मैं समय हूं

मैं समय हूंमैं कभी रुकता नहींमैं कभी थकता नहींदिवस, वर्ष, सदियां और युग पार करता जाता हूंबस आगे बढ़ता जाता हूंमैं समय हूंकोई कहता अच्छा हूं मैंकोई कहता बुरामैं निर्विघ्नं, निर्विचार आगे बढ़ता जाता हूंमैं कभी थमता नहींमैं समय हूंजो कहता आज नहीं,मैं कल करूंगाउसका कल कभी आता नहींआगे वह बढ़ पाता नहींमैं समय हूंजो … Read more

उन्मुक्त आकाश –   किरण केशरे 

  आज सुबह से ही बेला अनमनी सी थी ।कल ही बिटिया राशि का ऑनलाइन बैंक का इंटरवियू था ,जिसमें उसे प्रथम प्रयास में ही सफलता मिल  गई थी।राशि पढ़ने में होशियार थी ,इसी वर्ष MBA में बहुत अच्छे अंको से उत्तीर्ण हुई थी।बेला का मन घबरा रहा था ।अभी तक तो इंदौर में ही थी … Read more

और दीप जल उठे –   किरण केशरे

माधव और गुनिया रोटी चटनी की पोटली बांध कर सेठ धरमराज की कोठी पर आज सुबह सुबह ही साज-सज्जा के लिए चले गए थे  ! सेठजी ने कल शाम को ही कड़ा निर्देश दे दिया था की, कल जल्दी कोठी पर आकर सजावट और हार तोरण से पूरी कोठी को सजाना है  ,दीपावली के दिन … Read more

सम्मोहन/ चेतना – कंचन शुक्ला

आँगन में तन्नी से सूखे कपड़े उतारती राम्या, मनमग्न है। अपनी दिनचर्या में प्रतिपल अवांछित व्यवहार ही मिलता उसे। सब के लिए दिनभर जूझती, अथक प्रयासों से सबको प्रसन्न करने का प्रयत्न करती पर सब बेकार। उद्गार, भावभंगिमा, उचित सम्मान भी नगण्य हो जाता। बल्कि कई बार परिवारजनों से उलाहना व असम्मान का भोगी ही … Read more

यत्र नार्यस्तु पुज्यंते – सुनीता मिश्रा

पंडित त्रिलोकी प्रसाद मिसिर,स्त्री जाति का बहुत सम्मान करते। कभी भी अपशब्द का प्रयोग नहीं करते उनके लिये ।स्त्री जाति को वे  देवी का रूप मानते।उनका विश्वास था जिस घर मे नारी की पूजा होती है,वहाँ देवता निवास करतें हैं। वे अक्सर बनवारी माली,रघु खटीक,ठाकुर हरिसिंग को समझाते,बात बेबात औरतों पर हाथ उठाना ठीक नहीं।गाली … Read more

मेरा पति सिर्फ मेरा है –  मनीषा भरतीया

रमा और उसके पति हर साल गर्मी की छुट्टियों में बच्चों के साथ कहीं ना कहीं छुट्टियां मनाने जरूर जाते थे इस साल उन्होंने ऊटी जाने का प्लान बनाया था। ऊटी जाने के लिए बच्चे भी बहुत खुश है लेकिन इस बार रमा घूमने अकेले नहीं जा रही थी बल्कि अपने सास-ससुर को भी अपने … Read more

मीरा – के कामेश्वरी

मीरा कहाँ मर गई है ? कब से पुकार रही हूँ सोनी रो रही है ।  सुनाई नहीं दे रहा है क्या? क्या कर रही है ? कहते हुए रिया रसोई से कमरे की तरफ़ आती है क्योंकि उसकी बच्ची रो रही थी और वह खुद अपना काम छोड़कर आती है और देखती है कि … Read more

यादें – गरिमा जैन

पापा मम्मी के पास आना मेरे लिए हमेशा से ही एक खुशनुमा पल रहा है। गर्मियों की छुट्टियों में जब भी दिल्ली की चिलचिलाती धूप से मैं परेशान होता तो भाग कर शिमला आ जाता। शिमला में हमारा पुश्तैनी मकान ,दूर-दूर तक सुंदर नजारे, सच बचपन की कितनी ही यादें वापस ताजा हो जाती हैं … Read more

शिकवा – कमलेश राणा

राधिका जी और नितिन के विवाह को 40 वर्ष बीत चुके हैं,,,इन वर्षों में जीवन के बहुत से रंग देखे हैं दोनों ने साथ-साथ,, विवाह के एक वर्ष बाद ही ईश्वर की कृपा से उन्हें पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई,,इस पीढ़ी का पहला बेटा था वो,,सारे परिवार की आँखों का तारा,, संयुक्त परिवार था,,हाथों ही हाथों … Read more

जादूगरनी – पुष्पा पाण्डेय

बड़ी मुश्किल से विवेक पार्थ को सुला पाया।  घंटों मशक्कत के बाद वह सो पाया। न जाने कैसे बबीता इसे दस मिनट में खेलते- खेलाते सुला देती थी। आज तीन दिन हो गये बबीता को अस्पताल में। सीढ़ियों से गिर पड़ी और बेहोशी की हालत में उसे अस्पताल ले जाना पड़ा। अब डेढ वर्षीय पार्थ … Read more

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