राखी और कजलियां – शुभ्रा बैनर्जी   : Moral Stories in Hindi

सुबह से ही राखी की तैयारी कर रही थी रजनी।भद्रा लगने के कारण दोपहर को ही राखी बंध पाएगी।रजनी ने सोचा पकवान तो बना ही लूं।निधि भोर पांच बजे पहुंची है बैंगलुरू से।काम से छुट्टी तो नहीं मिली थी, वर्क फ्राम होम ले लिया उसने।नवीन को तो काम पर जाना था।दोपहर तक आ जाएगा वो। … Read more

आपकी बेटी होती तो.. – विभा गुप्ता   : Moral Stories in Hindi

दिव्या और शिल्पी बचपन की सहेलियाँ थीं।दोनों एक ही स्कूल और एक ही क्लास में पढ़ती थीं।पढ़ाई के साथ-साथ दोनों स्कूल की खेल प्रतियोगिता और संगीत प्रतियोगिता में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेती थीं।दिव्या तेज स्वभाव की थी।उसे गलत बात बर्दाश्त नहीं होती थी।विशेषकर उसकी सहेली को कोई कुछ कह दे तो वह उससे झगड़ा … Read more

आशियाना – बालेश्वर गुप्ता   : Moral Stories in Hindi

  जानती हो गुड़िया की माँ,हमारी गुड़िया सचमुच में लक्ष्मी है,इसका घर मे आना हुआ उधर मालिक ने बहुत कम कीमत पर वो छोटा सा प्लाट दे दिया।अब हम धीरे धीरे अपना घर बना लेंगे।हमारी गुड़िया बहुत भागवान है,री।      अरे ये तो बहुत ही अच्छा हो गया।अब हमारा भी घर हो जायेगा।कब से अपने घर का … Read more

बाबुल – वीणा सिंह   : Moral Stories in Hindi

दो बहनों और एक भाई के बाद मेरा जनम हुआ था… जनम के दो महीने बाद हीं मां की मृत्यु हो गई… पापा और दादी ने कैसे मुझे पाला… थोड़ा समझदार होने पर जब दादी बताती तो आश्चर्य होता.. प्यार से मेरा नाम रखा निधि….. अपने पांचों बच्चों में पापा सबसे ज्यादा मुझे प्यार करते … Read more

मैं जल्दी ही लौट कर आऊँगा….. – रश्मि प्रकाश   : Moral Stories in Hindi

 अपने दिलो दिमाग़ से लड़ती कज़री अपने कमरे से एक एक सामान समेट रही थी…. आँखों से आँसू थमने का नाम नहीं ले रहा था….ससुराल वालों के तानों से आहत मन और दिमाग़ में उनके बातों के हथौड़े के चोट से वो पूरी तरह घायल हो चुकी थी…. बेटी की ये हालत देख कर उसके … Read more

सुनहरी धूप – अनुज सारस्वत  : Moral Stories in Hindi

“मम्मी आप मुझे यूं आप भाभी से छुप छुप के सामान रूपये मत दिया करो।ये बहुत नाराज होते हैं।कहते हैं कोई कमी रखी जा रही जो यह काम हो रहा ।वो तो मैं कह देती हूँ कि माँ बाप का प्यार है मैं कैसे मना करूं।लेकिन आपको तो पता है ये बहुत खुद्दार हैं।शुरू से … Read more

बाबुल का आंगन – हेमलता गुप्ता  : Moral Stories in Hindi

अरे अरे.. कहां छुप गया मेरा बच्चा.. देख बेटा.. पापा को ऑफिस के लिए देर हो रही है फटाफट बाहर आजा…! अरे पापा.. मैं तो फ्रिज के बगल में छुपी  हूं.. आप ढूंढो ना मुझे…! ओहो.. तो मेरी रानी बिटिया फ्रिज के बगल में छुपी हुई थी और मुझे दिख ही नहीं रही थी! पापा … Read more

बहन तो बहन ही होती है – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय  : Moral Stories in Hindi

“शशांक रिद्धि आने वाली है रक्षाबंधन पर! कितने दिन हो गए हैं उसे देखे हुए! ये रक्षाबंधन तो खिल ही उठेगा उसके आने से।” मां ने खुशी से यह खबर सुनाते हुए कहा तो एकबारगी से मैं जितना खुश हुआ उतना ही शौक्ड भी। तबतक सुधा तीन कप चाय लेकर आई और कहा “अम्मा जी … Read more

प्यार का बंधन – कमलेश आहूजा : Moral Stories in Hindi

हमेशा की तरह सरोज के भाई का इस बार भी राखी का पांच सौ रुपए का मनीऑडर आ गया।ना ही उसने कोई फोन किया,कि दीदी तुम्हारी राखी मिल गई थी ना ही उसकी कोई चिट्ठी आई।सरोज की आँखें फिर से नम हो गईं। माता पिता के जाने के बाद सरोज के छोटे भाई साहिल ने … Read more

अवसरवादी बहन – शुभ्रा बैनर्जी : Moral Stories in Hindi

इस बार रीना ने मंझली बहन शिवानी और छोटी बहन रिया को पहले से बोल दिया था भाई के घर राखी में चलने के लिए।मां के जाने के बाद सभी भाई-बहन रीना के घर ही आते थे हर त्योहार में।बड़ा भाई रीना से छोटा,बाकी भाई बहनों में बड़ा था।इस बार राखी के महीने भर पहले … Read more

error: Content is protected !!