खानदान की इज्जत बेटी नहीं बेटे के हाथ में भी होती है। – अर्चना खंडेलवाल   : Moral Stories in Hindi

आज वर्मा परिवार में रौनक लगी थी, उनकी बेटी सलोनी की सगाई का समारोह था, पूरा घर फूलों से महक रहा था, सबके चेहरे खुशी से चमक रहे थे, बड़ी मुश्किलों से सलोनी का रिश्ता हुआ था।  शशि जी अपनी पोती की बलाइयां ले रही थी, और बीना जी अपनी बेटी की नजर उतार रही … Read more

ख़ानदान की इज़्ज़त – करुणा मलिक    : Moral Stories in Hindi

बहनजी…… ये तुम्हारी जेठानी कहाँ गई , पिछले चार दिन से दूध ना ले रही…कभी किसी को…. कभी किसी को, दूध देना पड़ रहा है । क़रीब अठारह-बीस साल से दूध दे रहा हूँ पर पहली बार ऐसा हुआ कि दरवाज़े पर ताला लटका है ….. तुम्हें भी ना पता क्या , कहाँ गई ? … Read more

मायके का मोह –  विभा गुप्ता   : Moral Stories in Hindi

    ” राजन..तुमने पापा से बात किया.. क्या कहा उन्होंने ..I know, मना नहीं करेंगे।”     ” रिया..माँ कह रहीं थी कि…।”    ” माँ को तो मैं मना लूँगी…अभी डैड को कह देती हूँ कि हम कल वहाँ शिफ़्ट कर रहें हैं..मैं सामान लेकर सुबह चली जाऊँगी और तुम ऑफ़िस से सीधे वहीं आ जाना।” कह कर … Read more

सलाह – पुष्पा कुमारी “पुष्प”   : Moral Stories in Hindi

“बेटा!.मेरे चश्मे का शीशा टूट गया है,.इसे रख लो! दफ्तर जाते वक्त बनवा देना!” राजिव की मांँ अंजना जी अपना चश्मा वहीं टेबल पर रख कर अपने कमरे के भीतर चली गई। दफ्तर जाने के लिए तैयार हो रहा राजीव अपनी मांँ का टूटा हुआ चश्मा उठाकर अपनी शर्ट की ऊपर वाली जेब में रख … Read more

अपनापन का ढोंग क्यों ..? – अर्चना सिंह   : Moral Stories in Hindi

दो दिन से छाया बाजार करने में व्यस्त थी । काफी महीनों से घर में पूजा कराने को सोच रही थी । पर योजना बनाये गए कार्य अक्सर सफल नहीं ही होते हैं । कभी किसी रिश्तेदार की मौत, कभी उसके बच्चों की छुट्टी नहीं कभी कार्यक्षेत्र में कार्यभार ज्यादा आदि । हद तो तब … Read more

अपना घर अपना घर ही होता है। – मधु वशिष्ठ   : Moral Stories in Hindi

अपना घर अपना घर ही होता है। नीता मन ही मन यूं ही बड़बड़ा रही थी, लड़कियों का तो कोई घर ही नहीं होता मां कहती थी की ससुराल ही तुम्हारा घर है और यहां हाल देखो?  लगभग एक सप्ताह होने को आया, सासु मां की तबीयत ज्यादा खराब होने के कारण वह तो बिस्तर … Read more

खानदान की इज्जत… – रश्मि झा मिश्रा   : Moral Stories in Hindi

“दुनिया में और कोई काम नहीं बचा… कोई कोर्स नहीं रह गया करने को… ले देकर तुम लोगों की सुई वहीं अटक जाती है… अरे भाई कुछ नाम कमाने वाला हुनर सीखो ना… सिखना ही है अगर तो… नहीं तो बैठो घर… पढ़ाई लिखाई खत्म हो गई… ब्याह की जिम्मेदारी मेरी है… मैं ढूंढ रहा … Read more

कच्चे धागे-एक पवित्र बंधन ( अंतिम भाग ) – शशिकांत कुमार : Moral Stories in Hindi

इधर राघव और यशोदा दोनो कुछ देर बाद बैकुंठी गांव पहुंचे और सबसे पूछते हुए रामेश्वर जी घर पहुंचे …. कौन? एक अधेड़ वायक्ति उम्र करीब 50,55 के बीच का घर के दरवाजे से ही पूछता है राघव और यशोदा दोनो इस व्यक्ति को देखकर नमस्ते करते है तो वो व्यक्ति उन दोनो को अंदर … Read more

कच्चे धागे-एक पवित्र बंधन (भाग–12) – शशिकांत कुमार : Moral Stories in Hindi

उस रोशनी के पीछे कोई और नही बल्कि स्वयं माता वैष्णो देवी थी और केवल देवकन्या और वैष्णवी को दिखाई दे रही थी बाकी यशोदा और राघव उनको देख पाने में असमर्थ थे। देवकन्या ने माता को प्रणाम किया और पूछी … माता आपने मुझे रूप बदलने की शक्ति से वंचित कर रखा था फिर … Read more

कच्चे धागे-एक पवित्र बंधन (भाग–11) – शशिकांत कुमार : Moral Stories in Hindi

एक बहुत ही सुंदर करीब 30 वर्ष की कुमारी कन्या उसके सामने जिसके पूरे शरीर के चारो तरफ एक दैवीय औरा चमक रहा था… ऐसा लग रहा था जैसे मानो देवलोक से कोई परी उसके सामने उतर आयी हो आ..आ ..आप कौन है? (यशोदा बोली) मैं तुम्हारी बुढ़िया माता न …न… नही ऐसा कैसे हो … Read more

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