सूनी तीज – रीटा मक्कड़

इन दिनों हर तरफ तीज की रौनकें लगी थी। सावन का महीना अपने साथ कितनी खुशियां लेकर आता है।हर तरफ हरियाली ही हरियाली। तीज की तैयारी में लगी सुहागिनें, मेहंदी लगाती, चूड़ियां पायल खनकाती कितनी सुंदर दिखती हैं न।  लेकिन सरोज के लिए तो इस बार का सावन जैसे उससे उसकी ज़िन्दगी की हर खुशी … Read more

तेज़ाब – नम्रता सरन “सोना”

“ये लो,,महारानी अब पानी भरने जा रही है- “ “अरे रात भर पता नहीं कहाँ मुँह काला करने जाती है, तो सुबह कहां से नींद खुलेगी,,,” “कुलच्छनी,, हुंह,,,,” श्यामली पानी लिए बगैर लौट रही थी, तभी मोहल्ले की स्त्रियों की ये फब्तियां उसके कानों में पड़ी। ये रोज़ की बात थी, श्यामली अनसुना करती हुई … Read more

 बरसात – उमा वर्मा

मनीषा दिल्ली से रांची के लिए सफर कर रही है ।दो महीने से अपने परिवार के साथ थी।बहुत अच्छा लगा ।सावन का महीना है और झमाझम बारिश भी हो रही है ।ये बरसात ना ,कितने अच्छी  बुरी यादें लेकर आई है ।बचपन में स्कूल जाती और पानी बरसता तो जान बूझ कर पानी में भीगती … Read more

पछतावा – संगीता अग्रवाल

माँ… माँ ” जल्दी से कुछ खाने को दो बहुत भूख लगी है ” अमित ने कॉलेज से आते ही कहा ! “बस बेटा 2 मिनट रुको मैं लाती हूँ। सुबह टिफिन ले जाने को इसी लिए तो बोला था मैने ” अमित की माँ शालिनी ने कहा “क्या माँ आते ही लेक्चर मत दो” … Read more

आखिरी मुलाक़ात – ममता गुप्ता

 मैं (रोहित)अपने घर की बाल्कनी में गर्मागर्म चाय के साथ बैठा था , रिमझिम बारिश की बौछार में बच्चो को देख अपना बचपन सोच के मुस्कुरा रहा था ।  मेरे जीवन मे ये बारिश की बौछार का अपना ही महत्व था , बच्चो को बारिश में भीगता देख  बारिश की पहली मुलाकात याद आ गयी … Read more

गुल्लक – सपना शिवाले सोलंकी : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi : 80 बरस के बाबूजी रिटायर्ड शिक्षक थे। उनकी बातचीत व आवाज़ में अलग ही रौब दिखता था । अम्मा तो आठ साल पहले गुजर गयीं। परिवार में तीन बेटे बहुएं व कुल सात पोते पोती थे। संयुक्त परिवार था। बाबूजी घर के मुखिया थे, सब उनका कहा मानतें थे । … Read more

दोहरी मानसिकता – सपना शिवाले सोलंकी

ये लीजिए आपका मोबाईल कहकर बिटिया ने पापा के हाथ में मोबाईल थमा दिया। उसके चेहरे की उदासी को देख पिता ने  पूछा, ” सब ठीक तो है “ ” जी पापा , बस आपसे एक बात पूछनी थी “ ” हाँ बेटे बोलो” “जी पर आप मुझपर गुस्सा तो नहीं करेंगे “ “बिल्कुल गुस्सा … Read more

मातृत्व का अहसास – स्मिता सिंह चौहान

हाय री कमला, जरा सुनियों, किसी बच्चे की रोने की आवाज आ रही है।” बरखा इधर उधर नजरें घुमाकर देखने लगी। “लगा तो मुझे भी, लेकिन इस कूड़े के ढेर में थोड़ी ना कोई बच्चा होगा। कान बज रहे है हमारे। अब जल्दी पैर बढ़ा , वरना बधाई कोई और ले जायेगा। मुये सब हमारे … Read more

दूसरी औरत – अनिल कान्त

बाहर बीती रातों का अधूरा चाँद गोल हो आया था । भीतर सूना एकांत फैलता जा रहा था । जो हर नये दिन बढ़ता ही जाता था । रेंगते अकेलेपन को छिटकते हुए छुटके बोला -“नींद आने से पहले भी कितना सोचना होता है न !” -“हाँ शायद” पास ही लेटी मनु ने कहा । … Read more

 ” आज की बरसात ” – गोमती सिंह

           ऐसे तो तुम्हें सैकड़ो काम पड़े रहते हैं।  तुम्हारे साथ वक्त बिताने का इससे बेहतर मौका कब मिलता ।      मुझे बहुत डर लग रहा है जी , और आपको मस्ती सूझ रही है।          बारिश, बिजली और गर्जना की रफ्तार बढती जा रही थी तभी सामने एक ढाबा दिखाई दिया जहां चाय पकौड़ी … Read more

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