रिक्त स्थान (अंतिम भाग) – गरिमा जैन

रात अंधेरी थी और इंस्पेक्टर विक्रम अपनी टीम के साथ एक सुनसान वीरान घर के इर्द-गिर्द घात लगाए बैठे थे। सुनसान में कीट पतंगों की आवाज बहुत तेज मालूम होती थी ।घर के अंदर अंधेरा था ,प्रकाश की एक किरण भी दिखाई नहीं देती। तभी झाड़ियों के पीछे झुरमुट से किसी के आने की आहट … Read more

रिक्त स्थान (भाग 44) – गरिमा जैन

जितेंद्र उस खाली वीराने घर से खाली हाथ वापस लौटता है। उसे परेशान देख उसके पिता बहुत चिंतित हैं। वह  पूछते हैं कि आखिर वह ऐसे दीवानों की तरह रात की दो ढाई बजे कहां घूम रहा था। तब जितेंद्र अपने पिता से पूछता है ” पापा क्या आपको हेमंत याद है ?” “कौन हेमंत … Read more

रिक्त स्थान (भाग 43) – गरिमा जैन

वह रात जितेंद्र के लिए सबसे भारी , सबसे लंबी ,सबसे वीरान थी।रेखा के बिना जीवन की कल्पना करना बहुत मुश्किल था ।उसे हर तरफ रेखा दिखाई देती। कमरे के हर कोने में उसकी छाप थी ।हवा के झोंके से जब विंड शाइन की घंटियां बचती तो जितेंद्र को ऐसा लगता जैसे अभी रेखा लहरा … Read more

रिक्त स्थान (भाग 42) – गरिमा जैन

रेखा : अरे रूपा  जितेंद्र के  ना जाने कितने मैसेज आए पड़े हैं !! मुझे जाना होगा ,शायद जानू उन्हें बहुत परेशान कर रहा है । रूपा :क्या लिखा है रेखा मैसेज में ?? रेखा :लिखा है जल्दी घर आ जाओ!! इस तरह से तो जितेंद्र कभी भी मैसेज नहीं करते ।कुछ खास बात होगी … Read more

रिक्त स्थान (भाग 41) – गरिमा जैन

रूपा के साथ वो हादसा हुए एक हफ्ता बीत चुका था लेकिन वह किसी से कोई भी बात नहीं कर रही ।यहां तक की रेखा से भी नहीं ।वह किसी को नहीं बता रही कि उसके साथ क्या हुआ था?? उसे हर पल बस एक ही डर समाया रहता है कि वह कातिल हर वक्त … Read more

क्या बेटी होना गलत है ? – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : ” ईश्वर की लीला देखिए एक के बाद एक तीन बेटियां आ गई एक बेटा दे देता इनमे से तो जीवन तो सफल हो जाता!” मानसी छोटी बेटी को दूध पिलाते हुए पति देवेश से बोली। ” क्यों चिंता करती है तू मानसी देखना हमारी बेटियां बेटों की तरह नाम … Read more

माँ पता नहीं किस ज़माने में जी रही हो आप – के कामेश्वरी  : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : दिनेश ऑफिस में था तभी छोटे भाई ने फ़ोन किया था कि भाई दादी अब इस दुनिया में नहीं रही है । दिनेश थोड़ा उदास हो गया था क्योंकि उसे दादी से बहुत प्यार था । वह उन्हें पसंद थीं क्योंकि पुराने ज़माने की होने के बाद भी उनके विचारों … Read more

ज़माना बदल गया है – रश्मि सहाय : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : शुभा, ओ शुभा!विनीता आवाज़ लगा रही थी, पता नही कहाँ जाकर मर गई है, उसका गुस्सा बढ़ता ही जा रहा था। क्या है माँ, क्यों चीख रही हो? अच्छा! ये माँ से बात करने का तरीका है। जैसे- जैसे बड़ी हो रही हो उद्दंड होती जा रही हो। शुभा पलट … Read more

अपनों का भरोसा – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : “अरे बेटा तुम … बहू और बच्चों के साथ?” सुबह सुबह दरवाज़े की कुंडी बजती देख दरवाज़ा खोल सामने बेटे बहू को देखते हुए रामदयाल जी बोले  “ हाँ अब हम यही रहेंगे।” एक टूक शब्दों में कह किशोर अपना सामान लेकर एक कमरे में चला गया  बेटा बहू का … Read more

माता-पिता से बढ़कर कोई नहीं – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

अभिषेक.. तुम शादी से कैसे मना कर सकते हो? तुम्हें पता है ना मैं अपनी मम्मी पापा की मर्जी के खिलाफ जाकर भी तुमसे शादी के लिए तैयार हूं, और अब तुम शादी से इनकार कर रहे हो! आज तक जो तुमने मुझसे प्यार  के वादे किए थे क्या वह सब झूठे थे..? मैं ही … Read more

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