साथ चलोगे – संजय मृदुल

सुनो! तुम कुछ कहना चाहते हो? रुचि ने अंशुल को रोक कर कहा। अंशुल हतप्रभ खड़ा रह गया, समझ नही आया क्या जवाब दे, क्या कहे? पूरे छः साल के बाद ये पूछा था रुचि ने। अंशुल को असमंजस में देख कर रुचि ने ही कहा, शाम को मिल सकते हो, वहीँ? जी जरूर। इतना … Read more

एक और मौका । – उमा वर्मा

सुमी का ससुराल में आज पहला दिन था।कल ही एक हाॅल में शानदार तरीके से शादी हुई थी ।रात भर शादी की धूम धाम थी अभी अभी घर आई थी।मुँह दिखाई की रस्म चल रही थी ।बगल में सास मीता बैठ कर सबसे परिचय करा रही थी।तभी कानों में किसी ने धीरे से कहा “अपनी … Read more

बचपन – एम. पी. सिंह

रोहन एक सीमेंट फैक्ट्री में टेक्निशियन था और उसकी एकलौती बेटी कान्ता क्लास 8 में पड़ती थी. फैक्ट्री केम्पेस में कम्पनी का 2 बेड रूम का मकान. उसकी क्लास में एक नया एडमिशन हुआ, जिसका नाम था पायल. पायल के पिता फैक्ट्री में सीनियर अधिकारी थे, कम्पनी का बड़ा बंगला, नौकर चाकर, कारें ड्राइवर, गार्ड … Read more

इंसानियत अभी जिंदा है – मंजू ओमर 

कल्लू वो कल्लू कहां घूम रहा है। कितने दिनों से तुम्हें फोन लगा रहा हूं ,पर फोन बंद था रहा है।कहां था इतने दिन से ।बस बाबूजी फोन रिचार्ज नहीं था ।आजकल कहीं काम नहीं मिल रहा था पास में  पैसे नहीं थे तो रिचार्ज नहीं कर पाया ।अच्छा इधर आ घरमें कुछ काम  कराना … Read more

यह रिश्ता टूटता ही नहीं -शुभ्रा बैनर्जी 

“मां,कल हम लोग आ रहें हैं।वकील अंकल को बुलवा लीजिएगा।घर के पेपर्स तैयार हैं ना?मैंने दो साल पहले ही कहा था आपसे।अब ना -नुकुर मत करिएगा।इस बार आप आ रहीं हैं हमारे साथ बैंगलुरू।और हां ,हमारा कमरा तो काली है ना,या उसमें भी बच्चे रहते हैं? मैं अपने कमरे में कोई भी बदलाव नहीं देखना … Read more

इंसानियत अभी जीवित है – गीता वाधवानी

महानगर मुंबई, एक छोटी सी खोली में रहने वाले तीन दोस्त। नवीन, अजय और सुनील। नवीन किसी कंपनी के ऑफिस में पिओन का काम करता था। अजय और सुनील एक जूते बनाने वाली फैक्ट्री में काम करते थे। तीनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे और मिल बांटकर गुजारा करते थे। तीनों को घर पर … Read more

इंसानियत – मीनाक्षी गुप्ता

‘गुलमोहर सोसाइटी’ के ब्लॉक-सी में वैसे तो बहुत सारे परिवार रहते थे, लेकिन यह कहानी थी—फ्लैट नंबर 201 और 202 में रहने वाले परिवारों की। इन दोनों घरों के बीच की दूरी महज़ दस कदम की थी, लेकिन इनके विचारों के बीच मीलों का फासला था। फ्लैट नंबर 201 में मीरा जी का परिवार रहता … Read more

इंसानियत की मिसाल – संगीता अग्रवाल

” आदित्य !” बाहर से घर में घुसी नीता अपने सामने का नज़ारा देख हैरत और गुस्से से चिल्ला पड़ी ।  ” मम्मा …!!” मां को सामने देख आदित्य ने अपने नीचे दबोची नन्ही वसुधा को छोड़ा और भाग खड़ा हुआ ।  “रुक जाओ आदित्य !” नीता फिर चिल्लाई पर आदित्य तो तीर से छूटे … Read more

आधुनिक परिवार – कमलेश राणा

सुमन ने जब ब्याह के बाद अपने ससुराल की चौखट पर कदम रखा था, तो भीतर ही भीतर उसके मन में कई तरह की आशंकाएँ थीं। वह अपने मायके में जैसी पली-बढ़ी थी, वहाँ नियम-कायदे बहुत थे—कौन कहाँ जाएगा, कितनी देर रुकेगा, क्या पहनेगा, किससे बात करेगा, इन सब पर घर के बड़े नज़र रखते … Read more

इंसानियत – नीलम गुप्ता

स्वार्थ भाव से ऊपर उठकर सब के प्रति सहानुभूति पूर्ण व्यवहार करना इंसानियत का आधार है ।एक इंसान दूसरे इंसान को इंसान समझे, उसके सुख-दुख में साथ दें ,उसकी खुशी में खुश हो और गम में दुखी हो यही तो इंसानियत है ।इंसानियत कोई बहुत महानता या अभिमान की विषय वस्तु नहीं है । यह … Read more

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