लग्न भ्रष्टा – सुधा शर्मा

आते ही शिवनाथ बोले,”क्या बात है इतनी जल्दी में क्यों बुलाया? तबियत तो ठीक है? ”  ‘जल्दी ही तो है समय ही तो नहीं है ‘मन मे कहा गौरी ने।बोली,” सब ठीक है ।आज आप को खाना खिलाने का बहुत मन था।बैठो न।आज मैंने सब कुछ आपकी पसंद का बनाया है ।’ कितना सकूँ मिलता … Read more

नोजपिन – मनप्रीत मखीजा

आज फिर, वो मेरे लिए नोजपिन उठाकर ले आये। नोजपिन मुझे बिल्कुल पसंद नही है पर वो समझते ही नही! शादी के बाद ये मेरा दूसरा जन्मदिन है और इस बार भी वो मेरे लिए नोजपिन ले आये। पिछली बार भी यही किया था और मैंने बेमन से मुस्कुराते हुए, “थैंक यू ” कहकर रख … Read more

मेरी पहली गोवा यात्रा – कविता भड़ाना

  नमस्कार पाठकों   मेरी पहली कहानी “आखिर वह कौन थी?”…को आप लोगों के द्वारा मिले ढेर सारे प्यार के बाद आज मैं अपनी दूसरी कहानी “मेरी पहली गोवा यात्रा”…लेकर प्रस्तुत हुई हूॅं ,.. तो आइए मैं आपको अपने साथ ले चलती हूॅं सन 2007 में जब मेरी नई नई शादी हुई थी!  मेरे  नंदोई … Read more

 बेदर्दी कोसी   – गार्गी इवान

शाम की गोधूलि बेला ने ज़मीन और आसमां दोनों को गुलाबी रंग से सराबोर कर दिया था। मोरम की कच्ची सड़क के किनारे, बूढ़े बरगद से पक्षियों के मजलिस की आवाज़ आ रही थी। गले में घंटी लटकाये बकरियों का झुंड, जुगाली करती हुई बढ़ चली थी घर की दिशा में।सावन आ चुका था।  “क्यों … Read more

साथ-साथ – अंशु श्री सक्सेना

कुन्नूर का मौसम अपने पूरे शबाब पर था, हवा में हल्की हल्की ठंड घुलने लगी थी । अस्पताल में मरीज़ कम थे इसलिए अवनि जल्दी घर आ गई थी । वैसे भी आज अस्पताल में उसका मन नहीं लग रहा था । एक अजीब सी बेचैनी और उदासी उसके दिल दिमाग को चारों ओर से … Read more

बरसात की वो रात – सुषमा यादव

,, पता नहीं क्यों ये जालिम, निर्दयी, बेदर्द बरसात हमें बचपन से ही पसंद नहीं है,,, बेतहाशा, झमाझम बारिश,, गड़गड़ाते बादल, कानों को फाड़ती,, चिग्घाड़ती हुई बिजली की तड़तड़ ये धुआंधार बरसात हमें एक भी नहीं सुहाती,, पता नहीं कैसे लोग बरसात में झूम झूम कर नाचते हुए भावविभोर हो जाते हैं,,हे भगवान, हमारे ऊपर … Read more

साजन बिन कैसी बरसात – रश्मि प्रकाश

‘‘ समधन जी, हमारे यहां शादी के बाद बेटी का पहला सावन पीहर में ही रहने का रिवाज है….आपको एतराज ना हो तो बेटी दामाद को कुछ दिनों के लिए हमारे पास भेज दीजिए?….आप इजाजत दे तो मैं यश को राशि और निकुंज जी को लेने भेज दूंगी !” राशि की माँ ने उसकी सास … Read more

नमक पर भारी पड़ी चीनी! – प्रियंका सक्सेना

मौसम अपने पूरे शबाब पर था। दिन भर बादल और सूरज ने जम कर आँखमिचौली खेली थी। शाम होते  होते सूरज ने थक कर हार मान ली। और अपने घर को प्रस्थान किया। बादल अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए पूरी तैयारियां कर चुके हैं। लाइटनिंग ( बिजली की चमक) के साथ घुमड़ घुमड़ … Read more

बरसात की एक रात – सोनल मंजू श्री ओमर

   रात के तीन-चार बज रहे होंगे। राहुल स्टेशन पर खड़ा है, अपने बैग्स के साथ। बारिश हो रही है और बहुत तेज हवा चल रही है। लगता है जैसे तूफान आने वाला है। राहुल ठिठुर सा रहा है, उसे ठंड लग रही है। राहुल आवाज लगाता है…. कोई है!…कोई है! पर उसे कोई नही दिखता … Read more

  ‘ नीरजा ‘ – विभा गुप्ता

 ” हैलो मैडम…., दस मिनट के अंदर मैं तुझे दर्शन देने आ रही हूँ।” कहकर वह हँसने लगी और फोन डिस्कनेक्ट कर दिया।          पूरे सात साल के बाद मैं नीरजा से मिलूँगी, कैसी दिखती होगी? दो महीने पहले फेसबुक पर उसने अपनी जो तस्वीर पोस्ट की थी,उससे तो लग रहा था कि ….., तभी डोरबेल … Read more

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