बाबुल की गलियां – शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi

रिया की उम्र करीब पैंतालीस हो गई थी वह स्वयं दो प्यारे से बच्चों की माँ बन गई थी किन्तु अभी भी मायके की याद आते ही उसका मन विचलित हो उठता। बार-बार वह बाबूल के घर, उन गलीयों में स्कूल की यादों में खो जाती और वहां  जा कर एक बार फिर से उन्हें … Read more

एक बेटे का क्या देखा ? – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

अम्मा, आज तो सुबह से ही बहू का जी ठीक नहीं….. क्या पता , रात को ही अस्पताल ना जाना पड़ जाए …. आप क्या कह रही थी कि अस्पताल जाने से पहले क्या करना है? मैं कह रही थी कि एक साड़ी और कुछ रुपये गरिमा के हाथ से कुलदेवी का नाम लेकर मंदिर … Read more

वो देहरी… – कविता झा ‘अविका’ : Moral Stories in Hindi

मांँ के पास आए हुए रिती को एक महीना पूरा होने को था और उसकी वापसी का समय भी नजदीक था। अगले ही दिन की ट्रेन थी। स्कूल की छुट्टियांँ खत्म हो गई थी तो अब वापस जाना जरूरी था वरना प्राइवेट स्कूल वाले टीचर को छुट्टी कहांँ देते हैं। रिती अपने पिता के समझाने … Read more

बाबुल का आंगन – रश्मि झा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

“आज तक कौन सा सुख पाया मेरी बेटी ने… अपने बाबुल के घर में… जो उसे यहां की याद आएगी… क्यों आएगी…!” बोलकर रविंद्र जी एक ठंडी आह भरकर बिस्तर पर लेट गए…  पूरे एक साल हो गए थे वसुधा के ब्याह को… मगर इन एक सालों में कभी घूम कर वह बाबुल के आंगन … Read more

सास तो हो मगर गरीब मायके की बेटी की – स्वाति जैन : Moral Stories in Hindi

 मम्मी जी मैं अपने मायके से भर भर के सोना लाई हूं समझी मुझे कुछ बोलने से पहले सोच लीजिएगा।  अब इस घर की मालकिन मैं हूं आप नहीं, रीमा अपनी सांस गीता जी से बोली, गीता जी बोली, “भगवान से डरो बहू रोज सुबह से शाम तक सुनाती रहती हो जरा तो मेरी इज्जत … Read more

बाबुल का फ़र्ज़ – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

  दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली नयना ने अपने कंधे पर स्कूल बैग डाला और ड्राइंग रूम में सोफ़े पर बैठे हिसाब करते हुए अपने भाई प्रशांत को ‘बाय भइया’ कहकर स्कूल के लिये निकलने लगी तो उसकी माँ सरोजनी बोलीं,” रुक…टिफ़िन तो लेती जा..।    ” कैंटिन में खा लूँगी माँ…।” कहकर वह बाहर निकल गई।तब … Read more

जो रिश्ता विपत्ति बाँटने के लिए बनाया जाता हैं वह ख़ुद संम्पत्ति बाँटने के चक्कर में बंट जाता हैं… – संध्या सिन्हा : Moral Stories in Hindi

आख़िरकार आज आँगन में दीवार उठ ही गयी। “कृष्ण-लीला सदन” नाम की बहुत ही बड़ी और सुंदर कोठी थी यह अपने शहर प्रयागराज की।श्यामजी अग्रवाल ने बड़े जतन से इस कोठी का निर्माण करवाया था और अपने माँ-पिता के नाम पर नाम रखा “कृष्ण-लीला-सदन”। माँ का नाम लीला और पिता का नाम कृष्ण था।कृष्णकांत जी … Read more

पहेली – संध्या त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

      कमली , कल बहू को जरा आलता तो लगा देना…. वो मायके जाएगी और तू घर जाते-जाते रास्ते में पार्लर वाली को बोलते जाना… अच्छा तू रहने दे , मैं ही फोन कर बुला लूंगी …थोड़ा मेहंदी भी लगा देगी मानसी ने सहायिका कमली से कहा…।      और आकर डाइनिंग टेबल के कुर्सी में बैठ गई … Read more

अब तो तुम शादी कर लो – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

पीहू की पढाई ख़त्म होते ही, सारे मित्र, रिश्तेदार पीछे पड़ गये अब क्या करना है? अब तो इसकी शादी कर ही दो। साधना जी बहुत परेशान हो गईं सबकी मुफ्त की सलाह से| आते-जाते लोग बाग रिश्ता भी बता जाते। पीहू से भी वो कहीं भी जाये शादी ब्याह में लोग कहते अब तो … Read more

बाबुल का घर आज भी तुम्हारा है कल भी तुम्हारा रहेगा – रोनिता कुंडु : Moral Stories in Hindi

बेटा… तुम्हें यह रिश्ता पसंद है ना..? किसी भी नतीजे पर आने से पहले तुम्हारी रजामंदी जरूरी हैं.. सोहन जी ने अपनी बेटी कविता से कहा कविता:   पापा..! यूं एक दिन में कैसे जान सकती हूं किसी के बारे में..? मेरा मतलब कल ही वे लोग रिश्ता लेकर आए और आज उसके बारे में … Read more

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