“मन-आंगन ” – कुमुद मोहन   : Moral Stories in Hindi

आज मेरे पास अपना खूबसूरत सा आशियाना है ,सब सुख सुविधाऐं हैं!बेहद प्यार करने वाला ससुराल है,नाज नखरे उठाने वाला हमसफ़र है!नौकर-चाकर घोड़ा गाड़ी सबकुछ है! फिर भी मेरे मन का मयूर गाहे-बगाहे ससुराल की जिम्मेदारियों को छोड़,रीति-रिवाजों के बंधन तोड़ मायके की चौखट लांघ बाबुल के आंगन में उन खट्टी मीठी यादों का चुग्गा … Read more

बाबुल – अयोध्याप्रसाद उपाध्याय   : Moral Stories in Hindi

मेरी मुन्नी को बाबुल की दुआएं कोई काम नहीं आई कह कह कर रो रहे थे और माथा पीट रहे थे। अचानक उनको रोते हुए देख सुन कर आस-पास के लोग एकत्र हो गये। सबके सब ऐसा देखकर हतप्रभ थे। आखिरकार क्या हो गया? उजड़ गया —-उजड़ गया, मेरी मुन्नी का सुहाग उजड़ गया। हे … Read more

बाबुल – उमा वर्मा   : Moral Stories in Hindi

मृत्यु शय्या पर पड़ी हुई हूँ ।डाक्टर ने जवाब दे दिया है ।उम्र भी तो हो ही गई है ।थोड़ा बहुत खाना खा लेती हूँ वह भी किसी की सहायता से ।कानों में बार बार के एल सहगल के गीत गूँजने लगते हैं ” बाबुल मोरा, नैहर छूटो जाय —” कौन सा नैहर? जो अब … Read more

बाबुल के आंगन की लक्ष्मी – बीना शर्मा   : Moral Stories in Hindi

सुबह के वक्त मेघा बहुत प्यारा सपना देख रही थी। सपने में उसकी मम्मी उसे गोद में लेकर बहुत प्यार कर रही थी। वह मीठे सपनों में खोई हुई थी कि तभी उसके कानों में उसकी सौतेली मां की आवाज आई “अरी बदनसीब सोती ही रहेगी क्या? चल जल्दी से उठ कर घर में झाड़ू … Read more

बहू मौका तो उन्हें दिया जाता है जो सच बोलते हैं – बीना शर्मा   : Moral Stories in Hindi

श्यामली अपनी सास निर्मला को खाना खिला कर उनके बर्तन उठाने ही वाली थी कि तभी उसके बेटे अरुण ने अपने मोबाइल से अचानक अपनी मम्मी और दादी की फोटो खींच ली। बेटे को फोटो खींचते देखकर श्यामली थोड़े गुस्से में बोली” तुमने मेरी फोटो क्यों ली सुबह से काम करते-करते मेरा चेहरा कितना खराब … Read more

घमंड का सर नीचा – — नेकराम   : Moral Stories in Hindi

सुंदर हूं तो अपनी सुंदरता दिखाती हूं ,, तुझे क्यों जलन हो रही है ,, तू भी आधे कपड़े पहन ले ,, तुझे किसने रोका है रीता ने अपनी बहन छबीली से थोड़ा ऊंचे लहजे में कहा — रीता और छबीली 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली के विश्वविद्यालय करोड़ीमल कॉलेज में … Read more

बाबुल का प्रेम – शिखा श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

“बधाई हो, बधाई हो, मीठी को पाँचवे जन्मदिन की बधाई हो…” घर के हर सदस्य के होंठो पर आज सुबह से यही पँक्तियाँ थिरक रही थीं। आख़िर हो भी क्यों न, आज सबकी लाडली, सबकी दुलारी, घर की सबसे छोटी सदस्य मीठी की पाँचवी सालगिरह जो थी। मीठी की माँ नंदिता और पापा नीरज के … Read more

जाना ना बाबूजी – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

घर का ग़मगीन माहौल एहसास करवा रहा था कि आज फिर माँ अपने बाबुल की घर की गलियों को याद कर रही है…उनका अपने बाबूजी से प्रेम मैं बचपन से देखती आ रही थी और आज वो अपने बाबूजी को याद कर कर के रो रही है….आज नाना जी की पहली बरसी है। माँ सुबह … Read more

मन बनाकर मन मारना अच्छा नहीं लगता – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

” राशि राशि कहा हो यार जल्दी से आओ ।” ऑफिस से आते ही निकुंज अपने कमरे में जाकर राशि को जोर जोर से आवाज़ देकर बुलाने लगा “ आ रही हूँ बाबा पता ही है डिनर बना रही होती इस वक़्त फिर भी पूछ रहे हो कहाँ हो?” राशि भीगे हाथ तौलिए में पोंछते … Read more

देर आए दुरुस्त आए – संगीता त्रिपाठी  : Moral Stories in Hindi

घंटी की तेज आवाज सुन गीता की नींद टूट गई, इस समय कौन आया होगा सोच दरवाजा खोलने चली गई, दरवाजा खोलते ही आश्चर्यचकित हो गई। सामने गोद में कम्बल में लपेटे गिन्नी को लिये नील और नेहा खड़े थे। चेहरे की रंगत ही बता रही दोनों कई दिनों से ठीक से सोये नहीं।दोनों की … Read more

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