पछतावे के आँसू – लतिका 

संगीता जी वृद्धाश्रम के कमरे मे लेटे हुए अपने पुराने दिनों को याद कर रही थी। उनके आँखो से बहते आँसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। नींद आँखो से कोसो दूर थी। जो उनके बहुत चाहने पर भी आ नहीं रही थी।सोच रही थी कि सो जाती तो शायद कुछ देर के … Read more

निर्लज्ज – खुशी

सुहासिनी की शादी एक ऐसे परिवार में हुई जिसमें ससुर जी की बड़ी चलती थी और उसका पति भी अपने बाप से डरता था ।घर में किसी की हिम्मत नहीं थी कि वो ससुर रामबाबू के आगे बोल सके सास राधा भी डरी सहमी रहतीं।बेटी लक्ष्मी तो कुछ बोलती ही नहीं थी। उसकी शादी भी … Read more

ट्रैफिक जाम – एम. पी. सिंह

अरे, बाकी लोग कहाँ है, बॉस आते ही जोर से बोला, 8 बजे का टाइम दिया था, 9 बजे गए है, कब शुरू होंगी पार्टी? मानकी, रोहन,  सुमित और कोमल सब ट्रैफ़िक जाम मे फसे है, बस आते ही होंगे. सोनल की बात सुनकर सब ऑफिस वाले बैंगलोर के ट्रैफिक को कोसने लगे पर खुशी … Read more

जरूरत – लतिका श्रीवास्तव

रमिया क्या कर रही है कब से पुकार रही हूं जल्दी से बर्तन धोकर दे  साहब का लंच भी तो बनना है ।तू है तो सुन ही नहीं रही है मालिनी जी ने पीछे वाले आंगन में तेजी से घुसते हुए जोर से कहा तो देखा रमिया अपने जिद मचाते सुबकते तीन वर्ष के पुत्र … Read more

अपनों से तो गैर भले – रश्मि झा मिश्रा 

“…इस बार सोचती हूं, मां पापा की एनिवर्सरी में उन्हें सरप्राइज दिया जाए… वैसे भी उनके नए घर में मुझे रहने का मौका नहीं मिला है… इसी बहाने चार दिन रह भी लूंगी उनके साथ… ठीक है ना रजत…!” “… जो तुम्हें ठीक लगे… देख लो… टिकट कर लेना, या फिर मुझे बता देना…!”  बात … Read more

अपनों से तो गैर भले – स्वाती जैंन

साहिल के  फोन की स्क्रिन पर किसी मोना नाम की लड़की के मैसेज का नोटिफिकेशन देखकर राखी से रहा नहीं गया और वह फोन हाथ में लेकर चेक करने लगी ! साहिल का फोन लॉक था और सहिल वैसे भी अपना पासवर्ड कभी राखी को बताता नहीं था मगर उपर आए नोटिफिकेशन में मोना का … Read more

मैं भी तो एक बेटी हूं। – सीमा गुप्ता

सुबह के साढ़े चार बजे थे। अभी अँधेरा पूरी तरह छँटा नहीं था। अलार्म की घंटी के साथ अनन्या की नींद खुल गई। वह कुछ पल चुपचाप लेटी रही। पास ही सो रहे पति आदित्य की नींद न टूटे, इसलिए वह धीरे से उठी।  नहाने के बाद उसने तुलसी के सामने दीपक जलाया। हाथ जोड़ते … Read more

अभिमान – खुशी

प्रमिला एक बेटे नरेंन  की मां थी उसके पिता गल्फ में नौ करी करते थे। तो उसके पास अनाप-शनाप पैसा था। जिसे वह जैसे चाहे खर्च करती । क्योंकि उसके पति तीन-चार साल। में  घर आता पर महीने में अच्छा पैसा भेजता।जिससे प्रमिला और नरेन  बहुत घमंडी हो गए थे उस पर सोने पर सुहागा … Read more

इतना अभिमान ठीक नहीं – आराधना श्रीवास्तव

शैलजा बस 19 वर्ष की थी जब रमैया की दुल्हन बनकर आई थी । रमैया सीधा-साधा ग्रामीण अंचल में पला- बढा प्रकृति को ही अपना इष्ट देव मानता और खेतों में लहलहाते  फसलों को अन्नदाता ।  जी तोड़ मेहनत करता।  मेहनत तो उसके रंग रंग में बसा था खेती -बाड़ी तथा बीजों का ज्ञान उसे … Read more

इतना अभिमान सही नहीं। – मधु वशिष्ठ

   माधवी बेहद सुंदर पढ़ी-लिखी और और संपन्न परिवार की लड़की थी। अभी उसने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। आजकल लड़कों के लिए लड़की ढूंढना भी इतना सरल काम नहीं है। अच्छी लड़की और अच्छा परिवार देख कर बहुत से रिश्ते भी स्वत: ही आने लगते हैं। ऐसे ही माधवी के लिए बहुत से … Read more

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