कच्चे धागे-एक पवित्र बंधन (भाग–9) – शशिकांत कुमार : Moral Stories in Hindi

राधिका के शरीर के ऊपर एक तेज रोशनी प्रकाशित हुई और राधिका एक प्रकाश पुंज के आवरण में सुरक्षित हो गई अब राधिका मूर्छित नही बल्कि उसकी पवित्र आत्मा उसके शरीर से बाहर आ गई थी जिसकी सुरक्षा माता वैष्णो देवी खुद कर रही है… और शरीर उसी नग्न अवस्था में उस पूंज के आवरण … Read more

कच्चे धागे-एक पवित्र बंधन (भाग–8) – शशिकांत कुमार : Moral Stories in Hindi

माता आप तो देवकन्या है फिर आप पर उस राक्षस का असर कैसे हुआ ……. (राघव ने बुढिया से पूछा) हा माता ….और आप भी तो माता वैष्णो देवी की एक भक्त ही थी फिर राधिका पर उस राक्षस का असर क्यों नहीं हुआ और आप पर ही क्यों हुआ? ….(यशोदा बोली) हां मुझ पर … Read more

कच्चे धागे-एक पवित्र बंधन (भाग–7) – शशिकांत कुमार : Moral Stories in Hindi

नवल……. आश्चर्य से साध्वी और राधिका एक दूसरे को देखने लगती है हां नवल…(अंबिका जी) इससे आगे वो बड़बड़ाती है की वो रूप बदल कर लड़कियों का शिकार करता है और उसने मुझे भी कही का नही छोड़ा और हसने लगती है साध्वी के लिए ये किसी सदमे से कम नहीं था लेकिन उसके मन … Read more

कच्चे धागे-एक पवित्र बंधन (भाग–6) – शशिकांत कुमार : Moral Stories in Hindi

साध्वी एक देवकन्या थी और उसने एक मनुष्य के साथ अपनी पवित्रता को खोने वाली थी… इधर राधिका उसका इंतजार कर रही थी। राधिका को ऐसा लग रहा था जैसे वो दोनो प्रेम की बाते करने में खोए हुए हो लेकिन उसे ये तनिक भी अंदाजा नहीं था की उसकी संरक्षण में साध्वी नवल के … Read more

कच्चे धागे-एक पवित्र बंधन (भाग–5) – शशिकांत कुमार : Moral Stories in Hindi

एक बार तो नवल के प्राण जैसे हलक से बाहर ही आ गया हो नवल को काटो तो खून नहीं मुझे माफ कर दो… मुझसे गलती हो गई मेरी नजरों से ओझल हो जाओ वर्ना तुम्हारे लिए ठीक नहीं होगा नवल को जैसे एहसास हो गया हो की ये राधिका हो ही नही सकती नवल … Read more

कच्चे धागे-एक पवित्र बंधन (भाग–4) – शशिकांत कुमार : Moral Stories in Hindi

आज से करीब 40 वर्ष पहले वैष्णवी का राधिका के रूप में बैकुंठी गांव में जन्म हुआ था उसके पिता का नाम रामेश्वर पांडे था और माता अंबिका देवी । राधिका का एक छोटा भाई नारायण था जिसे राधिका बहुत प्यार करती थी और छोटा भाई भी अपनी बहन से ज्यादा लगाव रखता था । … Read more

कच्चे धागे-एक पवित्र बंधन (भाग–3) – शशिकांत कुमार : Moral Stories in Hindi

जैसे ही वैष्णवी ने मोहन काका आवाज लगाई राघव ने बुढिया द्वारा दी गई साड़ी के किनारे को वैष्णवी के माथे पर लगाया जिससे वैष्णवी शांत पड़ गई। बिलकुल वैसे ही जैसे मंदिर में माता वैष्णो देवी के पास ले जाकर हुई थी… राघव और यशोदा बिलकुल अचंभित थे ऐसा कैसे हो सकता है बिलकुल … Read more

वह हरी साडी़ – डाॅ उर्मिला सिन्हा  : Moral Stories in Hindi

सावन का रिमझिम प्रारंभ हुआ… तन-मन भींगा-भींगा…हरी-भरी धरती संग उल्लसित जनसमुदाय।  इधर सावन महीने में सावन महोत्सव मनाने की तैयारी महाविद्यालय में चल रही थी। सभी को हरे रंग की साडी़   चूड़ियाँ  हाथों में मेंहदी लगाकर जाना था।उससे संबंधित  शिक्षिकायें और छात्रायें बडी़ जोर-शोर से तैयारी  कर रही थी। हमलोगों ने छात्राओं के लिये … Read more

अपना घर अपना ही होता है – हेमलता गुप्ता  : Moral Stories in Hindi

मम्मी.. हम अपने घर कब चलेंगे..? अभी तो कल की शादी है और आप हमें तीन दिन पहले ही यहां ले आई ?क्या बात है बेटा.. क्या तुम्हारा शादी में मन नहीं लग रहा? देखो कितने सारे रिश्तेदार आए हुए हैं, ताऊ जी चाचा बुआ उनके बच्चे सब तुम्हारे बराबर है फिर भी अपने घर … Read more

आईना – अर्चना कोहली ‘अर्चि’  : Moral Stories in Hindi

शाम चार से छह बजे तक महेश जी दुकान बंद करते हैं। आज दुकान से आकर लंच करने के बाद वाशबेसिन में हाथ धो ही रहे थे कि कॉलबेल बजी। महेश ने तौलिए से हाथ पोंछ कर दरवाज़ा खोला तो भैया-भाभी थे। “अरे, भैया-भाभी आप अचानक! आज इतने सालों बाद मेरी याद कैसे आ गई। … Read more

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