एक जोड़ी आंखें – डा उर्मिला सिन्हा: Moral stories in hindi

जनवरी के सर्द महीने में मेरा सर्वांग जल रहा है-एड़ी से चोटी तक मैं क्रोध , घृणा और अपमान की भीषण ज्वाला में दग्ध हो रहा हूं। कहां  कमी रह जाती है……? इस विषय पर कई बार सोंच चुका हूं। अभी तंदूरी भट्ठी की तरह जलते तन मन से कोई भी सुकून देने वाली बात … Read more

ये घर तुम्हारा भी है – अर्चना खंडेलवाल : Moral stories in hindi

“भाभी, चाय पीने का बड़ा मन है, आप भैया के लिए बनाओ तो मेरे लिए भी एक कप बना देना।” साक्षी ने धीमी आवाज में कहा और चुप हो गई। वंदना ने सुन लिया और कहा, “साक्षी, अभी तुम्हारे भैया को आने में समय लगेगा, इतना ट्रेफिक जो रहता है, आधा घंटे की कहते हैं … Read more

देवर बन गया बेटा – हेमलता गुप्ता: Moral stories in hindi

किस्मत का खेल देखिए ,सुगना उस घर में बहू बनकर आई थी जहां ना तो लाड चाव करने वाली सास मिली और ना ही नखरे दिखाने वाली कोई नंद, मिले तो सिर्फ हुकुम चलाने वाले ससुर और उनके आज्ञाकारी बेटे महेश जिससे सुगना की शादी हुई और हां साथ में मिली एक 5 साल के … Read more

ये घर तुम्हारा भी है – के कामेश्वरी : Moral stories in hindi

शिवानी बिना किसी नागा के हर रोज वाकिंग के लिए आती थी । सुबह छह बजे उन्हें देखते ही लोग अपनी घड़ी को चेक कर लेते थे । पार्क में कई लोगों को मालूम था कि शिवानी वकील है । शिवानी के ससुर शहर के जाने माने वकील थे । उनके पति विराट ने भी … Read more

बारिश का इश्क (भाग – 5) – आरती झा आद्या: Moral stories in hindi

“कार्यक्रम में इतना उत्साह आ गया था कि जिन्होंने कभी दो पंक्ति भी नहीं लिखी थी, वो भी दो क्या छः पंक्ति की कविता फटाफट रच कर बोल रहे थे। क्या दिन थे वो भी!” वर्तिका की आवाज़ में वह उत्साह था जो उन दिनों के कार्यक्रम में छाया हुआ रहा होगा। सभी ने अपनी-अपनी … Read more

बारिश का इश्क (भाग – 4) – आरती झा आद्या: Moral stories in hindi

लंच की व्यवस्था बगल वाले हॉल में हुई और हम सभी वहां पहुंचकर आश्चर्यचकित थे। लंच के लिए नीचे चादरें बिछाई गई थी, जो हमें गाँव के समारोह की याद दिला रहा था। खुशबूदार चादरों पर बैठकर हमने एक दूसरे के साथ खाना बाँटने का आनंद लिया। मेरे पास पहले से इस तरह के समारोहों … Read more

खुशफहमी – शिव कुमारी शुक्ला : Moral stories in hindi

कभी कभी मनुष्य बडी ही खुशफहमी में रहता -कि वही  कर्ताधर्ता है। उसने बिना एक पत्ता भी इधर से उधर नहीं होना चाहिए जो वह सोचता है वही सच है वाकी कि पूरे  परिवार में सोचने समझने की  औकात ही नहीं है। सागर जी एक नौकरी पेशा, सुखी गृहस्थ थे। वे दो वेटी व  एक … Read more

मधु स्मृति –  बालेश्वर गुप्ता : Moral stories in hindi

  भाई, इस घर से बाबूजी की यादे जुड़ी हैं, इसको मत बेचो,कुछ तो सोचो,बाबूजी की आत्मा को कितना कष्ट होगा।          भैय्या, बाबूजी के प्रति मेरा भी आप जितना ही लगाव और श्रद्धा है।पर वे अब इस दुनिया मे नही है और मैं अमेरिका में रहने लगा हूँ,अब आप ही बताओ मेरे हिस्से के मकान का … Read more

घर की मिठास (भाग 2) – लतिका श्रीवास्तव: hindi stories with moral

hindi stories with moral : तीन दिनों बाद ही पापा का जन्मदिन है इस बार पापा पचास वर्ष पूरे कर लेंगे … भैया मैने पापा की इस पचासवीं सालगिरह के लिए एक सरप्राइज़ प्लान किया है सुबह सुबह ही वीना वरुण के पास फुसफुसाकर कह ही रही थी तभी मां हाथ में आरती की थाली … Read more

भाग्य विधाता – उमा वर्मा : Moral stories in hindi

” क्या हुआ, कहीँ बात बनी?” अविनाश जी सोफे पर आकर निढाल होकर बैठ गये।जब सरला ने दुबारा पूछा तो उनहोंने नहीं में सिर हिलाया ।बेटी गीता के ब्याह को लेकर दोनों पति पत्नी आजकल परेशान थे।जहां जाते ,कहीँ दहेज की मांग अधिक होती, कहीँ लड़का पसंद नहीं होता, कहीँ खाने पीने वाला होता ।कहीं … Read more

error: Content is protected !!