बहन तो बहन ही होती है – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय  : Moral Stories in Hindi

“शशांक रिद्धि आने वाली है रक्षाबंधन पर! कितने दिन हो गए हैं उसे देखे हुए! ये रक्षाबंधन तो खिल ही उठेगा उसके आने से।” मां ने खुशी से यह खबर सुनाते हुए कहा तो एकबारगी से मैं जितना खुश हुआ उतना ही शौक्ड भी। तबतक सुधा तीन कप चाय लेकर आई और कहा “अम्मा जी … Read more

प्यार का बंधन – कमलेश आहूजा : Moral Stories in Hindi

हमेशा की तरह सरोज के भाई का इस बार भी राखी का पांच सौ रुपए का मनीऑडर आ गया।ना ही उसने कोई फोन किया,कि दीदी तुम्हारी राखी मिल गई थी ना ही उसकी कोई चिट्ठी आई।सरोज की आँखें फिर से नम हो गईं। माता पिता के जाने के बाद सरोज के छोटे भाई साहिल ने … Read more

अवसरवादी बहन – शुभ्रा बैनर्जी : Moral Stories in Hindi

इस बार रीना ने मंझली बहन शिवानी और छोटी बहन रिया को पहले से बोल दिया था भाई के घर राखी में चलने के लिए।मां के जाने के बाद सभी भाई-बहन रीना के घर ही आते थे हर त्योहार में।बड़ा भाई रीना से छोटा,बाकी भाई बहनों में बड़ा था।इस बार राखी के महीने भर पहले … Read more

*फटे में टांग अड़ाना* – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

    हरिया आज फिर मेरे पास आया और फिर पुरानी व्यथा सुनाने लगा कि कैसे उसका भाई और भतीजा उसके जमीन के चक को हड़पने की चाल चल रहे है।मेरी समझ नही आ रहा था कैसे उसकी मदद करूँ?फिर भी मुझे उसकी बात सुन उससे सहानुभूति होती।       एक दिन मैं स्वयं गावँ के पटवारी के पास … Read more

*समय चक्र* – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

  रोशन लाल एक मेहनती और ईमानदार व्यक्ति थे।उनके दो बेटे थे-रमाकांत और सूर्यकांत।सामान्य सी परचून की दुकान से रोशन लाल ने अपने दोनो बेटों की अच्छी परवरिश की और उनकी पढ़ाई लिखाई में कोई कमी न आने दी।दोनो बेटे अपने पिता की मेहनत लगन से अनभिज्ञ तो थे नही,सो पढ़ाई से बचे समय मे पिता … Read more

अहसास – सरिता गर्ग ‘सरि’ : Moral Stories in Hindi

  कैसा खूबसूरत था वह दिन जब धरती का चाँद अपनी धड़कनें समेटे मेरे आँगन में उतरा था , मगर मेरा दुर्भाग्य मुझसे दस कदम आगे चल रहा था। मैं नहीं जानता था सुख के मुट्ठी भर पल ही  मेरे हिस्से में आने हैं।                  तुम मुझे छोड़ कर चली गईं। लाल साड़ी में लिपटा तुम्हारा निष्प्राण … Read more

वो कुछ पल का साथ – सरिता गर्ग ‘सरि’ : Moral Stories in Hindi

यह कैसी सुबह आई जो मुझ पर विपदा का पहाड़ तोड़ गई। जोर से दरवाजा पीटे जाने की आवाज से मेरी नींद खुली । रात को देर तक पीहू के साथ चैट की थी, सुबह जल्दी नींद नहीं खुली थी हड़बड़ा कर दरवाजा खोला तो सामने मेरा दोस्त निहाल घबराया सा खड़ा था। उसने अटकते … Read more

और फिर अंधेरा सिमट गया – सरिता गर्ग ‘सरि’ : Moral Stories in Hindi

वक्त के थपेड़े खाती नदीम की टूटी कश्ती सी जिंदगी ,निरुद्देश्य बही जा रही थी।जीवन में उत्साह ,उमंग कुछ भी तो नहीं था। कभी कभी  नियति इंसान के साथ कितना क्रूर मजाक कर देती है।           नदीम कोमल हृदय का भावुक इंसान था। पड़ोस में ही माँ की एक सहेली थी, जो काफी बीमार थी। अपने … Read more

हीरे की कनी – सरिता गर्ग ‘सरि’ : Moral Stories in Hindi

अधरों पर निर्झर सी मुस्कान भरे, चंचल हिरणी सी कुलांचे भरती ,कौन जाने कब,कहाँ से प्रकट हो जाती और सब उसे देखते रह जाते। जाने कैसा वशीकरण था उन आँखों में , सीधी दिल में उतर जाती और उसके आकर्षण में बंधे सब उसके गुलाम हो जाते।   वह झरनों का संगीत थी ,बहती धारा थी, … Read more

डर के आगे जीत! – सारिका चौरसिया : Moral Stories in Hindi

घर के सामने सड़क के उस पार छत पर दोनों प्यारे भाई बहन खेल रहे थे लगभग पाँच और तीन वर्ष की उम्र के दोनों बच्चे बड़े ही चुलबुले पर मासूम है, प्यारी सी वो बच्ची जब गाय को रोटी खिलाने अपने दादा के पीछे निकलती है तो बड़ा मजेदार से दृश्य रहता है,उसे गाय … Read more

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