खत्म हो गई शिकायतें – रेखा शाह आरबी : Moral Stories in Hindi

मोनिका  को नौ  बजे वाली लोकल  ट्रेन पकड़कर ही ऑफिस जाना पड़ता था। आज थोड़ी सी देरी हो गई थी। इसीलिए खूब झुझलाहट की शिकार थी।  मोनिका सोच रही थी -पता नहीं समय से पहुंच पाऊंगी या नहीं गौरव को भी कोई सामान  खुद से कभी नहीं मिलता है.. सब चीज उन्हें उठा कर देनी … Read more

मतभेद, – वीणा सिंह : Moral Stories in Hindi

एक सप्ताह के लिए ऑफिस के काम से अपने शहर में अर्थात मायके जाने का मौका मिला है.. मां के साथ कुछ खूबसूरत सकूं भरे पल बीतेंगे सोच कर कितना अच्छा लग रहा है…                     जानी पहचानी सी सड़क और आड़ी तिरछी गलियों से होकर पहुंच हीं गई अपनी मां के पास…शुभाआ मां गले से लग … Read more

सीमा रेखा – रोनिता कुंडु : Moral Stories in Hindi

बेटा… अगर हो सके तो तुम्हारी सैलरी आते ही इस बार सबसे पहले मेरा चश्मा बनवा देना या फिर नया ही दिलवा देना… बड़ी तकलीफ होती है बेटा… चश्मा के बगैर… अशोक जी ने अपनी बेटे नामित से कहा  नामित:   आपका ना मुझे समझ नहीं आता पापा… हर बार सैलरी आई नहीं उससे पहले … Read more

ये कैसी सीमा रेखा – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

“ माँ तुम पिता जी को समझा दो … मुझे अभी शादी नहीं करनी है और ये लड़कों के घर जा जाकर उन लोगों से मिलना छोड़ दें… मुझे अभी बहुत पढ़ाई करनी है और शादी ब्याह के पचड़े में जरा भी नहीं पड़ना।” ग़ुस्से में पैर पटकती नैना अपने कमरे का दरवाज़ा बंद कर … Read more

घर की बेटी अब और ना सहेगी। – अर्चना खंडेलवाल : Moral Stories in Hindi

मालती का मन बड़ा ही बेचैन था, सुबह से शाम हो गई पर वो कोई निर्णय नहीं ले पा रही थी, विनोद के ऑफिस से आने का समय हो गया था, उसने खाने की तैयारी कर ली और बेचैनी से बॉलकोनी में टहलने लगी, हर आती -जाती कार पर उसकी निगाह थी, जैसे ही विनोद … Read more

सुबह का भूला – डाॅ उर्मिला सिन्हा : Moral Stories in Hindi

हैरान परेशान… पूजा ने घर में घुसते ही हंगामा मचा दिया, ” आखिर कबतक बर्दाश्त करुं। घर का काम मैं करुं, पैसे कमाकर मैं लाऊं… बच्चे मैं पालूं, तुम्हारे मां-बाप की सेवा करुं और तुम मुझे आंखें तरेरो” नन्हे  बच्चे सहम गये। वृद्ध सास-ससुर  पूजा के इस रोज के नाटक को चुपचाप देखते रहे।  सोफे … Read more

अपने लिए आवाज़ स्वयं उठानी पड़ती है! – पूर्णिमा सोनी : Moral Stories in Hindi

क्या करूं,आज  दत्ता सर बाहर गए हैं , मतलब अपना काम लैब में थोड़ी देर से भी शुरू कर सकती हूं.. मतलब करना तो है ही.. पहले कैंपस के बाहर जो  चाट का ठेले वाला खड़ा होता है, उससे गोलगप्पे खा कर आती हूं। गोलगप्पे!! इसकी तो कल्पना कर के ही प्राची का मुंह गोलगप्पे … Read more

अकेलापन – चम्पा कोठारी : Moral Stories in Hindi

संस्मरण 20 बर्ष पुराना है।बुजुर्ग अम्मा को दया पिछले कई सालों से मोहल्ले में घूमते हुए देखती थी । कई बार वह जिस मकान में कोई बड़ा गेट नहीं होता था सीधे अंदर चली जाती थी और वहाँ पर कहीं पर भी सीढ़ियों में  बैठ जाती। मकान में रहने वालों को कभी कभी पता भी … Read more

दूसरों को बदलने से पहले स्वयं को बदलना जरूरी हैं – कमलेश आहूजा : Moral Stories in Hindi

“रजत तुझसे कितनी बार कहा है कि बहु को समझा दे बड़े बुजुर्गों के सामने छोटे कपड़े ना पहना करे..रिश्तों में एक सीमा रेखा होनी चाहिए। आज तेरे ताया जी आए थे उनके सामने बहु स्कर्ट और टी शर्ट पहनकर आ गई।वो बेचारे कुछ बोले नहीं सारा समय मुंह नीचे करके बैठे रहे। क्या सोचते … Read more

नई शुरुआत… – रश्मि झा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

“कैसी सीमा रेखा अतुल… आप कहना क्या चाहते हैं…? क्या इतने सालों बाद भी ऐसी बात आपको शोभा देती है… बीस साल हो गए हमारी शादी को… इतने बड़े-बड़े बच्चे हैं… अगर उन्हें पता चला की मां पापा में किस बात की बहस चल रही है तो वह क्या समझेंगे…?” ” सुनने दो और समझने … Read more

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