दायित्व – शिखा श्रीवास्तव

राशि अपनी मेड माला के इंतज़ार में बैठी थी। घर का सारा काम पड़ा हुआ था। जैसे ही माला आयी राशि ने गुस्से में कहा- माला क्या घड़ी देखनी नहीं आती तुम्हें। कल भी देर से आई तुम और आज भी। माला बोली- बीबीजी त्योहार का वक्त है ना। हर घर में काम बढ़ा हुआ … Read more

सरप्राइज – मीनाक्षी चौहान

मम्मी जी के चेहरे की चमक और किचन से आती पकवानों की महक दोनों की वजह एक ही है। आज लंच में उनकी एक फ्रेंड आने वाली हैं कल ही बता दिया था उन्होंने। कल ही मेरे साथ अपनी फ्रेंड को गिफ्ट में देने के लिए महंगी सी साड़ी भी ले आईं। आज मुझसे भी … Read more

बरसात! तुमने मुझे अनाथ कर दिया। – सरगम भट्ट

बारिश का मौसम देख ही सुनीता का दिल घबराने लगा , वह सभी खिड़की दरवाजे बंद कर ” ……!!! अपने बेडरूम में आकर आंख बंद करके लेट गई । विकास भी अपने ऑफिस के काम से ” दो दिन के लिए बाहर गया था , आज आने वाला है ‘ लेकिन आते-आते रात हो जाएगी … Read more

तूफानी रात – सीमा वर्णिका

मौसम सुबह से खराब हो रहा था । नौकरी भी बहुत बड़ी मजबूरी बन जाती है कभी-कभी..। क्या करे वह चाह कर भी छोटी-छोटी वजहों पर छुट्टी नहीं ले सकता था । अनमना सा वह ऑफिस जाने की तैयारी करने लगा । ” दीप्ति.. मेरा टिफिन तैयार है.. मैं निकलूँ.. पता नहीं कब.. यह बरसात … Read more

 माँ की कोठरी – आरती झा”आद्या

भीगी सड़क देख अनायास ही अरुण के चेहरे पर मुस्कुराहट खेल गई। उसने पूरी कोशिश की थी कि सामने बैठी पत्नी विधि की नजर उसके मुस्कुराते चेहरे पर ना पड़े।  विधि चाय का कप उठाते हुए पूछ ही बैठी.. बारिश देख अरुणा की याद आ गई क्या… अरुणा अरुण की छोटी बहन..अरुण से महज दो … Read more

बहुरानी – आरती झा”आद्या”

क्या है माँ.. शादी शादी। नहीं करनी मुझे शादी। सुबह सुबह ही शुरू हो जाती हैं आप। इसके अलावा आपके पास करने के लिए कोई और बात नहीं है क्या…मुझे ऑफिस भी जाना है.. बाद में बात करता हूँ.. सुभाष फोन पर अपनी माँ से कहता है। रुक पहले मेरी बात सुन। इस सप्ताह हम … Read more

कोई तीसरा – गीतू महाजन

बाहर हल्की हल्की बूंदाबांदी पड़नी शुरू हो गई थी।समीर सोफे पर चुपचाप बैठा निशा को उसका सामान इकट्ठा करते हुए देख रहा था।समीर की आंखें बता रही थी कि वह सारी रात सोया नहीं था..सोता भी कैसे रात को ही निशा ने उसे अपना फैसला सुना दिया था।वह जा रही थी उससे अलग हो रही … Read more

 कसक –    मुकुन्द लाल

अंधेरी रात में मूसलाधार बारिश हो रही थी। रह-रहकर बिजली चमक रही थी। बादल गरज रहा था।। हवा तूफ़ान की तरह तेज गति से बह रही थी। नालियों में वर्षा का पानी ‘घर्र-घर्र’ की आवाज के साथ बह रहा था। पेड़ों की डालियाँ बेतरतीब ढंग से हिल रही थी, मानो टूट कर गिर जाएगी। ऐसा … Read more

खुशियों की बरसात। – ममता गुप्ता

ठंडी ठण्डी हवाए…औऱ रिमझिम बूंदों  की हल्की फुल्की बारिश का आनंद लेते हुए सरला जी अपने फोन की गैलरी में सहज कर रखी हुई यादो का आनन्द ले रही थी,परिवार के साथ इतनी प्यारी यादो को फ़ोटो के रूप में देखकर मन ही खुश थी,तो उन्ही आंखों में थोड़ी नमी भी थी। “जब बेटा बहूऔऱ … Read more

अनोखी विदाई – गुरविंदर टूटेजा

     निम्मी की शादी की तैयारी बड़े जोरो-शोरों से चल रही थी…हर कोई अपना काम बड़ी समझदारी से संभाल रहा था…होना ही था सबकी लाडली व पाँच भाइयों की इकलौती बहन थी..!!   तैयारियों के साथ आज जब होटल जाना था वो दिन भी आ गया था..निम्मी के पापा नहीं थे तो उसने घर से विदा … Read more

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