अशांति – चम्पा कोठारी : Moral Stories in Hindi

सीमा ट्रेन से भोपाल  जा रही थी सेकेंड AC में उसकी बर्थ बुक थी अकेली ही जा रही थी इसलिए उसने आसपास नजर डाली सामने एक अकेले शख्स को बैठे देखा थोड़ी असहज हो रही थी। परंतु ट्रेन चलने से ठीक 10 मिनट पहले ही एक जवान दंपत्ति बदहवास से जल्दी-जल्दी ट्रेन में सवार हुआ … Read more

लोग क्या कहेंगे – मनीषा भरतीया : Moral Stories in Hindi

सुरेंद्र शर्मा जी का 3 मंजिला मकान फूलों की लताओं और बिजली की लड़ियों से घिरा हुआ था.हॉल सुंदर,आकर्षक बड़े हैलोजन, डिजाइनर फूलों के टब,और फ्लोटिंग कैंडल से सजा हुआ था. पूरा मकान जगमगा रहा था. बाहर लॉन में फूलों की सुंदर बागवानी तो थी.. साथ ही साथ शर्मा जी ने एक्सपेंसिव फूलों के ढेरों … Read more

ये गलती न होगी दुबारा – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

मिन्नी जा भाग कर चार कप चाय बना ला “सुमन ने अपनी बेटी मिन्नी से कहा। “मम्मी मै फेल हो जाऊँगी, इस तरह आप काम करवाओगी “मिन्नी चिढ़ कर बोली। पास बैठे सुकेश जी चौंक पड़े.. . बोले “ये बात तो कोई और भी बोला था, कुछ साल पहले…..मुझे छुटकी याद आ गई “।सुकेश जी … Read more

नसीहत जिसने जीना सिखा दिया… – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

आज क्लाइंट की अचानक से मीटिंग होने से रीना को ऑफिस से निकलते रात हो गई, ऑफिस की कार उसे घर तक छोड़ने आई, अपनी बिल्डिंग के नीचे उतरते ही उसे मिसेज वर्मा मिल गई, जो डिनर के बाद वाक कर रही थी,उनके साथ वाक करती सोसाइटी की कुछ और महिलायें भी रीना को देखते … Read more

अड़चने – सीमा बत्रा : Moral Stories in Hindi

सरिता ने जैसे ही अपना फ्लैट खोला तो अंधेरा पसरा हुआ था । रोज तो मंदिर वाले कमरे की लाइट जलती छोडकर जाती है। पर लगता है, आज जल्दी जल्दी में वो भी बंद कर दी थी । यही सोचते हुए सरिता ने अपने मोबाइल की टार्च जलाकर कमरे के कमरे के स्विच बोर्ड की … Read more

जिद – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

मुझे भी किसी हिल स्टेशन पर घुमाने ले चलो मां की दस दिनों से जारी यह जिद समझ से परे थी।पता नहीं अचानक मां पर ये घूमने जाने का भूत कैसे सवार हो गया था लेकिन इस भूत भगाने के चक्कर में पिता जी के सारे तंत्र मंत्र बेकार हुए जा रहे थे। हमेशा की … Read more

अशांति की वजह कही मैं तो नहीं… – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

“ क्या हुआ महेश बाबू..आज फिर से आपका  घर जाने का मन नहीं कर रहा है ?” पार्क में महेश जी को बैठे देख कर उसी अपार्टमेंट में रहने वाले नवल जी ने पूछा  “ क्या ही बताऊँ नवल बाबू… कितना लाचार हो गया हूँ हर दिन घर में अशांति फैली रहती है और इसकी … Read more

जीने का मकसद – वीणा : Moral Stories in Hindi

बनारस स्टेशन के एक कोने में बैठ पार्वती काकी ज़ार ज़ार रोए जा रही थी कि तभी पवन की नजर उन पर पड़ी। वह पास जाकर पूछा– क्या हुआ काकी,क्यों इतना रोए जा रहे हो? कुछ खो गया का? रोते रोते ही काकी ने कहा – सब कुछ तो खो ही गया है बिटवा। जब … Read more

जीत – पूर्णिमा सोनी : Moral Stories in Hindi

” तुम्हें कुछ समझ में नहीं आता है क्या? कितनी देर से चिल्ला रहा हूं मैं, कहां ध्यान है? कितनी लापरवाह हो गई हो तुम, किसी चीज की कोई जिम्मेदारी तुम्हारी भी है? इतना भी नहीं बोल सकी? किस काम की हो आखिर?? तेजप्रताप जी बहुत तेज तेज चिल्ला रहे थे। इतने गुस्से में ,माथे … Read more

मन की अशांति – शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi

माया जी शहर के अशांती भरे माहौल को छोड कर वापस अपने कस्बे जा रही थीं ।शहर की अशांति से तो निकल गई। किन्तु मन की अशांति से कैसे निकले। जो रह-रहकर मन में हूक मार रही थी। बेटे की बातों  ने हृदय छलनी कर दिया। यदि आज  बहू यह सब कहती तो शायद इतना … Read more

error: Content is protected !!