मधु और माधव का भरा पूरा परिवार था ।परिवार में चार बेटे ,चार बहुएं मौजूद थी। बड़े बेटे राजू की दो बेटियां थी । उससे छोटे बेटे मनीष का एक बेटा था । तीसरे नंबर वाले बेटे के आगे दो बेटियां थी ।
सबसे छोटे बेटे को एक बेटी और एक बेटा था ।परिवार में काफी हलचल रहती थी ।माधव के तीन बेटे परिवार के साथ शहर में रहते थे। छोटा बेटा मधु और माधव के पास गांव में रहता था।
मधु और माधव अपने भरे पूरे परिवार को देखकर काफी खुश रहते थे। कभी खट्टे कभी मीठे अनुभव के साथ समय व्यतीत होता जा रहा था ।कभी भी कोई त्योहार या छुट्टियों का समय आता तो तीनों बड़े बेटे अपने परिवार सहित गांव में अपने घर पर आते और उस समय घर पूरी तरह भरा-भरा लगता ।माधव और मधु इन पलों का बेसब्री से इंतजार करते रहते हैं।
घर पर दीपावली का त्यौहार है । मधु और माधव के तीनों बेटे अपने बच्चों को लेकर अपने गांव में अपने माता-पिता के पास दीपावली मनाने के लिए आते हैं। सबसे पहले बड़ा बेटा अपनी पत्नी और बच्चों के साथ घर पर आता है ।वह व्यवहार में काफी संजीदा और जिम्मेदार व्यक्तित्व का इंसान है और पिता की भांति अपने व्यवहार को घर पर लागू करता है।
माधव का दूसरा बेटा तीसरे दिन अपने परिवार के साथ घर पर आता है ।वह बहुत ही बातूनी है ।उसकी पत्नी भी बिल्कुल उस पर ही गई है और बच्चे माता-पिता के नक्शे कदम पर ही चल रहे हैं। वह मधु और माधव को शहर की हर कहानी बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ सुनाते हैं ।तीसरे नंबर का बेटा उसी दिन शाम को अपने परिवार के साथ घर पर पहुंचता है।
वह नियमों का काफी पाबंद और फालतू खर्चों को दरकिनार करने वाला इंसान है। परिवार के सभी बच्चों को नियमों के साथ जीने का सबक सीखता रहता है। मधु और माधव का चौथा चौथा बेटा इन सब से काफी अलग है ।वह समय के साथ हर परिस्थिति में अपने व्यक्तित्व को ढाल लेता है और यही गुण उसके छोटे से परिवार में भी कुट-कुट कर भरा है ।
दीपावली का त्यौहार है । सारा घर खुशियों से सराबोर है। मधु और माधव काफी खुश है। माधव अपने बेटों को गांव की नई-नई बातें बताता है और उनके बच्चों के साथ खेलता है।
मधु अपनी बहूओ के साथ खुश है । उन्हें घर को चलाने के तथा त्यौहार को मनाने के पुराने और नए तरीकों के बारे में बताती है। दीपावली का त्योहार बहुत ही खुशियों के साथ पूरा परिवार मिलकर मनाता है। मधु और माधव ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि ईश्वर उनके परिवार को सदा इसी प्रकार से खुशियों से भरा पूरा रखें। दीपावली का त्यौहार खत्म हो चुका है।
अब एक-एक करके मधु और माधव के बेटे अपने परिवार के साथ शहर जाने की तैयारी करने लगे हैं। यह सब देखकर मधु और माधव उदास है। वह जानते हैं कि अब वह परिवार किसी खास दिन ही वापस गांव में घर पर आएगा। जिस कारण वह हर बेटे को कुछ और दिन रहने का आग्रह करते हैं ।
परंतु छुट्टी कम होने के कारण और बच्चों की पढ़ाई के कारण वह सब मना कर देते हैं। माधव से बात को समझता है परंतु मधु इस बात को नहीं समझती और बहूओ पर गुस्सा करती है कि वह ही यहां पर नहीं रहना चाहती। जिस कारण कुछ मनमुटाव की स्थिति बन जाती है।
परंतु बेटों के शहर जाने के निर्णय पर इसका कोई असर नहीं होता है और एक-एक करके वह चले जाते हैं ।उनके चले जाने के बाद मधु माधव से कहती है कि हमारे बेटों में भी बदलाव आया है। वह अब अपनी पत्नियों के कहने पर चलते हैं ।उनको माता-पिता की परवाह नहीं है परंतु माधव उसकी बात को ज्यादा तवज्जोब नहीं देता है और मुख पर हां हां करता रहता है
परंतु मन में किसी प्रकार का द्वेष नहीं रखता है । सोचता है कि एक समय आएगा जब मधु भी इस बात को अच्छे से समझ जाएगी। रात्रि में माधव और मधु सोए होते हैं। माधव मधु की कही हुई बातों को सोचता है कि वह अपने बेटों से और उनकी पत्नियों से बात ना करें।
वह मन ही मन में मुस्कुराता है और पत्नी की कही हुई बात पर मुस्कुराता है। सोचता है कि मेरा यह परिवार उन रंगों के समान है जो विभिन्न प्रकार के हैं और हर एक को अलग-अलग प्रकार से खुशी देते हैं। हर एक के चेहरे को अलग-अलग प्रकार से सजाते हैं।
परिवार में रिश्तो के भी अलग-अलग रंग होते हैं और यह रंग भी हर एक के चेहरे को अलग-अलग प्रकार से सजाते हैं। इनमें से कोई भी रंग बुरा नहीं होता। इस प्रकार से मेरे परिवार का कोई भी सदस्य बुरा नहीं है। यह वह रंग है जो अलग-अलग रिश्तो में जचते हैं ।
हमें इन रंगों में जीवन की खुशियों को सजाना है। जीवन को खुशी-खुशी जीते हुए इस संसार से विदा होना है ।यह सोचते सोचते माधव शांत चित् और प्रसन्नचित होकर सो जाता है।
धन्यवाद।
लेखक :संजय सिंह।