अजन्मे बेटी का दर्द – रीता मिश्रा तिवारी

मेरा सिर थोड़ा भारी सा लग रहा है। थोड़ा आराम कर लेती हूं कह सुषमा बिस्तर पर लेट गई , लेटते ही उसे नींद आ गई। मां, पापा! मैं जन्म ले कर इस दुनियां में आना चाहती हूं। देखना चाहती हूं प्राकृतिक सुंदरता को। महसूस करना चाहती हूं तुम्हारे स्पर्श को। तुम्हारी गोद में सुकून … Read more

आरव – कान्ता नागी

जब से आरव ने जन्म लिया वह घर में उपेक्षित ही था, क्योंकि बचपन से ही वह दूसरे बच्चों की तरह चल-फिर नहीं सकता था।मीनू और उसके पापा अजीत ने उसका बहुत उपचार करवाया।फीजीयोथेरोपी कराने से अब वह वैशाखियों के सहारे ही चल सकता था।जब से उसकी बहन नीलू का जन्म हुआ, माता-पिता का सारा … Read more

समझदारी – कान्ता नागी

गोविन्द और रेखा दोनों जुड़वां भाई -बहन थे।उनके पिता कर्नल विनोद फौजी थे,जबकि उनके जन्म के बाद ही मां गुंजा की मृत्यु हो गयी थी। कर्नल विनोद ने दोनों की परवरिश की। दोनों भाई बहन बचपन से ही होशियार और कुशाग्र बुद्धि होने के कारण अब अपनी मंजिल के करीब पहुंच चुके थे। रेखा का … Read more

पायल – निभा राजीव

शिप्रा माता-पिता के देहांत के बाद पहली बार रक्षाबंधन पर मायके जा रही थी। यूं तो भैया भाभी ने बहुत प्यार से बुलाया था। भाभी ने बड़े मनुहार से कहा था कि “सोच ले शिपू कि मां के पास आ रही है।”  पर फिर भी मन न जाने कितनी शंकाओं से घिरा हुआ था। कि … Read more

एहसान – सपना बबेले

मीना की शादी को चार साल ही हुए थे कि अचानक पति की तबीयत बिगड़ी और कुछ दिमागी हालत खराब हो गई। बहुत परेशान थी मीना क्या करें कुछ समझ में नहीं आ रहा था। ससुराल वालों ने भी किसी प्रकार की मदद करने से मना कर दिया। क्यों कि मानसिक रूप से बीमारी के … Read more

रोशनी लैम्प की- गोविन्द गुप्ता

अनुज पांच वर्ष का था तब उसके पिता ने पास के स्कूल में उसका एडमिशन करा दिया था, स्कूल गांव से पांच किमी दूर था तो पैदल ही सभी बच्चों के साथ जाता था, रास्ते भर बच्चे हंसी मजाक करते रहते , एक दिन अनुज के शर्ट कुछ फटी हुई थी तो एक बच्चे ने … Read more

फितरत – अनुपमा

सुंगधा ने जब से अपना व्हाट्स ऐप ओपन किया है आज तब से ही बहुत परेशान सी है , कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था उसे , दोपहर का खाना भी नहीं खाया था और यूं ही कमरे मैं जा कर लेट गई थी पर नींद तो कोसो दूर थी उससे , समझ नही … Read more

मेरी प्रेम कहानी ( भाग 1 ) – दुर्गा खीर

12वीं पास किया अच्छे खासे परसेंट भी बन गए थे। First   डिवीजन पास हो गई थी। फिर सोचा कंप्यूटर कोर्स कर लु हालांकि स्कूल में कोई भी बॉयफ्रेंड नहीं था। एक अच्छी मेरी दोस्त थी जिसके साथ में हर बातें शेयर करती थी।एग्जाम के बाद हम भी बिछड़ गए हैं कंप्यूटर कोर्स किया। हमारे … Read more

पहलू- कंचन श्रीवास्तव 

तमाम लोगों के घरों की कहानियां सुनकर रमेश को बड़ा आश्चर्य होता था। कि कैसे लोग रहते हैं आखिर सब कुछ पहले जैसा ही तो रहता है ,फिर ऐसा क्या होता है कि सब तितर बितर हो जाता है। और दूसरे ही पल दादी और मां के रिश्ते को लेके उसका मन खट्टा हो जाता। … Read more

दो सखी – मीना दत्ता

लिली शहर की किशोरी अभी इंटर में पढ़ती थी।उसकी माँ और पिता के बाल नुचने से बच तो गए लेकिन हार माननी पड़ी उन्हें। गांव के परिवार जन कहते ” बेटी सत्रह की हुई ..दिखती नहीं ?हाथ पीले करो ।मेरी बेटियों का नंबर आये ये लिली जाय तो।” लिली रानी गांव से परिचित थी ।परिचय … Read more

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