कमरे की सीमा रेखा – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

क्या मम्मी आपसे कितनी बार कहा है कि कमरे में रहा करों बाहर मत आया करो वही पर आपको सब चीजें खाने पीने कि मिल जाया करेगी फिर भी आप  पता नहीं क्यों सुनती नहीं हो ।बार बार आ जाती है बाहर ।ओ बेटा जरा चाय पीने कि इच्छा हो रही थी,,,। मिल तो जाती … Read more

वादा … – अर्चना सिंह : Moral Stories in Hindi

अक्सर लोगों के मुँह से सुना है कि रूप से ज्यादा गुण का महत्व है । पर मैं नहीं मानती, मेरे साथ तो हर कदम हर मोड़ पर मेरे अपनों ने ही मुझे रूप की वजह से अनदेखा किया है । मैं पूर्णिमा ! सिर्फ नाम ही अच्छा रखा माँ – बाप ने , ज़िन्दगी … Read more

तड़ाक…. – सुनीता उपाध्याय : Moral Stories in Hindi

एक जोर का थप्पड़ पड़ा अनिता के गाल पर। इससे पहले की वह कुछ समझ पाती,उसका पति उसे उसके हाल पर छोड़कर घर से बाहर जा चुका था। अनिता को कुछ समझ नहीं आया कि विकास ने ऐसा क्यों किया? अनिता कुछ समय तक वहीं जड़वत खड़ी रही और उसका मन अतित के गलियारों मे … Read more

हर रिश्ता थोड़ा स्पेस मांगता है – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

” देखो प्राची ये अनामिका पता नही इतना सज धज कर कहां जा रही है ?” प्राची अपने घर के दरवाजे पर खड़ी थी तब उसकी पड़ोसन नीतू उससे बोली। ” जा रही होगी किसी काम से या किसी फंक्शन में !” प्राची लापरवाही से बोली। ” अरे ये तो अपने मिस्टर के बिना कही … Read more

सीमा रेखा पार कर दी मैंने। – सुषमा यादव : Moral Stories in Hindi

शिवानी शादी के पहले से ही नौकरी कर रही थी, इसलिए वह अपने मायके में ही रह रही थी। उसके पति एक दूसरे प्रदेश में उच्च पद पर कार्यरत थे।  शिवानी के मायके में उसके तीन भाई मां और पिताजी उसके साथ रहते थे। सबकी प्यारी दुलारी शिवानी थी। उसके भाई भी उसका बहुत आदर … Read more

ग्लानि – रेणु गुप्ता : Moral Stories in Hindi

दोपहर का खाना पीना निपटा, नौकरानी को घर भेज अंजुरी तनिक कमर सीधी करने लेट गई और कुछ ही देर में वह गहन निद्रा के आगोश में समा गई।  कब न जाने किस अबूझ  अनुभूति वश वह अचानक जाग गई और अपनी आंखों के समक्ष सुदूर बंगाल में रहने वाली अपनी सहोदरा पाखी को देख … Read more

ज़िंदगी चलने का नाम – मणि शर्मा : Moral Stories in Hindi

“अब मैं यह सब बर्दाश्त नहीं कर सकती ,हर समय तुम्हारी मम्मी के तानों से परेशान हो गयी हूँ “,कहते कहते मीरा साहिल के सामने रो पड़ी . “नहीं कर सकती तो जो चाहो करो ,जहाँ चाहो जाओ मैं भी रोज़ रोज़ की चिक चिक से तंग आ गया हूँ “,चीखता हुआ साहिल कमरे से … Read more

आखिर मेरे साथ ही यह सब क्यों होता है – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

अवंतिका के मन में आज बार बार यह प्रश्न उभरकर उसके सामने आ रहा था कि आख़िर मेरे साथ ही यह सब क्यों होता है । उसे याद आ रहा था जब वह दसवीं कक्षा में पढ़ रही थी । उसके प्री फ़ाइनल परीक्षा चल रही थी । उसकी वजह से माता-पिता ने उसे घर … Read more

बड़ा है तो क्या! – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

 ” भाई…आप हद से आगे बढ़ रहें हैं..।” विनय चीखा।    ” अच्छा.. तो तू अब मुझे मेरी हद बताएगा।तूने अपनी ज़बान पर कंट्रोल नहीं किया तो मैं क्यों करूँगा…।” प्रकाश ने तमतमाते हुए कहा।         अपने दोनों बेटों को झगड़ते देख गायत्री जी का कलेजा छलनी हो रहा था।वो धम्म-से सोफ़े पर बैठ गईं और अपने … Read more

जीवन की वास्तविकता – गीता वाधवानी : Moral Stories in Hindi

कौशल्या देवी ने पति के गुजर जाने के बाद बड़ी कठिनाइयों  से अपने बेटे नरेश को पढ़ा-लिखा कर बड़ा किया था। बेचारी पढ़ी लिखी तो थी नहीं, जो उसे कोई नौकरी देता।उसे झाड़ू पोछा, बर्तन कटका का ही काम मिला। खुद अनपढ़ थी पर बेटे को पढ़ाना चाहती थी। कई बार सोच कर रो पड़ती … Read more

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