अपनत्व की छांव – परमा दत्त झा
आज सुबह सबेरे ममता अकचका गयी जब रात के तीन बजे श्वसुर जी इधर आते दीखे।उसका जी धक से रह गया।आज का जमाना खराब है,ऊपर से कितने श्वसुर —। मगर वह बाथरूम जा रहे थे, अचानक रूके और बाहर से कंबल लाकर अच्छे से ओढ़ा दिया।फिर कछुआ छाप जला दिया और आस्ते से लाईट बंद … Read more