ख़ाली जगह – बेला पुनीवाला
जब भी आधी रात को बिस्तर पे में करवट बदलता हूँ, तब मेरी नज़र सावित्री की जग़ह पे जाके रुक सी जाती है, क्यूंँकि आज वो जगह खाली है। सुबह जिसके साथ में मंदिर जाया करता था, घर आकर चाय – नास्ता करता था, कल जो रातो को मेरा सिर दबाया करती थी, रात को … Read more