डिग्री – शिखा जैन  : Moral Stories in Hindi

पूरा ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज रहा था।विद्यालय का वार्षिकोत्सव था।और प्रथम आने वाले बच्चों के नाम घोषित किए जा रहे थे। “राहुल शर्मा, 12वीं अ ” अंत मे विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थी का नाम घोषित किया गया। तालियों की गड़गड़ाहट में दो हाथ ऐसे भी थे जो ताली बजाते … Read more

क्या सितम है कि हम लोग मर जायेंगे. – कंचन सिंह चौहान : Moral Stories in Hindi

सुबह 6 बजे से यह शेर गूँज रहा है दिल-ओ-ज़ेहन में.  अम्मा और मौसी यूँ किसी देश, किसी शहर तो छोड़िये किसी गाँव के भी इतिहास में इनका नाम दर्ज़ होने वाला नहीं. लेकिन ये दोनों अपने पिता द्वारा किये गये ‘गिलहरी प्रयास’ का  सफल रूप रहीं. उनके पिता यानी नाना जी. नाना जी जब … Read more

अव्यक्त एहसास – पूनम शर्मा : Moral Stories in Hindi

किताब कॉपी के बीच घिरा विदग्ध, मैथ के सवाल में उलझा हुआ था, कि अचानक दरवाजे पर खटखट की आवाज़ सुनकर उसकी एकाग्रता भंग हो गई।  वह लापरवाही से उठकर दरवाजे की ओर बढ़कर दरवाजा खोला।  सामने डाकिया लिफाफा लिए खड़ा था।  ‘विदग्ध मिश्रा कौन है?’ -डाकिया ने पूछा। ‘जी, मैं ही हूंँ ‘- कहते … Read more

खुशियों की दिवाली – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

शशांक दिवाली आने वाली है, तुम्हारी नौकरी भी नही है… इस बार सब कैसे करना है ” श्रुति ने अपने पति से पूछा। ” श्रुति मैं खुद नही समझ पा रहा हर साल दोस्तों को उपहार देते थे इस बार अकेले तुम्हारी तनख़्वाह से घर चल रहा वही बहुत है । ” शशांक ने रूआसा … Read more

खुशियों के दीप जल उठे – गीता वाधवानी : Moral Stories in Hindi

आज गीतिका जी बहुत खुश थी। उसकी बहू मिताली ने मंदिर से आते ही खुशखबरी सुनाई थी कि मम्मी जी आप दादी बनने वाली हो।    उसका नन्हा मुन्ना बेटा खुश आज इतना बड़ा हो गया है कि वह पापा बनने वाला है। कितने साल बीत गए उसके पति के गुजरने के बाद तो जैसे खुशियों … Read more

मनोकामना – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

सिद्धांत! मैं कितनी खुश हूँ, बता नहीं सकती…. अच्छा….. हमें भी तो पता चले तुम्हारी ख़ुशी का  ?  भाई दूज पर भइया- भाभी दोनों हमारे पास आ रहे हैं, अभी-अभी भाभी का फ़ोन आया था । शादी के बाद मेरी पहली भाई – दूज है । पहले मैंने सोचा था कि हम जाएँगे पर आज … Read more

बेटे की खुशी – पुष्पा जोशी : Moral Stories in Hindi

    शामराव जी अपने घर की बालकनी में कुर्सी लगाकर बैठे थे, दो दिन के बाद दीपावली का त्यौहार था। पूरे घर पर रोशनाई लगवाई थी। मिट्टी के दिए भी मंगवा कर रखे थे, उन्हें यही लगता था कि मिट्टी के दियों को जलाए बिना कैसी दीपावली। दरअसल वे इन दिओ को जलाकर अपने पैतृक गाँव … Read more

सिंदूर खुशहाल जिंदगी का प्रमाण नहीं होता – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

मर क्यों नहीं जाते तुम,कम से कम तुम्हारे न रहने पर हमारी और हमारे बच्चों की जिंदगी तो आसान हो जाएगी।छाती पर मूंग दल रहा है ।सब पैसा गांठ में बांधकर रखें रहता है बुड्ढा और घर में हमलोग एक एक पैसे को परेशान होते हैं ।यह रोज की बात थी मिस्टर और मिसेज शर्मा … Read more

समरस दीवाली – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

            मेरे पिताजी ईंटो के भट्टो का कारोबार करते थे।सामान्यतः भट्टो पर कार्य विजयदशमी के बाद से प्रारंभ होता है।हालांकि कम पूंजी वाले अपने भट्टो का कार्य दिसंबर- जनवरी में भी शुरू कर लेते हैं।इसके लिये पहले से लेबर का प्रबंध करना होता है।लेबर भट्टे पर फुकायी शुरू होने की दिनांक से लगभग एक माह पूर्व … Read more

पश्चाताप के आशु – मनीषा सिंह : Moral Stories in Hindi

“एक चुटकी सिंदूर की कीमत तुम क्या जानो रामबाबू”” लाखों में कोई एक सुहागन सदा सुहागन रहता है” “चांद सितारों से मांग सदा भरी रहे” जाने और भी कई डायलॉग थे— जो आज मुझे याद आ रहे थे — । “मेरी आंखों से लगातार “आशु ” निकलते जा रहे थे और  मैं चाह कर भी … Read more

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