सास को बहु की तकलीफ  नहीं दिखती । – लक्ष्मी त्यागी : Moral Stories in Hindi

रमा,बहु ! जरा पानी तो लाना !  जी माँजी !अभी लाई कहकर उसने अपने आटे से सने हाथों को धोया और दौड़ते हुए ,एक गिलास पानी ले आई ,वो जानती है ,यदि मम्मी जी के आदेश का पालन होने में तनिक भी देर हुई तो मम्मीजी ,नाराज हो जायेंगीं। लीजिये !मम्मी जी ! क्या कर … Read more

विश्वास की डोर – परमा दत्त झा : Moral Stories in Hindi

आज सुनंदा मिश्रा दुख से पागल थी। आंखों से सावन भादो की बरसात हो रही थी।कारण औलाद ऐसा करेगा वह कभी सोची न थी। हुआ यह कि मकान बेचने के बाद इसका बेटा रोहित कार में लेकर एयरपोर्ट चला रास्ते में करोलबाग वृद्धाश्रम के पास उस पेड़ के नीचे इसे उतार कर इसका बैग भी … Read more

अनकहा दर्द – डॉ कंचन शुक्ला : Moral Stories in Hindi

काम्या पार्क की बेंच पर बैठी आकाश में उड़ते पक्षियों को देख रही थी उसके आसपास कोई नहीं था थोड़ी दूरी पर कुछ लोग बैठे हुए थे कुछ टहल रहे थे शाम गहराने लगी थी धीरे-धीरे सभी पार्क से निकलने लगे पर काम्या वहीं बैठी रही वह कोई निर्णय नहीं ले पा रही थी । … Read more

मैंने तुम्हें दिल से प्यार किया  है। – ज्योति आहूजा : Moral Stories in Hindi

सान्वी को देखकर कोई नहीं कह सकता था कि वो अंदर से टूटी हुई है। हर सुबह वो वैसी ही मुस्कान पहनती, जैसी लोग देखने के आदी हो गए थे। घर सँवारती, ऑफिस जाती, सबके लिए उपलब्ध रहती — लेकिन जब अकेली होती, तो आँखों से बहता सन्नाटा ही उसका सच्चा साथ होता। आर्यन से … Read more

कान भरना – चंचल जैन : Moral Stories in Hindi

“मीनू की मम्मी देखा, जब से अमित विदेश गया है, आपकी बहू उर्मी कभी इसके साथ, कभी उसके साथ खिलखिलाती घूमती है।” ” मूवी, कभी बाजार। थोडी बहुत लाज शरम है या नहीं।” ” गुडिया को दादी के भरोसे छोड जाती है। आप सब झेल लेती हो। अकेली पता नहीं कहां कहां भटकती है।” मीनू … Read more

कठपुतली – वीणा सिंह : Moral Stories in Hindi

   मां जब अपने हीं कोख जाए को कठपुतली बना डाले तो उसका वर्तमान और भविष्य कैसे नष्ट हो जाता है…. तुषार इसका ज्वलंत उदाहरण था… रांची के एक मेंटल हॉस्पिटल में मेरी बचपन की सखी  तुहिना जो आगरा में डॉक्टर है… आने के पहले से हीं अपने प्रवास की सूचना दे दी थी.. प्लीज जरूर … Read more

विश्वास की डोर – सीमा सिंघी : Moral Stories in Hindi

 रवि किशन जी और सुषमा जी दोनों दंपत्ति अब धीरे धीरे बुढ़ापे की चादर ओढ़ते जा रहे थे ! दोनों की ही उम्र और बालों की सफेदी उनसे दूरियां बनाने लगी थी मगर  रवि किशन जी का जिंदादिली स्वभाव सुषमा जी को जीने की बहुत बड़ी वजह देता जा रहा  था ! जब भी वक्त … Read more

*मत भूलो कि यह भी मेरा परिवार है* – सुभाष मौर्य : Moral Stories in Hindi

 अर्जुन, एक युवा जो अपने परिवार के भीतर रिश्तों की जटिलताओं से जूझता है, अपने पूर्वाग्रहों को तोड़कर एकता की शक्ति को पहचानता है। यह कथा भावनात्मक गहराई, पारिवारिक चुनौतियों, और शिक्षाप्रद सबक के साथ बुनी गई है, जो पाठकों को रिश्तों के महत्व को समझने के लिए प्रेरित करती है।कथाअर्जुन चंदनपुर गाँव के एक … Read more

विश्वास की डोर – सुभाष मौर्य : Moral Stories in Hindi

सुमन एक छोटे से गाँव, हरियाली में बसे मधुरपुर में अपनी माँ कमला और छोटे भाई रमेश के साथ रहती थी। यह गाँव प्रकृति की गोद में था, जहाँ खेतों की हरी-भरी फसलें और नदियों का संगीत जीवन का आधार थे। लेकिन सुमन के परिवार के लिए यह सुंदरता एक खोखली तस्वीर थी। पाँच साल … Read more

सच्चाई बर्दास्त नहीं होती – लतिका पल्लवी : Moral Stories in Hindi

अमृता जी की देवरानी, पुष्पा जी, शाम के वक़्त उनके घर पर आई और अमृता जी की बहू से पूछा कि तुम्हारी बुआ सास जब तुम्हारे यहाँ आई थीं तो तुम्हारी सास ने उनसे ऐसा क्या कह दिया है कि वह यहाँ से खूब गुस्से में घर गई? ” अमृता जी की बहु थोड़ा अचरज … Read more

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