*अंगना का फूल* – बालेश्वर गुप्ता   : Moral Stories in Hindi

  जगरु चाचा आज बेहद खुश थे, उनके पावँ जमीन पर पड़ ही नही रहे थे।अपनी खुशी का इजहार हर किसी को कैसे करे,उन्हें समझ नही आ रहा था।बस हर जानने वाले को रोक लेते और बताने लगते कि उनका मुन्ना आ रहा है, सुना तुमने मुन्ना यही आ रहा है,अब वो मेरे पास ही रहेगा।कहते … Read more

अपना घर अपना घर ही होता है – रिया जैन   : Moral Stories in Hindi

घर, सिर्फ एक भवन नहीं होता; यह वो जगह होती है जहां व्यक्ति खुद को सबसे सुरक्षित और स्नेहभरी भावना से घिरा पाता है। इसका वास्तविक मतलब तब समझ में आता है जब हम घर से दूर होते हैं। मेरा अनुभव भी कुछ ऐसा ही था जब मैं उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहर चली … Read more

ख़ानदान की इज़्ज़त – के कामेश्वरी   : Moral Stories in Hindi

सुप्रिया और स्वाति दोनों एक ही ऑफिस में नौकरी करती थी घर पास होने के कारण साथ में मिलकर ऑफिस जातीं थीं । उनका एक दूसरे के घर आना जाना भी लगा रहता था । सुप्रिया की बेटी मधु और स्वाति की बेटी सविता एक ही कक्षा में पढ़ती थी पर अलग अलग स्कूलों में … Read more

अपना घर: एक सपना और उसकी हकीकत – आँचल शर्मा   : Moral Stories in Hindi

सिद्धार्थ ने हमेशा अपने जीवन में एक सपना देखा था—अपना घर। हर छोटे बड़े पल में, उसने अपने घर का एक सपना संजोया था। वह जानता था कि एक दिन उसका यह सपना पूरा होगा, लेकिन जब भी उसने इस सपने को वास्तविकता में बदलने की बात सोची, एक असहजता उसकी आत्मा को छू जाती … Read more

अपना घर तो अपना ही होता है – लक्ष्मी कानोडिया   : Moral Stories in Hindi

शिखा अपनी पांचो भाई बहनों में सबसे छोटी थी। पहले उसके दो बड़े भाई थे फिर वे तीन बहने थी।  शिखा अपने पांचो भाई बहनों में सबसे लाडली थी। शिखा का अपने भाई बहनों से उम्र में काफी अंतर था। इसलिए उसके सभी भाई बहनों की शादी पहले हो गई थी। शिखा के भाई बहन … Read more

वापस लौट आओ तुम.. – वीणा   : Moral Stories in Hindi

 हाय .आँटी. मैं तरन्नुम, सरला आँटी ने भेजा है मुझे। ओह.. हाँ, मैंने कहा था सरला को। एक्चुअली मेरा पोता है अरमान ,उसकी देखभाल के लिए जरूरत थी मुझे किसी की। पाँच साल का है,दो साल पहले उसकी माँ की एक एक्सीडेंट में डेथ हो गई थी…उसी एक्सीडेंट में मेरी भी स्पाइनल इंजरी हो गई … Read more

अपना घर अपना ही होता है – तृप्ती देव   : Moral Stories in Hindi

गर्मियों की दोपहर थी। सूरज की किरणें तपती धरती को आग के गोले में बदल रही थीं। आंगन में बैठी सुमित्रा बाई के चेहरे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं, पर उनके चेहरे पर एक संतोष की मुस्कान थी। आज उनका बेटा, रवि, जो शहर में नौकरी करता है, कई महीनों बाद घर लौट … Read more

क्या ये सही है ? – संगीता अग्रवाल  : Moral Stories in Hindi

“सविता…सविता कहां हो तुम भई …तौलिया तो लाओ जरा बारिश ने भी हद कर दी जब देखो बरस पड़ती है इंसान काम करे तो कैसे!” दिनेश जी घर में घुसते ही बोले। वो आवाज़ दे पत्नी का इंतज़ार कर रहे थे कि … ” छम…छम…!” अचानक उनके कानों में आवाज़ आईं। ” अरे ये घुंघरू … Read more

अपना घर – भगवती सक्सेना गौड़   : Moral Stories in Hindi

रवीना के रिटायरमेंट का दिन था, फेयरवेल के लिए आफिस आयी थी। माधवी ने आकर गले मे फूलों का हार डाला, और तालियों की गूंज उंसकी आंखों में धुंधलापन ले आयी थी। आफिस के हर कलीग ने उंसकी तारीफ में दो शब्द कहे। फिर सबसे बिदा लेकर वो अपनी कार में घर जाने को बैठ … Read more

खानदान की इज्जत – लक्ष्मी कानोडिया   : Moral Stories in Hindi

कौशल प्रसाद जी शहर में एक बड़े व्यवसाई थे। उनका शहर में जुराबों का कारखाना था। उनके दो बेटी एवं एक बेटा था। एक बेटी की उन्होंने शादी कर दी थी और बेटा बाहर पढ़ने गया हुआ था। उनके इंश्योरेंस आदि के अन्य काम भी चलते रहते थे जिनके कार्य के लिए उनके घर पर … Read more

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