“ईर्ष्या “ : Moral Stories in Hindi

“ईर्ष्या “ एक समय की बात है,एक छोटा सा गाँव था जहाँ हरे-भरे खेत और बहती नदी थी ,वहाँ दो दोस्त रहते थे -राहुल और अमन दोनों बचपन से ही गहरे दोस्त थे और उनका रिश्ता बहुत मजबूत था । राहुल स्वभाव से बहुत मेहनती और सीधा साधा था ,जबकि अमन चतुर चालाक और महत्त्व … Read more

कलयुगी रावण – संगीता अग्रवाल

” रिया देखो तो कौन आया है ?” बाहर से पापा की आवाज़ सुन बीस साल की रिया जो फोन पर लगी थी बाहर आई।  ” कौन है पापा ?” बाहर आते आते उसने सवाल किया । ” देखो दादी आई है । आज से ये तुम्हारे कमरे मे ही रहेगी !” माँ दादी के … Read more

दान – पुष्पा कुमारी “पुष्प” : Moral Stories in Hindi

“आप मुझे पाँच रुपए उधार दे सकती हैं क्या?” बस का टिकट पंद्रह रूपए का था और उस लड़के के हाथ में उस इकलौते दस के नोट के अलावा उसके बटुए से एक पाँच सौ का नोट भी झांँक रहा था। इधर बस कंडक्टर उसे पाँच रूपए के बदले पाँच सौ का छुट्टा देने को … Read more

कलछुल -पुष्पा कुमारी “पुष्प” : Moral Stories in Hindi

“सुधा! तुमने ध्यान दिया?” “क्या?” “अपना बंटी कितना बदल गया है!” पहली बार अपनी पत्नी सुधा संग बलिया से बेंगलुरु बेटा-बहू से मिलने आए चंदेश्वर ने अपने मन की हलचल साझा किया। “आपने सही कहा जी! मैं भी कल से यही महसूस कर रही हूंँ कि कितनी जल्द समझदार हो गया है अपना नटखट बंटी।” … Read more

ईर्ष्या – सीमा सिंघी : Moral Stories in Hindi

 अरे ओ जग्गू पार्वती गुड़िया कहां हो तुम सब?? कहीं दिखाई नहीं दे रहे हो। अभी तो खाना पकाने का समय है, तो चूल्हे में आग क्यों नहीं है?? यह चूल्हा ठंडा क्यों पड़ा है?? जेठानी लीला की आवाज सुनकर घर के पिछवाड़े का आंगन बुहारना छोड़ कर पार्वती जेठानी लीला के पास आकर कहने … Read more

“खुशी मिली इतनी की मन में ना समाये – सुनीता मौर्या “सुप्रिया” :

Moral Stories in Hindi “मम्मी…मम्मी…मम्मी जीईईई…कहां हो आप?” दस साल का पल्लव खुशी से अपनी मां को पुकारता हुआ घर मे दाखिल हुआ।   हाथ में सूखे कपड़ों का ढेर लिये  सीढियों से उतरती मैथली झुंझलाते हुए पूछती है,”क्या हुआ जो इतना बेसब्रा हुआ जा रहा है, छत पर गई थी सूखे कपड़े उठाने?” पल्लव हाथ … Read more

पत्नी की चतुराई – शुभ्रा मिश्रा : moral stories in nindi

आज दस दिन मायके मे रहकर नम्रता अपने घर लौट रही थी।गाड़ी अभी गंतव्य से एक स्टेशन पहले ही थी, तभी नम्रता नें अमर को फोन कर दिया था कि स्टेशन पर गाड़ी पहुंच रही है, तुम कहा हो? अमर नें कहा कि गाड़ी अभी तो एक स्टेशन दूर है। नम्रता को लगा कि वह … Read more

ईर्ष्या की छाया से उजाला – डॉ० मनीषा भारद्वाज : Moral Stories in Hindi

मुंबई की उमस भरी गर्मी में ‘कॉफी कॉर्नर’ की ठंडी हवा भी अरुण के मन की गर्मी को शांत नहीं कर पा रही थी। उसकी नजरें टेबल के दूसरी ओर बैठे विवेक पर टिकी थीं, जो अपनी नई कार की चाबियों को उत्साह से घुमा रहा था। वह चाबी सिर्फ धातु का टुकड़ा नहीं थी, … Read more

अनकही गंध – डॉ० मनीषा भारद्वाज : Moral Stories in Hindi

सुबह का सूरज अभी आँखें मल ही रहा था। हवा में कसैली सर्दी और डीजल इंजनों की तीखी गंध घुली हुई थी। छोटे से शहर के स्टेशन पर, प्लेटफॉर्म नंबर दो के पास, करमचंद का चाय का ठेला जैसे सिसकती हुई दुनिया में एक ऊष्मा का केंद्र था। उसके बर्तनों से निकलती भाप, जीवन की … Read more

ईर्ष्या – नीलम शर्मा : Moral Stories in Hindi

रामलाल जी एक रिटायर्ड अध्यापक थें। उन्होंने अपने अध्यापन के कार्यकाल में कितने ही बच्चों की पढ़ाई का खर्चा भी उठाया था। जो बच्चे स्कूल की फीस भरने में सक्षम नहीं थे। पढ़ाई में कमजोर बच्चों को भी कक्षा से अलग भी पढ़ा देते थे। स्कूल के बच्चे उनका बहुत सम्मान करते थे। कई बच्चे … Read more

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