उसका जाना-शालिनी दीक्षित
रुचिका की आँख आज सुबह जल्दी खुल गई, खिड़की के पर्दे हटा कर देखा तो मन खुश हो गया; मौसम सुहाना था, समुद्र भी उफान पर दिख रहा था। उसने तुरंत घड़ी पर नजर दौड़ाई सुबह के छः ही बजे थे और उसकी मीटिंग ग्यारह बजे है । चलो रुचिका जी अभी सैर कर के … Read more