मेहमान – एम. पी. सिंह 

बहु, आज खाने मे कुछ अच्छा बना लेना, तेरेे गांव वाले आ रहे है, फोन आया था. माँ जी की बात सुनकर दीपिका बहुत ख़ुश हुई, पर खाना बनाने से जी चुराने वाली, सोच मे पड़ गई, कि कौन आ रहा है, पूछने की हिम्मत नहीं हुई. अमोल और दीपिका की शादी हुए अभी कुछ … Read more

मां जी मैं भी आपकी बेटी जैसी हूं। – मधु वशिष्ठ

कल सुबह अपनी माँ से मिलेंगे! मायके में माँ से मिलने का सुख क्या होता है, यह ससुराल में बैठी हर लड़की से पूछो। माँ के सीने से लगते हुए ढेरों बात करना, “कुर्सी से नीचे लटकाए हुए खुले बाल”  और “पैर ऊपर करके बैठना”, इसी खूबसूरत एहसास में खोई हुई मीनल की तंद्रा तब … Read more

एक और मौका – रेखा जैन

बारिश की बूंदे सड़क को भिगो रही थी। अस्पताल की दीवारों पर खामोशी पसरी थी। शाम से रोते रोते निकिता की आंखों में आंसू सुख चुके थे। वो आई सी यू के बाहर बैठी खामोश सी अपने ही विचारों में गुम थी। अंदर उसका पति अनिकेत जीवन और मौत के बीच जुझ रहा था। उसकी … Read more

एक और मौका – विनीता सिंह

एक बहुत बड़ी आलीशान हवेली । वहां पर श्रीकांत जी और रुक्मणी जी रहते हैं! उनका बेटा कृष्णम जो अपनी पढ़ाई पूरी कर चुका था आज पिता से कह रहा था पिताजी मुझे गिटार में अपना कैरियर बनाना है उधर श्रीकांत जो शहर के बहुत बड़े जज थे वह चाहते थे उनका बेटा सिविल की … Read more

समाज का सच – लतिका पल्लवी 

माँ,माँ,जल्दी आओ भैया दीदी को लेकर आ गए।गाड़ी की आवाज सुनकर श्रेयांसी माँ को पुकारते हुए घर के बाहर भागी।अरे!लड़की सुन तो ज़रा। एकदम आंधी तूफान है यह लड़की,कुछ सुनेगी ही नहीं। जैसी यह है वैसी ही उसकी बहन भी है।वह भी तुरंत गाड़ी से उतर कर चल देगी। बहू जल्द से एक कटोरी मे … Read more

बहुत कुछ होते हुए भी पैसा ही सब कुछ नहीं – विमला गुगलानी

नई बहू नवेली का ससुराल में पहला कदम मानों खुशियों की बरसात। सास दिव्या पहले से ही आरती की थाली सजाए खड़ी थी,फूलों का कालीन ,और न जाने कितने प्रकार की रस्मों के साथ नई बहू का गृह प्रवेश। सब रिश्तेदार ऐसी सुंदर और अमीर घर की  लड़की को दिव्या की बहू बनने पर जहां … Read more

 दूसरा मौका – गीता वाधवानी

 अपनी बहू मुस्कान के बाजार जाने के बाद, सुमित्रा देवी ने अपने बेटे आशीष से कहा-” बेटा, मेरे पास आकर बैठ, मेरी बात सुन। “  आशीष अपनी मां के पास आकर बैठ गया और बोला-” कहो माँ। ”   सुमित्रा देवी-” बेटा, तेरे ऑफिस से आते ही मुस्कान तुझे इतना कुछ सुनाती रहती है, कभी बच्चों … Read more

एक बहन का त्याग बना दूसरी बहन की खुशी !! – स्वाती जैंन

आंटी जी गर्म- गर्म खा लिजिए , वैसे मुंबई के समोसे और गुजरात के समोसे में काफी फर्क होता हैं , खुशबु के ऐसा बोलते ही सभी लोग हंस पड़े ! घर में खुशनुमा माहौल था , आज खुशबु की बड़ी बहन शैली को लड़के वाले देखने आए हुए थे !  खुशबु के पिताजी कमलेश … Read more

अधिकार कैसा? – सीमा गुप्ता

राघव और प्रीति की शादी को लगभग बाईस–तेईस साल हो चुके थे। दोनों ने जीवन की धूप–छाँव साथ देखी। छोटे-से सरकारी क्वार्टर में बिताए कई वर्ष, राघव की सीमित तनख़्वाह और फिर दो बच्चों की परवरिश। संघर्ष बहुत थे, पर दोनों ने कंधे से कंधा मिलाकर घर संभाला। धीरे-धीरे हालात बदले। राघव की पदोन्नति हुई, … Read more

चाभियाँ… और एक और मौका – पूजा अरोड़ा

शरद की हल्की-ठंडी सुबह थी। बरामदे में नीम की पत्तियाँ गिर रही थीं। बड़े ठाकुर घर में हलचल हमेशा की तरह थी…संयुक्त परिवारों में ऐसी हलचल तो सामान्य बात है..! रसोई में चूल्हे की आवाज़, अंदर से बच्चों के उठने का शोर और ऊपर से आती जेठानी चाँदनी भाभी की तेज़,  लेकिन व्यवस्थित आवाज़ “सिया, … Read more

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