“अनकहा‌ रिश्ता!” – प्रियंका सक्सेना

“आंटीईईई… यहां आओ!” छोटी सी मान्या पड़ोस में सुधा के घर में एंट्री करते हुए बोली। उसके हाथ में मेकअप का ब्रश था जो शायद वह अपनी मम्मी की ड्रेसिंग टेबल से उठा कर लाई थी। सुधा प्यार से बोली,”मान्या बेटा, पहले ब्रश रख कर आ जाओ फिर मैं तुम्हें चॉकलेट देती हूॅ॑।” “आंटी कहां … Read more

वतन वापसी – डॉ पारुल अग्रवाल

रोजी-रोटी चीज ही ऐसी है जिसके लिए कई बार हम लोगों को किसी कारण से अपना देश छोड़कर विदेश में बसना पड़ता है। अधिकतर हम भारतीय संस्कारों से जकड़े लोग अपने देश में रहकर अपने देश के बारे में कुछ भी सोचें पर विदेशी धरती पर अपने नैतिक मूल्य और संस्कृति को बहुत याद करते … Read more

मैं ही परायी हूँ – गुरविंदर टूटेजा

अप्रकाशित    दो ही महीने के अंतराल में नीतू ने अपने मम्मी-पापा को खो दिया….बेचारी मासूम को ये ही नहीं समझ आया कि उसकी पूरी दुनिया लुट गयी हैं… थोड़ा रोयी पर पर संयुक्त परिवार था उसे तो सब अपने ही लगते थें..!!    मम्मी-पापा के जाने के बाद अपने कमरे से निकलकर बड़ी मम्मी के कमरे … Read more

तेजाब  – मीनाक्षी चौधरी

मोहित के एक तरफा प्यार ओह नही इस मनोदशा को प्यार नही कह सकते, मोहित की एक तरफा सिमरन को पाने की इच्छा व सिमरन की ना ने इस हादसे को जन्म दिया। सिमरन एक बहुत ही खूबसूरत व मेधावी छात्रा थी। मोहित और सिमरन एक ही कोलेज में पढ़ते थे। मोहित बार बार सिमरन … Read more

दिल का रिश्ता – निभा राजीव “निर्वी”

मीता इस शहर में नई नई आई थी। अभी-अभी उसके पति का स्थानांतरण इस शहर में हुआ था। दो-तीन दिन तो जमने में ही लग गए। बच्चों का विद्यालय में नामांकन भी कराना था। नामांकन के बाद उस दिन वह बच्चों को बस पड़ाव पर छोड़ने जा रही थी,तभी रास्ते में एक विक्षिप्त भिक्षुणी को … Read more

गुरु दक्षिणा – भगवती सक्सेना गौड़

वीरेन एक उच्च अधिकारी कुछ काम से अपने बचपन के शहर जा रहे थे, प्लेन तेज़ी सी आकाश में उड़ रहा था और वो बचपन की सारी यादों को चलचित्र की भांति आकाश के स्क्रीन पर देख रहे थे। अम्मा एक मास्टरजी के यहां घर का काम करती थी, कभी उसको भी ले जाती थी। … Read more

कागज के फूल – सुधा शर्मा

वसुधा का मन बेचैन था।बहुत कोशिश करती खुद को बहलाने की पर बार बार खूबसूरत यादें आकर फिर उसे ले जाती थीं अपने आगोश में जहाँ राज के प्यार के एहसास से, उसकी आवाज की गूँज, उसके शब्दो से फिर बार बार बेचैन हो उठती।                कैसे वह उसे नीरस उदास शुष्क दुनिया से बाहर निकाल … Read more

” तड़प रिश्तो की  ” – अनिता गुप्ता

माया  ने जब से विनोद जी के घर में सफाई-बर्तन शुरू किया  तब से बैचेन रहने लगी। उसकी बैचेनी का कारण था उनका दो साल का बेटा कृष्णा। माया  जब भी कृष्णा को देखती उसके प्रति एक लगाव सा महसूस करती। उसका मन उसको गोद में लेने के लिए मचल उठता। लेकिन विनोद जी की … Read more

घर-परिवार – पूजा मनोज अग्रवाल

विवाह के बाद कुछ खट्टे मीठे अनुभवों से जीवन की नई पारी की शुरुआत हो रही थी । अंतर्जातीय विवाह के चलते सब रीति -रिवाज  , परम्पराएं सब मायके से बिल्कुल भिन्न थी , इसलिये सबसे सामंजस्य बिठाने में भी मुझे थोड़ी परेशानी का अनुभव हो रहा था । खैर , सोना भी आग मे … Read more

एक मुट्ठी उम्मीद,, – सुषमा यादव

मैं अठयासी साल में चल रहा हूं, अपने बेटी के साथ ही रहता हूं, बेटे बहू ने बहुत साल पहले ही हमसे पल्ला झाड़ लिया था, मुझे और मेरी पत्नी को दस दिन रखने के बाद गाड़ी करके गांव भिजवा दिया था कि मेरे घर में आप लोगों के लिए जगह नहीं है,, मैं इस … Read more

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