निष्प्राण – सुनीता मिश्रा
मेरी निष्प्राण देह जमीन पर पड़ी थी। कोई नहीं रो रहा था, न कोई शोक मना रहा था। न मेरे माँ बाप थे, न भाई बहिन न रिश्तेदार। मैं अचंभित था, नहीं पता किसी की वासना या जननी की भूल, नाले के पास पाया गया मैं। कुत्ते नोच रहे थे, कुछ दूरी पर चर्च था। … Read more