगी हर आये दिन में झगड़ा होता रहता था। 

नानी साथ में बोली “मिष्टी आगे की कहानी तुम भी जानती ही हो, अब तुम बड़ी भी हो गई हो और समझदार भी, इसीलिए जो होना था वो हो गया और अपने पिता को अब माफ कर दो।”

मिष्टी के आँखों में आंसू थे और वो बोली “कैसे माफ करदू मैं नानी? कैसे? आप जानती है, मैने यह साइकोलॉजी विषय ही क्यों चुना पढ़ने के लिए? क्योंकि मैं लोगों को समझना चाहती हू, मैं जानना चाहती हु कि ऐसी कौन सी वजह थी कि पापा हमे छोड़ गए थे, ऐसे कोनसी परेशानी थी कि जिसके चलते उन्होंने हमारे बारे में एक बार भी नहीं सोच और मेरी मां को अकेला छोड़ गए और खुदखुशी कर ली। नानी मैं जान ना चाहती हू कि मेरी मां की क्या गलती थी कि उनको ये दुख झेलना पड़ा। नानी आज तक आज तक मैं इन सवालों का जवाब ढूंढ रही हू।

रोटी हुई मिष्टी बोली।

नानी शांति से सब सुन रही थी फिर रोटी हुई मिष्टी को चुप करते हुए बोली “मैं जानती हू। मैं तुम्हारी मां की भी मां हू। इसीलिए मैने तुम्हे अपनी कहानी बताई ताकि तुम समझ सको कि ये रंग हमेशा ही खिले खुद से नहीं रहते है, इनको खिला कर रखना पड़ता है और रोज़ फूलों की तरह ध्यान रखना पड़ता है

और मैं बहुत खुश हुई थी जब ये विषय तुमने पढ़ने के लिए ही चुना था।

तभी पीछे से पूनम आके बोली “मिष्टी तुझे इन सब के बारे में सोचने की कोई जरूरत नहीं है। एक औरत भी सब पर भारी हो सकती है, आखिर वो भी एक माता का स्वरूप है।

मिष्टी ने अपनी मां को सीने से गले लगा लिया और बोली आप दूनी की सबसे स्ट्रांग औरत हो मां।

#हैप्पी विमेंस डे उन सभी महिलाओं के लिए जो अपने हक के लिए अपने परिवार के लिए और सबके लिए हमेशा कड़ी रहती है और उस सहनशीलता के लिए।।

लेखिका

तोषिका

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