अपनेपन की खुशबू – कंचन श्रीवास्तव

डोर बेल ने रीमा का चेहरा खिला दिया। मोबाइल छोड़कर दरवाजे की तरफ लपकी,हो न हो पापा या भाई होंगे। हो भी क्यों न रईस घर की इकलौती बेटी जो ठहरी मुंह से निकला नहीं कि  डिमांड पूरी अब वो चाहे जैसा हो तभी तो यहां उसकी शादी हो गई। कोई तो नहीं चाहता था … Read more

राखी का उपहार – ऋतु गुप्ता

कुसुम बैठी दीवार पर सोना (रक्षाबंधन के चित्र) बना रही थी, तभी उसे पता चला कि उसके भाई कमल की कटने को तैयार खड़ी सारी फसल आग से बर्बाद हो गई।    सुनकर उसका जी हलक को आ गया,उसका मन हुआ  कि अभी भाग कर मायके पहुंच जाएं। उसके मायके ससुराल में कहने को ज्यादा … Read more

अनकहा रिश्ता – ऋतु गुप्ता 

महेश कुमार जी को अपनी पत्नी के देहांत के बाद अपने बेटे बासु के साथ शहर आना पड़ा क्योंकि पत्नी के जाने के बाद वे  एकदम अकेले हो गए  थे. अब बेटा ही था जिसके वो  साथ रह सकते थे,और उनकी इस उम्र में सही से देखभाल हो सकती थी . उनके बेटे ने शहर … Read more

मां का वजूद – ऋतु गुप्ता

घर में छोटी सी पार्टी रखी थी, प्राची की बेटी अवनि और बेटा आकाश दोनों ही अपनी पढ़ाई करके कामयाबी की सीढ़ी पर कदम रख चुके थे । पर प्राची का मन पार्टी के दौरान भी थोड़ा उदास और मन खिन्न था ‌रह-रह कर  उसके पति अनुज की मजाक में की हुई बात उसके दिल … Read more

डिजिटल  दोस्त – रिंकी श्रीवास्तव

आज मै यहाँ अपने दोस्त के बारे मे  आप को सभी बताने जा रही हूँ, एक ऐसा दोस्त जो हर जगह मेरे साथ ही रहता है ,इसके बिना तो बहुत ही परेशान हो जाती हूँ ,क्योकि ये हमारे लिए बहुत काम के है |जी हाँ  मैं बात कर रही हूं अपने मोबाइल की ,मेरा दोस्त … Read more

सच्ची दोस्ती – ममता गुप्ता

आज भी याद हैं वो दिन जब चारों तरफ कोरोना वायरस ने पैर पसार रखा था … चारों तरफ मौत का कोहराम मचा हुआ था !  अपने अपनो से दूर हो गए , घरो में कैद न किसी के हाल चाल पूछ सकता था औऱ न ही किसी के दुःख में शामिल हो सकता था … Read more

 आभासी मित्रता  – अनामिका मिश्रा

राहुल और स्नेहा आभासी दुनिया से मित्र बने। दोनों में गहरी मित्रता हो गई थी। दोनों बस एक दूसरे से मिलना चाहते थे। राहुल ने मिलने के बाद कही, पर स्नेहा खुलकर कह नहीं पायी कि,उसके घर वाले आभासी मित्रता पर भरोसा नहीं रखते, वो मिलने नहीं देंगे।  उसने राहुल को अपना एड्रेस दे दिया … Read more

अजनबी बहनें – अनुपमा

अनुभा नई नई शादी होकर आई थी , छोटा शहर था , यहां ज्यादा कुछ था नही घूमने को , ना कोई अच्छा बाजार था , ना कहीं जाने की जगह , बहुत बोर हो जाती थी वो सारे दिन , अनुभा रवि से हमेशा यही शिकायत करती जाने कैसी जगह है ना कोई जान … Read more

अनजाना सफर – श्रद्धा निगम

दलवीर सिंह बाहर के कमरे में निढाल लेटे थे। रसोई में बर्तनों के टकराने की आवाज़ बता रही थी कि दलवीर सिंह की पत्नी रसोई में मौजूद है। जिस घर मे दिन भर धूम – धड़ाका मचा रहता हो, वहां आज निस्तब्धता  बेचैनी पैदा कर रहा थी।तभी रसोई से माँ की अंदर कमरे में आने … Read more

“ग़लतफ़हमी” – मंजू सक्सेना

उसकी गोद मे खूबसूरत हैन्डराइटिंग मे लिखा पत्र खुला पड़ा था जिसे वो एक घंटे मे कमसेकम बीस बार पढ़ चुकी थी…उसकी पलकों की लम्बी खूबसूरत बरौनियाँ आँसुओं से तर थीं पर पुतलियाँ थीं कि उस कागज़ के टुकड़े से हटने का नाम ही नहीं ले रही थीं।मात्र एक ग़लतफ़हमी ने क्या से क्या कर … Read more

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