एक वादा  – पुष्पा जोशी

तेज मुसलाधार बारिश हो रही थी।सुमि का बावरा मन आज फिर मचल रहा था,उस नदी को तैरकर पार करने के लिए मगर एक ऐसी बेड़ी थी,जो उसे जकड़े हुए थी।मन में एक बवंडर सा उठ रहा था।वह समझ नहीं पा रही थी कि उसके साथ क्या  हो रहा है। तभी  ‘लोट जाओ सुमि, आगे एक … Read more

 रिम झिम गिरे सावन  –  किरण केशरे

सुबह से रह रह कर बरसात हो रही थी, कभी तेज झड़ी तो कभी पानी की बरसती टप टप करती बूँदे,,,चारों तरफ सुहावना मौसम हो रहा था, दोपहर होने को आई, मैं बालकनी में झूले पर हाथ में भुट्टा लिए बैठी गुनगुनाते हुए शेखर के बाजार से आने का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। … Read more

कॉफ़ी-कैफ़े ‘… डॉ कविता माथुर

“मॉम, कॉफ़ी !” अचानक ये सुनकर सुमि जैसे गहरी तंद्रा से जागी हो। ,’ये लड़का सरप्राइज़ देना कभी नहीं छोड़ेगा!’ सुमि ये सोचने ही लगी थी कि रोहन ने पास आकर अपना सिर मॉं की गोद में रख दिया । कैप्टन रोहन आमतौर पर अपनी ज़िम्मेदारी समझने वाला संजीदा अफ़सर था । बचपन में ही … Read more

ज़िंदगी की क़ैद से! – डॉ कविता माथुर

“परे हटो, मत परेशान करो मुझे, जाओ उड़ जाओ।”, उन नन्हे-नन्हे शलभों पर चिल्लाते हुए बुरी तरह खाँसने लगा था दिलदार सिंह । “पानी पी, पानी पी ”, बाहर खड़े गार्ड की आवाज़ पर कोने में रखी सुराही से पानी पीने के लिए उठा तो जर्जर घुटनों ने जवाब दे दिया और वो लुढ़क कर … Read more

यादें – सुधा शर्मा

 आज फिर वही हिमाचल की खूबसूरत वादी, दूर तक फैली हुई बर्फ के पहाड़ों की मनोरम छटा , चारों ओर हरियाली , ठंड का सुहाना मौसम।, बस फर्क इतना कि तब किसी के स्नेह व भावनाओं से सराबोर प्रफुल्लित मन और आज उसकी स्मृतियों में डूबता उतरता अवसाद ग्रस्त हो चुका मन।                यहीं इन्हीं वादियों … Read more

दोहरे मापदंड – गीतांजलि गुप्ता

“रसोई का सारा सामान फिर से इधर उधर रख दिया, कितनी बार बताया रोली मुझे मुश्किल होती है।” लता देवी अपनी बहू पर झल्ला रही थीं। “माँ ऐसे समान रखने से कुछ ज़्यादा जगह हो जाती है।” रोली अपनी सफ़ाई देते हुए बोली। “तुझे कितनी जगह चाहिए, काम तो अधिकतर मैं ही करती हूँ। उसके … Read more

अनोखा आशीर्वाद – कमलेश राणा

साक्षी  कॉलेज में लेक्चरार है,,विनीत उसका सहपाठी भी है और प्रेमी भी,,दोनों ने फैसला किया था कि जब वो अपने पैरों पर खड़े हो जायेंगे,,तभी विवाह करेंगे,, आज upsc का रिजल्ट आया  था और वह IAS बन गया था,,दोनों की खुशी का पार नहीं था,,शाम को विनीत ने साक्षी को पार्क में मिलने बुलाया और … Read more

उचित निर्णय –  डॉ शिखा कौशिक ‘नूतन’

” ….आज पूरे पांच वर्ष हो गए अन्नपूर्णा से न मिले लेकिन ह्रदय आज जितना व्याकुल  हो रहा  है उतना पिछले पांच वर्षों में कभी  नहीं हुआ  | अन्नपूर्णा तो और लोग कहते थे …मेरे लिए तो केवल ‘ अन्नू ‘ थी वह ——-मेरी प्रियेसी , मेरी दोस्त —-मेरा सर्वस्व | आज  भी याद है … Read more

दरकते रिश्ते टूटते परिवार – रंजू भाटिया

औरत और मर्द का रिश्ता इतना उलझा हुआ क्यों हो जाता है आखिर…और वो तब जब वो रिश्ता पति पत्नी का हो ?  अभी ऐसे ही किसी की कुछ इसी” दरकते रिश्ते “की कहानी सुनते हुए पीछे पढ़ी हुई कुछ पंक्तियां याद आई कि ” औरत और मर्द का रिश्ता  जो इंसान को इंसान के … Read more

वो मेरी गलती थी –  डॉ शिखा कौशिक ‘नूतन’

सिमरन जनवरी की कड़कती सुबह में रजाई के भीतर बैड पर लेटी हुई थी । उसका दिल व् दिमाग दोनों सुलग रहे थे । रात भर वह  इसी तरह उलझनों के चक्रव्यूह में चक्कर लगाती रही थी। आज न उसका ऑफिस जाने का प्रोग्राम था और न ही पतिदेव हर्ष के लिए चाय बनाने का … Read more

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