मां तो कूड़ा नहीं – ननु नरेंद्र

 दो दिन से पत्नी के साथ घर की सफाई करा रहा हूं. इधर उधर जहां देखो कूड़ा ही कूड़ा. दो बड़े बैग भरकर कल फेंके. दो आज भर गए.सारा का सारा पिछले साल खुद ही खरीदा  था और दीवाली  निबटते ही फिर कूड़ा खरीदना चालू हो जाएगा. सही बात है कि कूड़ा हम खुद ही … Read more

परख अपनों की – मंगला श्रीवास्तव 

 अपने ही घर मे चार बेटें और बहुओं के बीच रहते हुएं भी सविता देवी आज अकेली पड़ गयी थी।अपने कठोर व्यवहार और रूढ़िवादिता के कारण। उस पर से उनकी एक आदत दुसरों की बातों में आना।    वह अक्सर परिवार और अपने अड़ोसी पड़ोसी से घर की बाते करती और फिर वह लोग भी बाते … Read more

तलाक़ रोग नहीं है – के कामेश्वरी

उमादेवी की दो लड़कियाँ थीं । वह कॉलेज में इंग्लिश लेक्चरर थी । उसके पति विजय जूनियर कॉलेज में प्रिंसिपल थे । बड़ी लड़की अनु ने भी इंग्लिश में रिसर्च किया । छोटी बेटी अरुणा ने एम बी ए किया और कॉलेज में ही नौकरी करने लगी । माता-पिता को अब बच्चों के लिए रिश्ते … Read more

हिसाब – गरिमा जैन

बात उन दिनों की है जब मैं अपनी बहन पिंकी की नंद की शादी में गई थी। सबके लिए महीनों से तोहफे ले रखे थे मैंने अपनी बहन के लिए बहुत सुंदर सा मोतियों का हार लिया था और उससे मेल खाती एक सुंदर सी साड़ी। उसकी सास उसकी नंद के लिए भी बहुत सुंदर … Read more

भूल – गरिमा जैन

मेरी एक छोटी सी भूल ने कैसे मेरी जिंदगी तबाह बर्बाद कर दी। काश  मैंने वह भूल  ना की होती। काश वो दिन फिर से लौट आता और मेरे हाथ से वह गलती ना हुई होती। बात आज से 5 साल पहले की है। 31 मार्च 2016 ।मैं एक संयुक्त परिवार में रहती थी। मेरी … Read more

अनोखा वादा – प्रीती सक्सेना

        मकान बनवाते समय हमने,,, ऊपर की मंजिल में,, तीन कमरे,, पढ़ने वाले बच्चों को किराए से देने के हिसाब से बनवाए थे,,, सुरक्षा और,, आमदनी दोनों के ही हिसाब से,, तीनो कमरों में तीन बच्चे थे जो कोचिंग के लिए आए हुए थे।     मेरे बाजू वाले मकान में  साधारण स्थिती वाला परिवार था,,, मुश्किल … Read more

अनमोल प्यार – गोमती सिंह

नंदिनी ने अपने बेटे का ब्याह बड़ी धूमधाम से किया , बहू भी बहुत ही खूबसूरत और पढी-लिख मिली थी , मगर नंदिनी को बहू की एक बात खलती थी उसकी बहू सुबह बहुत देरी से सोकर  उठती थी ।लगभग 9 बज जाते थे उसके उठते उठते । एक दो दिन तो सभी ने नजरअंदाज … Read more

खट-खट – वंदना चौहान

मेरे मायके में घर से सटा सरकारी प्राइमरी स्कूल है। घर के आस-पास नीम, पीपल व बबूल के पेड़  हैं। कभी-कभी बचपन में बाबा से भूत की कहानियां सुनते तो हम सब बच्चे वृक्षों के झुरमुटों की आकृति से एक नई कल्पना कर डर जाते थे।  मैंने कई लोगों से यह सुन रखा था कि … Read more

    ‘ मैं शादी क्यों करूँ? ‘ -विभा गुप्ता

आज फिर एक लड़के वाले ने नयना को यह कहकर रिजेक्ट कर दिया कि उसकी हाइट कम है।पिछले सप्ताह भी सहारनपुर से एक सीए लड़का उसे देखने आया था।उसे देखने और नुमाइश के बाद यह कहकर चला गया कि रंग ज़रा साँवला है,मुझे तो गोरी लड़की चाहिए।अब तो जैसे उसे रिजेक्ट होने की आदत-सी पड़ … Read more

टमाटर के फुल:- मुकेश कुमार (अनजान लेखक)

———— बहुत तीखी तो नहीं लेकिन धुप आ रही थी आँगन में। रात भर सर्दी की ठिठुरन से परेशान विजय कुर्सी डाल कर बैठ गया। सामने कुछ गमले लगे हुए हैं, फुल के पौधों के अलावा मिर्च और टमाटर के पौधे भी पिताजी ने गमलों में लगा रखा है। विजय अपना डिग्री पुरा कर के … Read more

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