सुलोचना मां – गीतू महाजन’ : Moral Stories in Hindi

सुबह से ही व्यस्त सुलोचना जी सारे कामों की निगरानी अच्छे से कर रही थी।बार-बार घड़ी की और देखते उनकी नज़र मेहमानों की लिस्ट पर भी बहुत बार घूम चुकी थी।’कैसे होगा सब’ यही सोचकर उनके हाथ और तेज़ी से कम कर रहे थे।हालांकि..बच्चे कई बार फोन पर कह चुके थे कि उनकी सारी तैयारी … Read more

“अगला जन्म किसने देखा?” – दीपा माथुर : Moral Stories in Hindi

जूही ने खिड़की के बाहर झाँकते हुए गहरी सांस ली। हल्की ठंडी हवा उसके चेहरे से टकराई, पर मन में उठते सवालों की गर्मी कम नहीं हुई। उसने मन ही मन सोचा—क्यों जन्मों की आस लगाए बैठे हैं हम? जब ये जीवन हमारे पास है, तो उसी में खुशियां क्यों न तलाशें? संबंधों की चमक … Read more

ननद भाभी तो सहेलियां होती हैं – प्रतिभा भारद्वाज ‘प्रभा’ : Moral Stories in Hindi

“भाभी!…आप गईं नहीं अभी तक…. मैंने आपसे कहा तो था फोन पर कि आप निकल जाना मुझे आने में देर हो जाएगी….” अंजली ने अपनी भाभी कामिनी से कहा। “अरे तो चली जाएगी….पूरा दिन पड़ा है….तू तो अब आई है सुबह से….अब ऐसे भला अच्छा लगता है कि बहन बेटी घर आएं तो घर की … Read more

संस्कार – राजेश इसरानी : Moral Stories in Hindi

नई नई बहु आई थी हमारे घर में। उसके पति से लेकर सास, नंनद, और घर के सभी बच्चे बहु के आगे पीछे घूम रहे थे। बहु थोड़ी परेशान सी नजर आ रही थी। तो मैने उससे कहा बेटा थोड़ा आराम कर लो अपने कमरे में चले जाओ। नहीं पापाजी ऐसी कोई बात नहीं है। … Read more

स्नेह का बंधन – प्रतिमा श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

राधा और गुंजन का खून का रिश्ता नहीं था लेकिन ऐसा रिश्ता था जो हर किसी के मन में चाहत लाता था कि काश! गुंजन जैसी बेटी ईश्वर सबको देता। गुंजन राधा के घर काम करने वाली सेविका की बेटी थी। बेटे की चाहत में जब चौथी बेटी के रूप में गुंजन का जन्म हुआ … Read more

परसम्मान ही स्वसम्मान – रश्मि सिंह : Moral Stories in Hindi

दफ्तर के खुलने का समय हो चुका है, सब अपने कंप्यूटर्स ऑन कर रहे है । शिशिर-रवि अयोध्या परियोजना से व्यय की जो स्टेटमेंट आनी थी आ गई क्या ? रवि (हँसते हुए)-सर मेल तो आ गया है पर उसमे अटैचमेंट ग़लत लगा दी है ।  शिशिर-उन्हें रिप्लाई कर इन्फॉर्म करो। शिशिर के जाते ही … Read more

बच्चों का इंतजार – जया शर्मा प्रियंवदा : Moral Stories in Hindi

दशहरे की छुट्टियों में बच्चों को साथ लेकर आने का वायदा किया था ,अंकित ने । मिश्रा दंपत्ति बहुत खुश थे। कुछ दिनों के लिए ही सही, घर के एकान्त को चीरने के लिए रौनक आ रही है । बहुत बड़ा घर बनाते हुए ,एक सपना पाल लिया था ,मिश्रा जी ने । दोनों बहुओं … Read more

दिखावा हार गया – जया शर्मा प्रियंवदा : Moral Stories in Hindi

सूरज और किशोर बचपन से ही एक साथ ही खेलकूद कर बड़े हुए। दोनों के ही परिवार शुरू से ही एक दूसरे के सुख दुख में साथ रहते हुए, एक अच्छे पड़ोसी होने का धर्म निभाते रहे । सूरज और किशोर की उम्र बराबर होने के कारण ,दोनों दिनभर एक साथ खेलते रहते । सूरज … Read more

सच्चे रिश्तों की पहचान – सीमा शर्मा : Moral Stories in Hindi

दीपक जी खाना खाकर कुछ देर आराम करने के लिए अपने कमरे में गए ही थे कि अचानक फोन की घंटी बज उठी। उन्होंने फोन उठाया तो दूसरी तरफ से उनके समधी शशिकांत जी की आवाज़ आई। उन्होंने कहा, “कल आपसे एक ज़रूरी मुलाकात करनी है।” यह सुनकर दीपक जी चिंतित हो गए, क्योंकि दो … Read more

रोज रोज का सिलसिला बंद हो – कमलेश आहूजा : Moral Stories in Hindi

रोज रोज का सिलसिला बंद हो ये सिलसिला रोज का होने लगा पूजा की नन्द रेवती आए दिन ससुराल वालों से झगड़कर मायके आ जाती थी। पूजा के सास ससुर व पति उसे समझाने की बजाय और शय देते थे। रेवती शुरू से जिद्दी व क्रोधी स्वभाव की थी। हर समय घर में क्लेश करती … Read more

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