यही तो है रिश्तों की जमा पूंजी – मंजू ओमर

सुनंदा देख रही थी कि आज साक्षी खाना बनाते-बनाते गुनगुना रही है उसके चेहरे पर खुशी झलक रही थी। पता नहीं क्या बात है जो आज बहू इतनी खुश है । घर में सुनंदा का बेटा आदित्य और बहू साक्षी थी। सुनंदा और बहू की अच्छी निभती थी। साक्षी बहुत अच्छी थी, घर में अच्छा … Read more

कुल कलंकिनी। – मधु वशिष्ठ

            बैंक्विट हॉल में अपने भाई राहुल की शादी की रिसेप्शन में रीना ही सबका स्वागत करने के लिए गेट पर खड़ी थी। डीजे पर रीना का बेटा नाच रहा था। रीना का डायमंड का लंबा हार, बाहर खड़ी लंबी सी कार , उसका मेकअप करा हुआ  सुंदर और मासूम चेहरा देखकर आज उसके चाचा चाचा … Read more

कुलकलंकिनी :- नंदिनी – रानू जैन

गाँव बिरनपुर में सरपंच दीनदयाल की बेटी नंदिनी को देखकर लोग कहते, “इससे अच्छी बहू पूरे जिले में नहीं मिलेगी।” संस्कार, सेवा, सलीका – सब में अव्वल। हाथ का बना आम का अचार जिसकी महक से पूरा मोहल्ला पूछता, “दीनदयाल जी, ये किसने बनाया?” नंदिनी मुस्कुराकर सिर झुका लेती।  18 की उम्र में उसकी शादी … Read more

आपसी समझ भी जरूरी है – डॉ बीना कुण्डलिया 

ट्रिन ट्रिन ट्रिन ट्रिन कॉलवेल की बजती आवाज सबके कानों को बेध रही थी। मगर आज भोर सवेरे जबकि सन्डे की छुट्टी का दिन और फिर सर्दियों की सुबह जब कि सूरज भी निकलने को तैयार नजर नहीं आ रहा, ऐसे में बिस्तर को छोड़कर बाहर आने की हिम्मत कौन करता भला ?  जयंत बाबू … Read more

दो टूटे हुए दिल

अनन्या शीशे के सामने बैठी अपनी परछाई को एकटक निहार रही थी। आज वह फिर से लाल जोड़े में सजी थी। माथे पर सजी बिंदी, हाथों में रची मेहंदी और बालों में लगे मोगरे के फूलों की महक—सब कुछ वैसा ही था जैसा पाँच साल पहले था। लेकिन इस बार उसके मन का कोलाहल उस … Read more

गहरे घाव

निशा जब भी आईने के सामने खड़ी होती थी, तो उसे अपनी आँखों की गहराई में एक अजीब सी खामोशी नज़र आती थी। लाल रंग की खूबसूरत बनारसी साड़ी, माथे पर सजी चमकती बिंदी और कलाइयों में खनकती चूड़ियाँ—आज वह पूरी तरह से एक सजी-धजी और खुशहाल पत्नी लग रही थी। लेकिन इस खुशी के … Read more

आत्मसम्मान माँ का

पैंसठ वर्षीया सावित्री देवी के हाथों में चाय का कप हल्का-हल्का कांप रहा था। सुबह के सात बजे थे और रसोई से उनकी बहू तान्या की कर्कश आवाज़ पूरे घर में गूंज रही थी। “पता नहीं इस घर में दूध की नदियां बहती हैं क्या! सुबह उठते ही सबको दो-दो बार चाय चाहिए। बैठे-बैठे मुफ्त … Read more

सबक

सावित्री देवी जब सुबह उठीं, तो उन्होंने देखा कि पूरा सिंक जूठे बर्तनों से भरा है और घर में झाड़ू तक नहीं लगी है। तभी सुहासिनी जमाइयां लेती हुई बाहर आई और बोली, “माँ जी, आज तो मेरे सिर में बहुत भयंकर दर्द है। मुझसे तो खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा। मीनल दीदी को … Read more

ममता के नियम

अंजलि के जाते ही कमरे में ऐसा सन्नाटा छा गया मानो किसी ने वक्त को वहीं थाम दिया हो। अंजलि के उन चंद शब्दों ने सुमित्रा देवी के अंतर्मन पर किसी हथौड़े की तरह वार किया था। उनके पास अंजलि की बात का कोई जवाब नहीं था। जो नसीहतें वे अपनी बेटी को उसके ससुराल … Read more

संघर्ष

ड्राइंग रूम के सोफे पर बैठी नंदिनी अपने पच्चीस साल के बेटे सिद्धार्थ को सूटकेस पैक करते हुए देख रही थी। सिद्धार्थ कल सुबह मुंबई जा रहा था, लेकिन मुंबई जाने से पहले उसे शहर के दूसरे कोने में अपने पिता से मिलने जाना था। जब नंदिनी ने देखा कि वह अपने पिता की ‘दूसरी … Read more

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