हमारी याद – रमन शांडिल्य

“अरे! बेटा दीपू ! देखो कौन आया है , किसने डोर बैल बजाई है ।” दीपू आठवीं में हो गया है, मेरे कंधे से ऊपर जा चुका है, हां थोड़ा कमजोर जरूर है सेहत में भी, पढ़ाई में भी और घर के कामकाज में भी । मगर उसका सारा दिमाग और ध्यान फोन में जरूर … Read more

समझौता और समझ – बालेश्वर गुप्ता

 उद्विग्न रमेश ने निश्चय कर लिया कि वह आज रात को हर हाल में घर छोड़ देगा।उसे कही भी रहना पड़े,किसी भी आश्रम में, किसी भी तीर्थ स्थान पर,वह चला जायेगा या फिर उसे आत्म हत्या ही कर लेगा।      75 वर्षीय रमेश उसकी पत्नी जाह्नवी अपने बेटे मुन्ना के साथ ही रहते थे।मुन्ना और उसकी … Read more

*शकुनी* -मुकुन्द लाल

 जब तिलक अपनी बहन के घर पहुंँचा तो हाल-सामाचार व नास्ता-पानी की औपचारिकता के बाद उसने पूछा कि जीजाजी कहीं दिखलाई नहीं पड़ रहे हैं, तब उनकी बहन ने कहा कि उसके जीजा कुछ आवश्यक काम से बाज़ार गये हुए हैं। उसी समय उसके जीजा का छोटा भाई कोई सामान से भरा हुआ बड़ा सा … Read more

माँ को ऐसे ही रहना चाहिए – आभा अदीब राज़दान

“ अजीत जी के घर में देखा है तुमने, उन की अम्मा के कितने नखरे हैं । उनके घर जाओ तब जितनी देर बैठो वहां उन की अम्मा जी ड्राइंग रूम में बैठी ही रहती हैं । अजीत जी भी अपनी माँ से कुछ कहते नहीं । अधिक ही सम्मान करते हैं उनका । हर … Read more

बरगद की चुड़ैल – सौम्या मिश्रा जौहरी 

कोख़ में पाला था उसने और …रात दिन जागी भी थी….सब कहते पगली थी…! जब भी उस बरगद के तिराहे से निकलता था बस उसको गंदे और फटे कपड़ों में विशाल बरगद के नीचे बने मंदिर के बरामदे में पाया। मां के मुख से सुना था , पूजा करती औरतों से कहती थीं…”न जाने किस … Read more

हैपी रिटायरमेंट – नीरजा कृष्णा

आज सुदर्शन बाबू का रिटायरमेंट हो रहा है। उनके स्पेशल डे पर उनके दोनों बच्चे सरप्राइज देने सपरिवार पहुंच गए थे। वो सुबह से ही सजधज में लगे थे। जो जीवन में कभी पार्लर नहीं गए थे पर आज सुबह ही पूरा मेकअप करा कर आए थे। आशा जी उनको देख कर लोटपोट हुई जा … Read more

 मैं समझौता क्यों करूं? – गीता वाधवानी

आज प्रीति का विवाह होने जा रहा था। वह दुल्हन के रूप में सजी संवरी बैठी थी। उसका विवाह एक पढ़े-लिखे, सुंदर व्यक्तित्व वाले प्रकाश नामक लड़के से हो रहा था। स्वयं को दुल्हन के रूप में देखकर प्रीति को एक पुरानी दर्दनाक घटना स्मरण हो आई। इस घटना का जिक्र वह प्रकाश से कर … Read more

अब कोई समझौता नहीं ‘ –  विभा गुप्ता

     ” बेटे की याद आ रही है..।” जगदीश बाबू ने पत्नी गायत्री से पूछा तो वे बेटे का फोटो अपने आँचल में छिपाती हुई बोली, ” नहीं तो, मैं भला उसे क्यों याद करूँ जो अपनी माँ को ही भूल गया है।”   ” हाँ-हाँ, सब समझता हूँ।आज उसका जन्मदिन है ना,उसे आशीर्वाद देने का … Read more

एक समझौता ऐसा भी … रश्मि प्रकाश

“अरे सुरेखा बहन आप दोनों सुबह सुबह कहाँ चल दिए… हम तो आज आपके घर बिटिया के ब्याह का न्योता देने आने वाले थे।” कलाने सुरेखा को दरवाज़े पर ताला लगाते देख पूछ लिया  “ हम बिटिया के घर जा रहे हैं कला बहन…बिटिया दोनों बच्चों को सँभाल नहीं पा रही आप तो जानती ही … Read more

वैवाहिक बँधन या समझौता –  के कामेश्वरी

रजनी क्लीनिक से थक हार कर घर पहुँची । घर की हालत देख कर उसके पूरे शरीर में जैसे कमजोरी आ गई थी । उसे घर को देख कर ऐसा लग रहा था जैसे कि यहाँ बहुत बड़ी जंग हुई हो । पूरा सामान बिखरा पड़ा था । सोफे पर किताबें ,कलर पेंसिल्स यह अभी … Read more

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