मुझे स्वीकार नहीं है  – पुष्पा पाण्डेय

श्वेता शाम में चाय लेकर वाॅलकनी में आ गयी। चाय की चुस्की लेते-लेते वह एक नजर अपनी काॅलोनी पर डाली। मन- ही-मन सोचने लगी- इन बीस सालों में कितना कुछ बदल गया। कभी सोचा भी नहीं था कि यह जगह मेरी कर्मभूमि होगी। ——————- हरि प्रसाद जी इस बार नवरात्र में विन्ध्याचल जाकर दस दिन … Read more

वो अदृश्य शक्ति – कमलेश राणा

अजय बहुत दिन हो गये, चलो कहीं घूमने चलते हैं,, बात तो पते की कही है तुमने अमित,, पर कहाँ चलने का सोचा है तुमने,, इन नवरात्रि के दिनों में माता रानी के मंदिर से उत्तम स्थान और कौन सा होगा,, समीर ने सुझाव दिया तो फिर पक्का हम चारों शनिवार को रतनगढ़ की माता … Read more

हम एक हैं – नीरजा कृष्णा

आज जब मीनू का फोन आया तो उसने अपना माथा ठोंक लिया था। सच में कितनी भुलक्कड़ हो गई है, अभी कुछ दिन पहले तक तो याद रखा था पर आज ऐन वक्त पर भूल गई कि छोटी बहन कविता का आज जन्मदिन है। मीनू ने हँस कर फोन किया था,”अरे वाह मौसी! कितनी बिज़ी … Read more

” भेड़ियों का आतंक ” – डॉ. सुनील शर्मा

रिया को कुछ जुगाड़ के बाद गंगा के किनारे प्राकृतिक वातावरण में शहर से अलग बने इस सुन्दर रिसॉर्ट में रिसैप्शनिस्ट की नौकरी मिली थी. हालांकि उसने होटल मैनेजमेंट में डिप्लोमा हासिल किया था. अरमान तो था कि किसी अच्छे होटल में नौकरी मिले, फिर कुछ दिन कमाकर अपना एक रेस्तरां खोले. लेकिन आर्थिक रूप … Read more

वो पराया पर अपना –  बालेश्वर गुप्ता

  अभी पिछले दिनो मैंने जगदीश भाई से वृद्धाश्रम में वीडियो कॉल पर बात की।उनके माथे पर पट्टी बंधी थी।मैंने चौंककर जगदीश भाई से उनको लगी चोट के बारे में पूछा।मैंने उनसे उनके पास आने की इच्छा भी जाहिर की।पर जगदीश भाई ने नम्रता से मना कर दिया और मुझे आश्वस्त किया कि वो ठीक हैं। … Read more

राहजन – रवीन्द्र कान्त त्यागी

एक गाँव था। छोटा सा प्यारा सा। बैलों के गले में बजती घंटियाँ और हरवाहे की हुर्र हुर्र की ध्वनि से अरुणिम अंगड़ाई लेता गाँव। दिल के ऊपर कुर्ते की जेब से विपन्न और कुर्ते की जेब के नीचे, दिल से सम्पन्न गाँव। फटी कमीज के दोनों कौने पकड़कर काले रंग की तगड़ी में बंधे … Read more

प्रेम फिर जीत गया-विजया डालमिया

जिंदगी बहुत खूबसूरत होती है। हर पल आप जो सोचते हो, जो करते हो और जो भावना रखते हो वह निश्चित ही पूरी होती है, बस हमें  धैर्य, ईमानदारी और निष्ठा कभी नहीं छोड़नी चाहिए।यह बात आज राज समझ गया था अचानक जब उसने रागिनी को एक घर के बाहर देखा। पहले तो वह सकपकाया। … Read more

कौन अपना कौन पराया” – ऋतु अग्रवाल

    राजीव और दिव्या दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। दोनों एक दूसरे से शादी करना चाहते थे पर दोनों के परिवार वाले इसके सख्त खिलाफ थे क्योंकि राजीव पंजाबी था और दिव्या मारवाड़ी। परिवार वाले इस अंतर्जातीय विवाह के सख्त खिलाफ थे। दिव्या और राजीव ने उन्हें मनाने की बहुत कोशिश की पर … Read more

अतीत की जुगाली ! – रमेश चंद्र शर्मा

शादी के महज तीन साल बाद अनीता के शराबी पति रोड़ एक्सीडेंट में चल बसे । पढ़ी-लिखी वैधव्य की शिकार अनीता ने प्राइवेट कंपनी ज्वाइन कर ली। कंपनी में नए बॉस रवि  पोस्टिंग पर आ गए। पूरा स्टाफ गुलदस्ते देकर स्वागत करने लगा । अनीता उदास एक तरफ खड़ी रही। रवि “अनीता,तुम यहां! बहुत सालों … Read more

एक अकेला – आभा अदीब राज़दान

नंदा और मैं हम दोनों ही कितने अलग थे हमारी कोई एक बात भी तो नहीं मिलती थी, बिलकुल पूरब और पश्चिम । आनंद जी को सारी बातें अब एक एक कर के याद आती जा रही थीं । ” मैन फ़्रोम मार्स वुमन फ़्रोम वीनस, मजाल है जो कभी भी हमारी राय मिल जाए … Read more

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