गुरूजी – अनुज सारस्वत
“चल चिकने(अमित)ये पीछे क्लास की खिड़की दूसरे मोहल्ले में खुलती है,इंटरवल में तू अपना और मेरा बैग नीचे फेंक दियो,मैं पीछे पहुंच जाऊंगा,और बैग उठा लूंगा फिर तू आराम से खाली हाथ बाहर आ जइयो और चलेंगे सिनेमा “राजा बाबू” लगी है पायल टाकीज में वहाँ मुंशी (अशोक) टिकट ले कर तैयार होगा” सौरभ ने … Read more