“बेटियां भी होती हैं बुढ़ापे का सहारा ” – कमलेश आहूजा
“मम्मा,आप बैठो मैं बुआ के लिए चाय लेकर आती हूं।”नेहा की छोटी बेटी बोली।“सच नेहा,तू बड़ी किस्मत वाली है..तेरी दो बेटियां हैं,दोनों कितनी सेवा करती हैं तेरी?शादी के बाद भी तेरे दुख सुख में साथ खड़ी रहती हैं।” नन्द स्नेहा की बात सुनकर नेहा कुछ पलों के लिए अतीत में खो गईं.. नेहा को जब … Read more