कभी हार नहीं मानना – विमला गुगलानी : Moral Stories in Hindi

    अजी सुनते हो, जंयत ने तो हमारी नाक कटवा दी, दूसरी बार भी उसका बैंक का पैपर क्लीयर नहीं हुआ, और वो देखो, तुम्हारा भतीजा रोनित , पिछली बार रह गया था लेकिन इस बार क्लर्क की नौकरी मिल गई। आज जब जिठानी मिठाई का डिब्बा देने आई तो बड़ी अकड़ में थी, मेरी तो … Read more

अपनों की पहचान -के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

गोविंद और रमा जिस ऑटो में बैठे थे , वह ऑटो गोविंद के घर के सामने रुकी । वह खुद उतरकर माँ को भी ऑटो से उतारकर उसने जल्दी से घर का दरवाज़ा खोल दिया और माँ से कहा माँ आज रुक जाएगी क्या? रमा ने उत्तर दिया कि नहीं पल्लवी की तबीयत ठीक नहीं … Read more

एन ० आर० आई – करुणा मालिक : Moral Stories in Hindi

मम्मी, रोज़ – रोज़ यहाँ नुमाइश लगाने की ज़रूरत नहीं है । मैं अपनी सहेली के घर जा रही हूँ , फ़ोन मत करना । मैं नहीं आऊँगी फिर मत कहना कि तुम्हारी बेइज़्ज़ती हो गई । सोना …. सुन तो सही , बहुत अच्छा खाते- पीते घर का लड़का है, सरकारी नौकरी है ।  … Read more

अपनों की पहचान – प्रतिमा श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

वक्त पड़ने पर ही पता चलता है कि कौन अपना है कौन पराया। कुछ भी कहो जो आपकी मुश्किल घड़ी में  काम आए वही रिश्ता ही अपना होता है। मनोज की पोस्टिंग मुम्बई में हुई थी।पूरा परिवार बहुत खुश था। बड़ा शहर चमक दमक, बात ही अलग थी। मनोज छोटे शहर से था तो उसकी … Read more

तमाशा – लतिका श्रीवास्तव :

Short Story in Hind शहर का व्यस्ततम चौराहा….शाम का समय। भारी भीड़,आवा जाही का शोर,एक के बाद एक वाहनों का पैदल यात्रियों का अनवरत तांता लगा था। वहीं फुटपाथ पर एक स्त्री बेहद अव्यवस्थित वेशभूषा जीर्ण वस्त्रों से अपने तन को ढंक पाने में पूर्ण अक्षम हालात की मारी निढाल पड़ी थी।आती जाती  छिद्रान्वेषण करती … Read more

भले घर की बहु – सुनील शर्मा : Moral Stories in Hindi

जब कलम लेकर लिखने बैठता हूं तो अपने आस पास बिखरी सैंकडों कहानियां पाता हूं जिनके किरदार आगे आ आकर कहते हैं कि उन पर भी कुछ लिखूं. आज यादों में ऐसा ही एक किरदार उभर कर आया, हमारी गली के नुक्कड़ पर बैठा मोची…रामलाल जबसे होश संभाला, रामलाल को मैंने हर रोज़ बिना नागा … Read more

बहू ससुराल को करे तो अच्छी पर बेटा ससुराल को करता बुरा क्यों लगता… – रश्मि प्रकाश 

“ देखो तुम्हारी चिंता तो जायज है, पर ये भी तो समझो ना वो भी अब उसका ही परिवार है….. सरला अपने बच्चे पर भरोसा रखो….एकतो तुम्हारी वो बेकार सी सहेलियाँ जाने क्या पटी पढ़ा जाती तुम्हें और तुम बस चिन्ता में मरी जाती हो…. अरे अपने दिए संस्कार परभरोसा तो रखो…बेकार की चिंता कर … Read more

आशीर्वाद

“बाबूजी, खाना रख दिया है, खा लीजिए।”रीना, महेश जी के पलंग के पास पड़ी मेज़ पर थाली रखते हुए बोली। “बहु, पता नहीं क्यों आज खाना खाने का मन नहीं कर रहा है। दोपहर का खाना लग रहा है कि जैसे अभी पेट में रखा हो। न हो तो एक गिलास दूध दे दो, खाना … Read more

माँ का कर्ज

“बेटा, क्या तूने सचमुच घर जमाई बनने की ठान ली है?” “हाँ माँ, इसके अलावा कोई चारा नहीं है। अब कंपनी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है, इसलिए कंपनी बंद कर दी गई है और कंपनी में काम करने वाले हम सब बेरोज़गार हो गए हैं। भला हो कि पारुल के मायके वालों ने अपनी … Read more

पिता की अमानत – ज्योति आहूजा 

जयपुर के शास्त्री नगर में रहने वाले विवेक जी का नया मकान अब मोहल्ले में चर्चा का विषय था। जहाँ विवेक अपनी पत्नी कंचन, दस वर्षीय बेटे विवान और पिता रामप्रसाद जी के साथ हाल ही में रहने लगे थे। वो आलीशान मकान विवेक की मेहनत, बड़ों के आशीर्वाद एवं तरक्की का जीता-जागता उदाहरण था। … Read more

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