हमारी याद – रमन शांडिल्य
“अरे! बेटा दीपू ! देखो कौन आया है , किसने डोर बैल बजाई है ।” दीपू आठवीं में हो गया है, मेरे कंधे से ऊपर जा चुका है, हां थोड़ा कमजोर जरूर है सेहत में भी, पढ़ाई में भी और घर के कामकाज में भी । मगर उसका सारा दिमाग और ध्यान फोन में जरूर … Read more