जाहिल,गंवार हो क्या – मंजू ओमर

कैसे जाहिल लोग हैं पढ़े लिखे हैं की गवांर है। अरे क्या हो गया आज फिर क्यों सवेरे सवेरे बड़बड़ किये जा रहे हो पुष्पा जी ने पति अरुण जी से पूछा। अरे क्या बताऊं देखो तो सब जगह पानी की कितनी त्राहि त्राहि मची है और लोग बिना मतलब की पानी बर्बाद करते रहते … Read more

बिटिया का घर बसने दो। – मधु वशिष्ठ :

 Moral Stories in Hindi बिटिया का घर बसने दो। कल भी जब मैं इनकम टैक्स ऑफिस गया था तो रमन को वहां बैठे देखा। उसने दफ्तर में ही सबके बीच में मेरे पैर भी छुए और मेरा काम भी आसानी से हो गया। भाई मुझे तो रमन अपनी बेटी शिप्रा के लिए बहुत पसंद है। … Read more

परिवार – खुशी :

 Moral Stories in Hindi जगन्नाथ जी समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति थे जिनकी कपड़े की मिल थी।घर में दो बेटे विनय और गौरव प्यारी सी बेटी मेघा और पत्नी पूजा थे।सुखी परिवार था। जगन्नाथ जी बाहर का देखते और उनकी मां जानकी देवी की मृत्य के बाद घर की सारी जिम्मेदारी पूजा पर थी।जब तक सास … Read more

राज को राज रहने दो – डॉ बीना कुण्डलिया :

आज रेखा सवेरे सवेरे जल्दी उठ गई उसको बाजार जाना था बहुत सामान जो खरीदना उठकर बिस्तर में बैठे बैठे सोचने लगी जल्दी से घर के काम निपटा सीधे बाजार की तरफ निकल जाऊंगी दरअसल उसे आज ही शाम की ट्रेन से अपने मायके के लिए निकलना था। राखी का त्यौहार जो था साल में … Read more

हैलो ! कामिनी कैसी है – सुदर्शन सचदेवा :  Moral Stories in Hindi

सुबह ६ बजे ही फोन कर दिया | रवि ने फोन उठाया | हां जी मम्मी जी ! बोलो  ! आवाज़ में नींद भरी हुई थी, प्लीज़ सोने दिजिए , बाद में फोन करना | सुबह सुबह नींद खराब कर दी , एक तो रात को देर से आता हूं और अब……… कामिनी ! इधर … Read more

बिटिया का घर बसने दो – कंचन प्रभापांडे :  Moral Stories in Hindi

सृष्टि किसी उलझन में बैठी हुई थी तभी कॉल वेल बजती है। सृष्टि उठाती है तो उसकी मां दहाड़ती है कहां जा रही है? गेट नहीं खोलना ,घुमक्कड़ आया होगा। सृष्टि के कदम रुक जाते हैं कुछ देर बाद फोन की रिंग बजती है ।सृष्टि जैसे ही फोन उठाती है उसकी मां की आवाज आती … Read more

बिटिया का घर बसने दो -के कामेश्वरी :  Moral Stories in Hindi

सावित्री दस दिन से शापिंग करने में व्यस्त थी साथ ही …… अपनी पल्लू से आँसू पोंछती जा रही थी क्योंकि ……उसकी बेटी रत्ना की बिदाई जो है । वह बहुत कुछ अपनी बेटी को देना चाहती थी ……इसलिए जितना भी खरीदती थी उसका दिल नहीं भरता था । यहाँ तक ठीक है ….. लेकिन … Read more

राखी का रिफंड और मीठी खटास का बंधन –  डॉ० मनीषा भारद्वाज :  Moral Stories in Hindi

राखी की सुबह थी। सूरज की किरणें खिड़की से झांक रही थीं, मानो चांदी के धागों को सुनहरे रंग में रंगने आई हों। लेकिन मिष्टू के कमरे का माहौल उतना उज्ज्वल नहीं था। दस वर्षीया मिष्टू, जिसके चेहरे पर आमतौर पर चावल के दाने जैसी मासूम मुस्कान खिली रहती थी, आज बिल्कुल बादलों से घिरे … Read more

समझदार बहन – शुभ्रा बैनर्जी :  Moral Stories in Hindi

माता-पिता की सड़क दुर्घटना में असामयिक मृत्यु हो जाने के कारण दुर्गा और उसका बड़ा भाई अनाथ हो चुके थे।पिता दीनदयाल जी का भरा -पूरा संयुक्त परिवार था।घर के बड़े बेटे होने का फर्ज उन्होंने खूब निभाया था। दुर्गा की दो बहनों की शादी उन्होंने ही करवाई थी।अपने छोटे भाई को पुत्र समान स्नेह देकर … Read more

जाहिल – करुणा मालिक :  Moral Stories in Hindi

भाभी , सुबह का खाना तो ज्यों का त्यों रखा है । अब बनाऊँ  या नहीं ?  पड़ा है तो बनाने की क्या ज़रूरत है …….. हाँ आशी , ज़रा एक कप गर्म चाय बना दो । गाड़ी पार्क करते- करते कपड़े सील गए , पता नहीं ये बारिश की टिप- टिप कब बंद होगी … Read more

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