झींक झींक – पुष्पा कुमारी “पुष्प”

निर्मल जी के घर में उनकी बेटी के विवाह की तैयारियां चल रही थी। आज पति-पत्नी दोनों कुछ जरूरी सामान की मार्केटिंग कर बाजार से अभी-अभी घर लौटे थे। निर्मल जी अभी बरामदे में लगे सोफे पर बैठे ही थे कि सामान भीतर रखने गए निर्मल जी की पत्नी शोभा घबराई हुई सी कमरे से … Read more

जड़ों से जुड़ाव – प्रीती सक्सेना

     मेरे दादाजी,, रिटायरमेंट के बाद,,, हमारे साथ ही रहे,,, बहुत अनुशासित,, गंभीर,, कम बोलने वाले,, अत्यधिक प्रभावशाली व्यक्तिव के धनी थे,,,,6 फुटा कद,, सोने की रिम वाला चश्मा,, उनकी,, शान को और बढ़ाता था,,, दादाजी,,, का पहनावा भी उनकी तरह खास था,, कभी खास तरीके से पहना हुआ,,, धोती कुर्ता और पटका,,, कभी पायजामा कुर्ता,,, … Read more

दान का इंतिहान – अर्चना नाकरा

दादाजी की शुद्धि विधिवत संपन्न हो गई थी दादी तटस्थ भाव से बहुत देर तक बैठी रही फिर धीरे से उठ कर उन्होंने दादा जी की अलमारी में से उनके रखे सामान को एक-एक करके निकालना शुरू किया ‘कपड़े जूते.. उनकी छड़ी”! जिसमें “दादाजी की जान बसती थी” और न जाने कितनी चीज विशेषता ‘भीतरी … Read more

*जहाँ चाह, वहाँ राह* – सरला मेहता

” माँ ! तुम क्यों चली गई, हम सबको छोड़कर। दादी भी थक जाती है, दादू की सेवा टहल करते। पापा हम सबके ख़ातिर नई  बिंदु माँ ले आए हैं। पर उन्हें अपनी बेटी कुहू से ही फ़ुर्सत नहीं। तुम्हीं बताओं मैं क्या करूँ ? ” यूँ ही माँ से अपना दुखड़ा सुनाते कुणाल सो … Read more

पराया धन – बालेश्वर गुप्ता

बाय बाय – माइ सन- अपने ही घर के दरवाजे से अपने अपंग बेटे को अपनी पीठ पर लादे राजेश हाथ हिलाकर अपने दूसरे बेटे से सदा के लिए विदा ले रहा था. पर सामने तो कोई था ही नही, बेटा तो अपनी पत्नि और बच्चो के साथ घर के अंदर था, उसे  अपने 76 … Read more

जन्म-कुंडली  – सीमा वर्मा

हर माँ का यह सपना होता है कि वह अपनी नाजों से पाली बेटी का सोलह श्रृंगार करके उसे अपने जीवनसाथी के साथ विदा करे। लिहाजा मैं भी इसकी अपवाद नहीं हूँ। ‘अनुराधा’ हमारी अर्थात मेरे और ‘अनुज वर्मा ‘ की इकलौती बिटिया है। वह दिखने में जितनी खुशनुमा है। बुद्धि कौशल में उससे भी … Read more

विश्वास – पुष्पा पाण्डेय

बीरा के इंतजार में कुसुम अभी तक स्नान-पूजा भी नहीं कर पायी थी। रोज सात बजे तक बीरा आ जाती थी। दस बज चुके। वैसे भी दो दिन से कुसुम सिर दर्द  से परेशान थी। इंतजार करते-करते जुठे बर्तन भी धूल चुके। अब झाडू उठाने ही वाली थी कि दरवाजे की घंटी बजी। ” अरे … Read more

साँवली सलोनी -लक्ष्मी कुमावत 

“आहा! मेरी बड़ी बहन की बहु तो कितनी गोरी आई है। मैं भी अपने सुमित की जब शादी करूंगी तो ऐसी ही गोरी बहू लेकर आऊंगी, जिसका रंग दूध जैसा उजला हो” ” अरे तुम भी क्या बात लेकर बैठ गई? जब से अपनी बहन के घर से आई हो, तब से बस ‘गोरी बहू, … Read more

आर्ट – मीनाक्षी सौरभ  

“यार, तुम ना पराँठे कितने करारे कर देती हो। जल्दीबाज़ी बहुत करती हो, गैस को तेज़ मत रखा करो। मीडियम पर सिकते हैं पराँठे और पकौड़े तो।” नीरजा कुछ न बोली बस चुपचाप गैस की ऑंच मीडियम कर दी। “सब्ज़ियों में तड़का मारो, तब मसालों की ख़ुशबू आएगी और हाँ, मसालों को थोड़ी देर तेल … Read more

मां तो कूड़ा नहीं – ननु नरेंद्र

 दो दिन से पत्नी के साथ घर की सफाई करा रहा हूं. इधर उधर जहां देखो कूड़ा ही कूड़ा. दो बड़े बैग भरकर कल फेंके. दो आज भर गए.सारा का सारा पिछले साल खुद ही खरीदा  था और दीवाली  निबटते ही फिर कूड़ा खरीदना चालू हो जाएगा. सही बात है कि कूड़ा हम खुद ही … Read more

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