एक भूल …(भाग -4) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral Stories in Hindi

अब आगे •••••• वह व्यक्ति थे संदलपुर के राज ज्योतिषी। राज ज्योतिषी के मुख मंडल पर चिन्ता और व्यथा की रेखायें गहरी होती जा रही थीं। सारे राग – रंग और उत्सवों से दूर वह अपने आवास में राजकुमार की कुण्डली बना रहे थे। ” क्या बात है स्वामी? आपको बहुत चिन्तित और व्यग्र देख … Read more

एक भूल …(भाग -3) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral Stories in Hindi

अब आगे •••••• पता नहीं किस ब्रत, उपवास, अनुष्ठान या यज्ञ का प्रभाव था या कुलदेवी का आशीर्वाद फलीभूत हुआ कि महाराज की आकांक्षाओं के कल्पतरु में ऋतुराज का आगमन हुआ। प्रजा के कामना – कानन में पुष्पों का सौरभ महकने लगा तथा महारानी के नेत्रों में भी मातृत्व का गौरव लहराने लगा। पूरे राज्य … Read more

एक भूल …(भाग -2) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral Stories in Hindi

अब आगे •••••• आज से करीब पॉच सौ वर्ष प्राचीन रामलला की इस मूर्ति का इतिहास यहॉ का बच्चा बच्चा अपने घर के बड़े – बुजुर्गों से इतनी अधिक बार सुन चुका है कि अगली पीढ़ी को इसका इतिहास विरासत के रूप में स्वत: ही सौंप देता है। वर्षो से यही क्रम चलता आ रहा … Read more

एक भूल …(भाग -1) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral Stories in Hindi

” राम लला चोरी हो गये।” ” रात में कोई राम लला की मूर्ति चुरा ले गया ” सुबह सुबह हर व्यक्ति के मुॅह पर वही बात थी, जिसे देखो वही मन्दिर की ओर भागा जा रहा है। जिस मन्दिर के प्रांगण में इस समय मोहिनी छवि वाले मुस्कराते राम लला के श्रद्धालुओं की भीड़ … Read more

प्रेमालाप – पुरुषोत्तम : Moral Stories in Hindi

“क्या हमारा ब्याह न हो पायेगा आरू?” अरिंदम की बाँहों में सिमटी सुनयना ने आह भरते हुए कहा। “नहीं।” “क्यों आरू।” “क्योंकि तुम बड़े घर की हो और मैं छोटे घर का।” “लेकिन मुझे तुमसे दूर रहना होगा, यह सोचकर भी डर लगता है। मेरा ब्याह होगा किसी और से, तो तुमसे क्यों नहीं। प्रेम … Read more

”नेहा“ – पुरुषोत्तम : Moral Stories in Hindi

अनुमंडल से कोई बारह किलोमीटर दूर, संथाल की पठार का एक गाँव कमलपुर। गाँव नहीं देहात, भोले-भाले, खेती-किसानी करने वाले लोग। अनपढ़ों की पिछड़ी बस्ती। बस्ती पिछड़ी भली लेकिन सपने आसमान में उड़ने के; अपनी कमजोर और नन्ही ही सही पंखों के सहारे। इसी बस्ती में गरीब परिवार में जोड़ी भर आँखों में ऐसे ही … Read more

हमारी बहू – मीनाक्षी शर्मा : Moral Stories in Hindi

मेघा अभी 8 महीने पहले ही हमारे घर में ब्याह कर आई थी… गोरा रंग ,तीखे नैन नक्श ,बहुत सुंदर रूप… घर में उसकी पायल की आवाज से मानो चार चांद लग गए हो… मां से तो ऐसे घुल मिल गई थी ,जैसे वह उनकी बहू नहीं बेटी हो… मां की ओर से भी उसको … Read more

बहू हमारी महारानी – नेकराम : Moral Stories in Hindi

मालकिन जी आज आपका पहला दिन है तो आपके लिए खीर बना रही थी तब काजल ने कहा इस घर में मेरी कोई सासू मां तो है नहीं आप ही मेरी मां बनकर मुझे आशीर्वाद दे दीजिए जी मालकिन जी जैसी आपकी इच्छा रुक्मणी जी ने गैस को बंद करके काजल को आशीर्वाद दिया तो … Read more

बड़ी बहू तो घर की बंधुआ मजदूर थी – स्वाती जैन : Moral Stories in Hindi

वीणा , हमारी बेटी के लिए एक से एक रिश्ते आ रहे हैं मगर तुम हो कि सारे रिश्ते रिजेक्ट करती जा रही हो और बेटी की शादी कराने का नाम ही नहीं ले रही हो , मुकेश जी अपनी पत्नी वीणा से बोले !! वीणा जी बोली – पहली बात तो मैं अपनी बेटी … Read more

ज़िम्मेदारी का एहसास – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

” अरे सिम्मी बुआ आप! आप कब आईं?” कहते हुए काजल ने अपना बैग सोफ़े पर रखकर बुआ को प्रणाम किया और अपनी मम्मी सुनयना से बोली,” मम्मी…बहुत थक गई हूँ।एक कप चाय…।” कहते हुए वह अपने कमरे में जाने लगी तो सिम्मी बुआ आश्चर्य-से बोली, ” काजल तू यहाँ…तुझे तो अपने घर होना चाहिए … Read more

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