Top Ten Shorts Story in Hindi – हिन्दी लघुकथा

भरोसा – बेला  अमेरिका से पियूष अपनी माँ को वृद्धाश्रम में से वापिस अमेरिका ले जाने आया था, बेटे की बात पर भरोसा कर वह जाने के लिए तैयार हो गई, तभी पियूष ने अपनी बैग में से कुछ प्रॉपर्टी के पेपर्स निकाले और बातों बातों में माँ से पेपर्स पर दस्तख़त करवा लिए। सुबह … Read more

विपत्ति में साथ देना – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

समधी जी आप शादी मत तोडना मैं बहुत बड़ी मुसीबत  फंस गया हूं।बारात वापस चली गई तो बेटी की बहुत बदनामी हो जाएगी ।मैं धीरे धीरे सब भरपाई कर दूंगा विनोद जी ने समधी सुभाष जी के पांव पकड़ लिए । अरे अरे विनोद जी ये आप क्या कह रहे हैं सबकुछ ठीक तो है … Read more

भोज – अमोघ अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

“श्राद्ध ख़त्म होने वाले हैं, नवरात्रि लगने वाली है।” खुद से ही बात करती बूढ़ी गंगूबाई बिस्तर पर बैठ कर बड़बड़ा रही थी। तभी पोती पीहू आकर गंगूबाई के पास आकर बैठ गई। बोली “दादी क्या हुआ?” “कुछ नहीं, जाकर अपनी मां को बुला ला।” पीहू दौड़कर पुष्पा को बुला लाई। “अरी ओ पुष्पा, कुछ … Read more

स्वयंसिद्धा – निभा राजीव निर्वी : Moral Stories in Hindi

विवाह की रौनक पूरे घर से छलकी पड़ रही थी। पूरा घर रिश्तेदारों से भरा पड़ा था। उत्सव का सा वातावरण हो आया था। वंदिता जी का उत्साह तो देखते ही बन रहा था, उनकी इकलौती बिटिया दुल्हन बनने जा रही थी। इस दिन को देखने के लिए उनके नयन न जाने कब से तरसे … Read more

सिर्फ बहू से बेटी बनने की उम्मीद क्यों??? – सविता गोयल : Moral Stories in Hindi

” कैसी हो मां ? ,, कावेरी ने फोन पर अपनी मां सरिता जी से पूछा । ” ठीक हूं बेटा । ,, बुझे स्वर में सरिता जी बोलीं । ” क्या हुआ मां ,आप कुछ परेशान लग रही हैं , घर पर सब ठीक है ना , भाई भाभी, पापा। सब ठीक हैं ना … Read more

तुम ऐसे तो ना थे – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

घड़ी की सुइयों के साथ साथ आज अवन्ति के हाथ भी जल्दी जल्दी काम कर रहे थे ।काम ख़त्म कर घर से निकलते हुए अपनी माँ से बोली ,”मैंने सब कुछ तैयार कर दिया है , तुम और पापा वक़्त पर खाना खा लेना और दवाइयाँ भी याद से ले लेना।” तभी माँ ने आवाज़ … Read more

पराये धन की रौनक… – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

बेटियां तो पराया धन होती हैं… हर लड़की ये सुनते सुनते बड़ी हो जाती हैं और एक दिन पराया धन बन चली जाती दूसरे की तिजोरी में…..उनलोगो ने संभाल कर रखा तो अहो भाग्य… और नहीं संभाला तो हतभाग्य … पर क्या किसी के जिगर का टुकड़ा पराया धन हो सकता  हैं …                          ना … Read more

सौभाग्यवती – उमा वर्मा : Moral Stories in Hindi

।आज सुबह सुबह ही  मालूम हुआ कि काकी चली गई ।मन बहुत उदास हो गया ।काकी का सबके लिए, हर पर्व त्योहार, जन्म दिन, विवाह की वर्षगांठ पर रटा रटाया आशीर्वाद रहता-” सौभाग्य वती भव” चाहे अपना हो या पराया ।काकी ने कभी किसी से भेदभाव नहीं किया ।वह थी तो उड़िया ,लेकिन कोशिश करके … Read more

अहमियत – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

“मम्मीजी,आज फ्रेंडशिप डे पर हम सभी फ्रेंड्स का मूवी और डिनर का प्रोग्राम है। मैं जाऊॅं ना? स्नेहा ने आशा भरी नजरों से मालती जी की ओर देखते हुए पूछा। “कबतक आ जाओगी?” “जी, रात में 9:30 बजे तक आ जाऊॅंगी।” “इतनी देर रात तक अकेले बाहर रहना घर की बहू-बेटियों को शोभा नहीं देता। … Read more

चाभियों का गुच्छा – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

“ ये क्या कर रही है सुनंदा बहू… अभी आते ही घर की ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की बड़ी जल्दी है तुम्हें जो अपनी तिजोरी की चाभियों का गुच्छा राशि को सौंप रही है।” चाची सास की आवाज़ सुन सुनंदा जी सकपका गई “ क्या हुआ चाची जी हमारे घर की ही तो परम्परा निभा … Read more

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